सरकार ने IFFCO के लिक्विड और दानेदार Nano NPK को दी हरी झंडी, किसानों को होगा फायदा

सरकार ने IFFCO के लिक्विड और दानेदार Nano NPK को दी हरी झंडी, किसानों को होगा फायदा

इफको ने Nano NPK Liquid (8-8-10) और Nano NPK Granular (20-10-10) लॉन्च किए हैं, जिन्हें FCO के तहत मंजूरी मिल गई है. ये नैनो उर्वरक फसल को पत्तियों और जड़ों दोनों के जरिए संतुलित पोषण देने के लिए तैयार किए गए हैं, जिससे पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग और लागत में कमी संभव है.

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सरकार ने IFFCO के लिक्विड और दानेदार Nano NPK को दी हरी झंडी, किसानों को होगा फायदाइफको के नैनो एनपीके काे मिली हरी झंडी

भारतीय किसान उर्वरक सहकारी संस्था (IFFCO) ने एक बार फिर कृषि नवाचार के क्षेत्र में अहम उपलब्धि हासिल की है. देश में पहले नैनो उर्वरकों की शुरुआत करने के बाद अब इफको ने स्वदेशी तकनीक से विकसित तरल नैनो एनपीके (Nano NPK Liquid) (8-8-10) और दानेदार नैनौ एनपीके (Nano NPK Granular (20-10-10) लॉन्च किए हैं. इन दोनों उत्पादों को उर्वरक नियंत्रण आदेश उर्वरक नियंत्रण आदेश (Fertilizer Control Order- FCO) के तहत मंजूरी मिल चुकी है, जिसे हाल ही में राजपत्र में अधिसूचित किया गया है.

दो स्तर पर पोषण देने वाली नई तकनीक

इफको के मैन‍ेजिंग डायरेक्‍टर कीर्त‍िकुमार जे पटेल ने जानकारी साझा करते हुए कहा कि इफको के ये नैनो उर्वरक पारंपरिक खाद से अलग हैं, क्योंकि ये फसल को दो तरीके से पोषण देते हैं. Nano NPK Liquid को पत्तियों पर छिड़काव के लिए तैयार किया गया है, जिससे पौधे सीधे पोषक तत्व ग्रहण कर सकें. वहीं, Nano NPK Granular (20-10-10) को मिट्टी और जड़ों के माध्यम से पोषण देने के लिए विकसित किया गया है. इससे फसल को जरूरत के हिसाब से संतुलित पोषण मिलेगा.

कम लागत में ज्यादा उत्पादन की उम्‍मीद

इफको ने बयान जारी कर कहा है कि नैनो तकनीक के कारण पोषक तत्वों का उपयोग बेहतर तरीके से होता है, जिससे पारंपरिक उर्वरकों की जरूरत कम हो सकती है. इससे किसानों की लागत घटने और उत्पादन बढ़ने की संभावना बनती है. साथ ही मिट्टी की सेहत पर सकारात्मक असर पड़ता है और पर्यावरण पर दबाव भी कम होता है.

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम पहल

वैश्विक स्तर पर उर्वरक आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में यह विकास भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे आयात पर निर्भरता कम करने और विदेशी मुद्रा की बचत में मदद मिल सकती है. यह पहल आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य और सहकारिता आधारित विकास को भी मजबूती देती है.

किसानों के लिए क्या बदलेगा?

इन नए नैनो उर्वरकों से किसानों को कम लागत में बेहतर गुणवत्ता और अधिक उत्पादन का विकल्प मिल सकता है. सटीक पोषण प्रबंधन के कारण फसल की गुणवत्ता सुधरने और संसाधनों के बेहतर उपयोग की उम्मीद है. इफको का यह कदम टिकाऊ और आधुनिक खेती की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है.

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