फलों के नए बाग से किसान बेहिसाब कमाई कर सकते हैंमई और जून का महीना नए बाग की शुरुआत करने और उसकी तैयारी के लिए सबसे सही समय माना जाता है. व्यावसायिक स्तर पर फलों का बाग लगाना एक बड़ा निवेश है, और अगर इसकी प्लानिंग कागज पर पहले से ही मजबूती से न की जाए, तो बाद में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. एक कामयाब और मुनाफा देने वाले बाग की नींव रखने के लिए किसानों को कुछ बुनियादी सिद्धांतों को जानना और उन पर अमल करना बेहद जरूरी है. सही रणनीति से लगाया गया बाग न केवल पौधों को स्वस्थ रखता है, बल्कि आने वाले कई सालों तक किसान को नियमित और बेहतर आमदनी देता है.
एक स्वस्थ बाग की शुरुआत हमेशा सही जमीन और सही लोकेशन से होती है. व्यापारिक नजरिए से बाग हमेशा ऐसी जगह लगाएं जो शहर या मुख्य बाजार के पास हो और जहां तक गाड़ियों के आने-जाने की अच्छी सुविधा (यातायात) हो. इसके साथ ही, पौधे खरीदने से पहले अपने खेत की मिट्टी की जांच जरूर करवाएं. मिट्टी की रिपोर्ट के हिसाब से ही तय करें कि वहां कौन सा फल अच्छा मुनाफा देगा. अगर मिट्टी में कोई कमी है, तो विशेषज्ञों की सलाह पर उसका उपचार करें. खेत में जल निकासी का बढ़िया इंतजाम होना चाहिए ताकि बरसात के दिनों में पानी जमा न हो, क्योंकि जलभराव से जड़ें सड़ जाती हैं.
जमीन के आकार और फलों की वैरायटी के हिसाब से पूरे खेत को अलग-अलग ब्लॉक में बांट लेना चाहिए. सबसे पहले खेत की 2-3 बार गहरी जुताई करें, पाटा चलाकर जमीन को एकदम समतल कर लें. इसके बाद पौधे लगाने के लिए सही विधि से मार्किंग करें. इसके लिए तीन तरीके अपनाए जा सकते हैं:
वर्गाकार विधि: यह सबसे आसान और लोकप्रिय तरीका है, जिसमें लाइन से लाइन और पौधे से पौधे की दूरी बराबर होती है. इसमें शुरुआती सालों में बीच की खाली जगह में दूसरी फसल (इंटरक्रॉपिंग) भी ली जा सकती है.
षटभुजाकार विधि: इसमें पौधे त्रिभुज के आकार में लगाए जाते हैं. इसमें वर्गाकार विधि के मुकाबले 15% ज्यादा पौधे आते हैं.
फिलर सिस्टम: अगर आप मुख्य पेड़ों के बीच में कोई कम समय वाला अस्थाई पेड़ (जैसे पपीता) लगाना चाहते हैं, तो वर्गाकार के बीच में एक और पौधा लगाने वाली यह विधि सबसे बेस्ट है.
पौधों की दूरी तय करने के बाद, तय जगहों पर खूंटियां गाड़ दें. बाग लगाने से करीब एक-डेढ़ महीना पहले यानी मई के महीने में गड्ढे खोद लेने चाहिए. गड्ढा खोदते समय ऊपर की उपजाऊ मिट्टी एक तरफ और नीचे की मिट्टी दूसरी तरफ रखें. मई-जून की तेज गर्मी में गड्ढों को खुला छोड़ने से धूप और हवा के कारण कीड़े और उनके अंडे मर जाते हैं. इसके 15-20 दिन बाद गड्ढा भरें.
नीचे की मिट्टी में 40-45 किलोग्राम कम्पोस्ट खाद मिलाकर नीचे डालें. फिर ऊपर की मिट्टी में 1.5 किलो सिंगल सुपर फास्फेट, 15-20 किलो कम्पोस्ट और कीड़ों से बचाव के लिए 20-25 मिली क्लोरपायरीफॉस पानी में मिलाकर डालें. गड्ढे को जमीन की सतह से 10-15 सेंटीमीटर ऊपर तक भरकर थाला बना दें और पानी दे दें.
बाजार में जिस फल की मांग सबसे ज्यादा हो, हमेशा उसी का चुनाव करें. अधिक पैदावार देने वाली सही वैरायटी (चुनना ही समझदारी है.
आम: अगर आप आम लगाना चाहते हैं, तो समय के हिसाब से चुनें—मई-जून के लिए 'बाम्बे ग्रीन' या 'स्टौल'; जून के लिए 'लंगड़ा' और 'दशहरी'; जुलाई-अक्टूबर के लिए 'चौसा'; और सघन बागवानी के लिए 'अमरीपाली' व 'मल्लिका' जैसी हाइब्रिड किस्में बेहतरीन हैं.
लीची: इसमें 'शाही', 'रोज सेंटेड' और 'स्वर्णरूपा' मुख्य हैं.
अमरूद: इसके लिए 'इलाहाबादी सफेदा', 'लखनऊ-49' और 'ललित' अच्छी मानी जाती हैं.
आंवला: आंवला उगाने वाले किसान 'चकैया' या 'नरेंद्र-7' चुन सकते हैं.
पौधे हमेशा किसी भरोसेमंद सरकारी या मान्यता प्राप्त नर्सरी से ही समय से पहले बुक करके खरीदें. ध्यान रहे कि पौधे स्वस्थ हों, कलमी हों, ज्यादा उम्र के न हों और लाते समय उनकी मिट्टी की पिंडी यानी जड़ का हिस्सा टूटने न पाए.
पौधे लगाने का सबसे सही समय जून के आखिरी हफ्ते से जुलाई के अंत तक (मॉनसून के दौरान) होता है, जिसे अगस्त तक भी किया जा सकता है. खूंटियों के पास पौधे की पिंडी के आकार का छोटा गड्ढा बनाकर पौधे को सीधा लगाएं, चारों तरफ से मिट्टी दबाएं और तुरंत पानी दें. बाग की सुरक्षा के लिए पौधे लगाने से पहले ही पूरे खेत की मजबूत घेराबंदी बहुत जरूरी है ताकि आवारा पशु नुकसान न पहुंचाएं.
इसके अलावा, तेज आंधी-तूफान से बाग को बचाने के लिए खेत की चारों दिशाओं खासकर उत्तर-पश्चिम के किनारों पर घने और ऊंचे पेड़ जैसे देसी आम, जामुन या शीशम वायु अवरोधक वृक्ष पास-पास लगाएं. इन बातों का ध्यान रखकर हमारे किसान एक शानदार और लंबे समय तक कमाई देने वाला बाग तैयार कर सकते हैं.
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