संसद में उठा किसानों का मुद्दा (फाइल फोटो)संसद में कृषि मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सत्तापक्ष-विपक्षी नेताओं ने किसानों के मुद्दे जोरदार तरीके से उठाए. पंजाब से कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने राज्य के किसानों की हालत को गंभीर बताते हुए उनके लिए 50 हजार करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग की. उन्होंने कहा कि लंबे समय से आर्थिक दबाव झेल रहे किसानों को तत्काल राहत देने की जरूरत है. वडिंग ने किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान सैकड़ों किसानों की जान गई थी, जिनके परिवारों को अब तक उचित मुआवजा नहीं मिल सका है.
उन्होंने मांग की कि ऐसे सभी प्रभावित परिवारों को सरकार सीधे आर्थिक सहायता दे. इसके साथ ही पराली जलाने की समस्या के समाधान के लिए हर किसान को 5 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का सुझाव भी रखा, ताकि प्रदूषण की समस्या को कम किया जा सके.
उन्होंने केंद्र और पंजाब सरकार के बीच टकराव का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस वजह से किसानों को आपदा राहत फंड के तहत मिलने वाली बाढ़ सहायता भी समय पर नहीं मिल पाई. इससे किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. चर्चा में शामिल अन्य सांसदों ने भी अलग-अलग मुद्दों पर सरकार का ध्यान खींचा.
बीजेपी सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी ने तेलंगाना के किसानों के हित में दालों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाने की मांग की. उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आमदनी में सुधार होगा और खेती को प्रोत्साहन मिलेगा.
समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश चंद्र उत्तम पटेल ने सोयाबीन, डेयरी उत्पाद और पशु चारे के आयात पर रोक लगाने की मांग की. उन्होंने कहा कि आयात बढ़ने से देश के किसानों को आर्थिक नुकसान होता है. उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कवर को 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने की भी मांग रखी.
वहीं, तृणमूल कांग्रेस की सांसद प्रतिमा मंडल ने किसानों की आर्थिक स्थिति को लेकर सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है, जिससे उनकी हालत लगातार कमजोर होती जा रही है. उन्होंने किसान आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की. (पीटीआई)
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