कृषि विकास में यूपी बना देश में सबसे तेज गति से बढ़ने वाला राज्य: सीएम योगीउत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार के नौ वर्ष पूरे होने पर अपने संबोधन में किसानों को प्राथमिकता दी. सीएम योगी ने कहा, सपा-बसपा व कांग्रेस सरकारों ने किसानों को बनाया कर्जदार, डबल इंजन सरकार ने फिर उसे उत्पादक की श्रेणी में खड़ा किया. सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने पीएम किसान सम्मान निधि के रूप में उत्तर प्रदेश के किसानों के खाते में 99 हजार करोड़ रुपये भेजे हैं. कांग्रेस व सपा-बसपा सरकारों ने किसानों को कर्जदार बना दिया था, डबल इंजन सरकार ने उसे कर्ज से उबारकर फिर से उत्पादक की श्रेणी में लाकर खुशहाली की ओर बढ़ाया है.
उन्होंने कहा कि अब हमारा किसान तीन-तीन फसलें ले रहा है. प्रदेश में 56 लाख हेक्टेयर में सिंचाई की अतिरिक्त सुविधा हुई है. सरकार पहली बार प्राइवेट ट्यूबवेल में फ्री बिजली की सुविधा दे रही है. अभी 23 लाख ट्यूबवेल डीजल से संचालित हो रहे हैं, किसानों को सोलर पैनल देकर उन्हें इससे भी मुक्त कराएंगे. इसके लिए बजट में पैसा भी दिया गया है. वहीं सरकार अन्नदाता किसान को खुशहाल करने की दिशा में निरंतर कदम बढ़ाती रहेगी.
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सरकार ने पहला निर्णय ही किसानों के लिए लिया था. ऋण माफी से किसान सम्मान निधि तक की यात्रा में यूपी की कृषि विकास दर 8.5 प्रतिशत से बढ़कर 18 फीसदी हो गई है. उन्होंने कहा कि देश में यूपी कृषि विकास में सबसे तेज गति से बढ़ने वाला राज्य है. अब यहां किसान आत्महत्या नहीं करता है.
गन्ना किसानों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने यूपी में आए परिवर्तन से भी सभी को अवगत कराया. उन्होंने बताया कि 2012 से 2017 के मध्य कुल 95,000 करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य का भुगतान हुआ था. जबकि, हमने 2017 से अब तक 9 वर्ष में 3,16,800 करोड़ का भुगतान किया. वहीं 2017 में किसानों को 300 रुपये प्रति कुंतल गन्ने का दाम मिलता था, आज 400 रुपये मिल रहा है.
योगी ने कहा कि घटलौती बंद और पर्ची की समस्या का समाधान भी हो गया. सरकारी क्रय केंद्रों पर धान, गेहूं, सरसों, तिलहन, दलहन, मिलेट्स, बाजरा, मक्का की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद हो रही है. हमने किसानों से यह भी कहा है कि बाजार में अच्छा दाम मिले तो वहां अपनी फसल बेचें, लेकिन कम दाम मिले तो अपने उत्पाद क्रय केंद्रों पर बेचें. हमारी सरकार ने किसानों को राहत भी दी, पिछली सरकार में किसानों से मंडी शुल्क ढाई से तीन फीसदी लिया जाता था, जो अब महज एक फीसदी लिया जा रहा है.
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