AI तकनीक से फसलों की बीमारी पहचानना आसानखेती-किसानी में तकनीक के बढ़ते दखल के बीच हैदराबाद के 'वीएनआर विज्ञाना ज्योति इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी' (VNRVJIET) को एक बड़ी कामयाबी मिली है. संस्थान के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग को एक खास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इनोवेशन के लिए भारत सरकार की तरफ से पेटेंट दिया गया है. इस तकनीक का नाम 'लीफ डिजीज डिटेक्शन सिस्टम यूजिंग कनवोल्यूशनल न्यूरल नेटवर्क्स' (सीएनएन) है. यह तकनीक फसलों के पत्तों की तस्वीरें देखकर पल भर में बीमारी का पता लगा लेगी, जिससे किसानों को बड़े नुकसान से बचाया जा सकेगा.
इस पूरे रिसर्च की अगुवाई करने वाली मुख्य शोधकर्ता डॉ. विजया सरस्वती आर. के लिए यह सिर्फ एक वैज्ञानिक खोज नहीं, बल्कि एक व्यक्तिगत सपना था. एक किसान की बेटी होने के नाते उन्होंने बचपन से ही फसलों में लगने वाली बीमारियों के कारण किसानों को होने वाले भारी आर्थिक नुकसान और उनके परिवारों की लाचारी को बेहद करीब से देखा था. अपने पिता और अन्य किसानों के इसी दर्द को दूर करने के लिए उन्होंने इस समस्या का एआई (AI) आधारित समाधान ढूंढने की ठानी, जो आज एक पेटेंट के रूप में पूरी दुनिया के सामने है.
इस क्रांतिकारी तकनीक को बेहद सटीक और भरोसेमंद बनाने के लिए वैज्ञानिकों की टीम ने 20,000 से भी अधिक तस्वीरों के डेटाबेस का इस्तेमाल किया है. शुरुआती चरण में इस मॉडल को मुख्य रूप से टमाटर, आलू और शिमला मिर्च (पेपर) जैसी फसलों पर केंद्रित किया गया है. यह सिस्टम बीमारी को बहुत शुरुआती चरण में ही पहचान लेता है, जिससे फसल पूरी तरह बर्बाद होने से बच जाती है.
समय पर इलाज: बीमारी की समय पर पहचान होने से किसान सही वक्त पर कीटनाशकों का छिड़काव कर सकेंगे, जिससे पैसे और फसल दोनों की बचत होगी.
कम होगा कीटनाशकों का खर्च: बीमारी का सटीक पता होने से जरूरत से ज्यादा कीटनाशकों का छिड़काव नहीं करना पड़ेगा, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों को फायदा होगा.
इस पेटेंट को बनाने में कंप्यूटर साइंस के अलावा आईटी (IT), इलेक्ट्रिकल (EEE) और इलेक्ट्रॉनिक्स (ECE) विभागों के वैज्ञानिकों ने मिलकर काम किया है, जो देश में Interdisciplinary Research की एक बेहतरीन मिसाल है.
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