गन्ने की खेती में टेक्नोलॉजी का कमाल, किसानों को मिल रहा ज्यादा उपज और कम लागत का फायदा

गन्ने की खेती में टेक्नोलॉजी का कमाल, किसानों को मिल रहा ज्यादा उपज और कम लागत का फायदा

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) गन्ना किसानों के लिए आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दे रही है. सेट ट्रीटमेंट डिवाइस, टिश्यू कल्चर माइक्रोप्रोपेगेशन, सिंगल बड चिप तकनीक और मल्टीटास्कर शुगरकेन कटर प्लांटर जैसी इनोवेटिव तकनीकों से गन्ने की खेती अधिक लाभकारी बन रही है. इन तकनीकों से बीज की बचत, श्रम लागत में कमी, रोग नियंत्रण और उत्पादन में अच्छी वृद्धि हो रही है. वहीं AI और सैटेलाइट आधारित निगरानी से फसल प्रबंधन और कटाई की योजना भी अधिक प्रभावी हो रही है.

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गन्ने की खेती में टेक्नोलॉजी का कमाल, किसानों को मिल रहा ज्यादा उपज और कम लागत का फायदागन्ने की खेती में टेक्नोलॉजी से किसानों को बहुत सुविधा मिल रही है

देश में गन्ने की खेती तेजी से आधुनिक हो रही है. पारंपरिक खेती की जगह अब नई तकनीकें ले रही हैं, जिससे किसानों की लागत घट रही है और उत्पादन बढ़ रहा है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और उससे जुड़े संस्थान गन्ना उत्पादन को अधिक लाभकारी बनाने के लिए कई आधुनिक तकनीकों पर काम कर रहे हैं. इन तकनीकों का मकसद बीज की बचत, रोग नियंत्रण, श्रम लागत में कमी और फसल की पैदावार बढ़ाना है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान इन आधुनिक तरीकों को अपनाते हैं तो गन्ने की खेती अधिक टिकाऊ, लाभकारी और तकनीक-संचालित बन सकती है.

रोग नियंत्रण में मददगार सेट ट्रीटमेंट डिवाइस

गन्ने की खेती में लाल सड़न (रेड रॉट) और स्मट जैसी बीमारियां किसानों के लिए बड़ी चुनौती रही हैं. इसे देखते हुए ICAR ने मेकनाइज्ड प्राइमिंग एंड सेट ट्रीटमेंट डिवाइस (STD) बनाया है. यह तकनीक निगेटिव प्रेशर एब्जॉर्प्शन प्रणाली के जरिए बड चिप्स और गन्ने के सेट्स को कृषि रसायनों और लाभकारी सूक्ष्मजीवों से उपचारित करती है. इससे शुरुआती अवस्था में रोगों का खतरा कम हो जाता है और स्वस्थ पौध तैयार होती है. इस तकनीक की मदद से बीज सामग्री की जरूरत भी काफी कम हो जाती है.

टिश्यू कल्चर से मिल रहे रोगमुक्त पौधे

गन्ने की खेती में टिश्यू कल्चर माइक्रोप्रोपेगेशन तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है. इसके जरिए लैब में तैयार किए गए पौधे पूरी तरह रोगमुक्त और उच्च क्वालिटी वाले होते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, टिश्यू कल्चर से तैयार एक एकड़ नर्सरी से करीब 25 एकड़ क्षेत्र में रोपाई की जा सकती है. इससे पौधों की एकरूपता बनी रहती है और उत्पादन में अच्छी वृद्धि होती है. कई क्षेत्रों में इस तकनीक के जरिए प्रति एकड़ 60 से 70 टन तक उपज पाया जा रहा है.

सिंगल बड चिप तकनीक से बीज की बचत

परंपरागत गन्ना रोपाई में बड़ी मात्रा में बीज गन्ने की जरूरत होती है, जिससे ढुलाई और भंडारण की लागत बढ़ जाती है. सिंगल बड चिप तकनीक इस समस्या का समाधान पेश कर रही है. इसमें पूरे गन्ने की बजाय केवल एकल कलियों (बड चिप्स) का उपयोग किया जाता है. पहले इन्हें नर्सरी में तैयार किया जाता है और बाद में खेतों में रोपा जाता है. 

इस तकनीक से बीज लागत घटती है, पौधों की जीवित रहने की क्षमता बढ़ती है और किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिलता है.

मशीनों से आसान हुई गन्ने की बुवाई

खेती में मजदूरों की बढ़ती कमी और लागत को देखते हुए ICAR ने मल्टीटास्कर शुगरकेन कटर प्लांटर जैसी आधुनिक मशीनों को बढ़ावा दिया है.
यह मशीन एक ही बार में कई काम करती है, जिनमें खाई (ट्रेंच) बनाना, गन्ने के सेट रखना, खाद डालना और मिट्टी से ढंकना शामिल है. इससे बुवाई की प्रक्रिया तेज और व्यवस्थित हो जाती है.

विशेषज्ञों के मुताबिक इस मशीन के उपयोग से मजदूरी की जरूरत में लगभग 90 प्रतिशत तक कमी और रोपाई की लागत में 60 प्रतिशत तक बचत संभव है.

फसल अवशेष प्रबंधन की नई तकनीक

गन्ने की कटाई के बाद खेतों में बचा अवशेष किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती होता है. इस समस्या के समाधान के लिए ट्रैश मल्चर-कम-स्टबल शेवर तकनीक का उपयोग किया जा रहा है. यह मशीन कटाई के बाद बचे अवशेषों का प्रबंधन करती है और रैटून फसल (दोबारा उगने वाली फसल) के लिए खेत तैयार करती है. इससे खेत तैयार करने में लगने वाला समय कम होता है और अगली फसल की शुरुआत जल्दी की जा सकती है. 

चौड़ी कतार और ट्रेंच रोपाई से फायदा 

आईसीएआर किसानों को वाइड स्पेसिंग और ट्रेंच प्लांटिंग तकनीक अपनाने की भी सलाह दे रहा है. इस पद्धति में पौधों के बीच अधिक दूरी रखी जाती है, जिससे फसल को पर्याप्त धूप और पोषण मिलता है. साथ ही बीज की जरूरत में 50 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है. 

चौड़ी कतारों के कारण ट्रैक्टर आधारित निराई-गुड़ाई और अन्य खेती के काम भी आसान हो जाते हैं. इसके अलावा पानी के उपयोग की दक्षता में सुधार होता है, जो जल संकट के दौर में बेहद महत्वपूर्ण है.

AI और सैटेलाइट से होगी स्मार्ट खेती

गन्ना खेती अब डिजिटल तकनीक से भी जुड़ रही है. AI और सैटेलाइट आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली के माध्यम से खेतों की मैपिंग की जा रही है.
इसके जरिए फसल की वृद्धि, पकना और उत्पादन क्षमता का आकलन किया जा सकता है. चीनी मिलों को भी इससे कटाई की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलती है.

विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉनिटरिंग किसानों को सही समय पर सलाह और बेहतर फसल प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

किसानों के लिए बढ़ रहा लाभ

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक तकनीकों के उपयोग से गन्ना उत्पादन में वृद्धि, लागत में कमी और रोगों पर नियंत्रण संभव हो रहा है. यही कारण है कि देश के कई गन्ना उत्पादक राज्यों में किसान अब पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों को भी तेजी से अपना रहे हैं. 

तकनीक आधारित खेती के इस दौर में गन्ना किसानों के लिए उत्पादन बढ़ाने, संसाधनों की बचत करने और आय में वृद्धि का नया रास्ता खुलता दिखाई दे रहा है. ICAR की ये पहल आने वाले समय में देश की गन्ना खेती को और अधिक आधुनिक और लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.

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