अब पैकेट ही बताएगा फल की गुणवत्ता! भोपाल के वैज्ञानिकों ने तैयार की इंटेलिजेंट पैकेजिंग

अब पैकेट ही बताएगा फल की गुणवत्ता! भोपाल के वैज्ञानिकों ने तैयार की इंटेलिजेंट पैकेजिंग

भोपाल के भारतीय कृषि अभियंत्रिकी संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी और उनकी टीम ने फलों की ताजगी पहचानने के लिए इंटेलिजेंट पैकेजिंग विकसित की है.चुकंदर के पाउडर से तैयार स्मार्ट स्टिकर और फ्रेशनेस मार्कर के रंग में बदलाव से ग्राहक बिना पैकेट खोले फल की गुणवत्ता का अंदाजा लगा सकेगा.

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अब पैकेट ही बताएगा फल की गुणवत्ता! भोपाल के वैज्ञानिकों ने तैयार की इंटेलिजेंट पैकेजिंग

फलों की गुणवत्ता और ताजगी को आसानी से पहचानने के लिए भारतीय कृषि अभियंत्रिकी संस्थान (CIAE), भोपाल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी और उनकी टीम ने एक नई इंटेलिजेंट पैकेजिंग तकनीक विकसित की है. इस पैकेजिंग की खासियत यह है कि पैकेट पर लगे स्मार्ट मार्कर के रंग में बदलाव देखकर ग्राहक फल की गुणवत्ता और खराब होने की स्थिति का अंदाजा लगा सकेगा.

चुकंदर के पाउडर से तैयार हुआ स्मार्ट स्टिकर

डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी की टीम ने इस तकनीक के तहत चुकंदर के पाउडर से एक विशेष स्मार्ट स्टिकर तैयार किया है. इसे पारदर्शी पैकेट के साथ इस्तेमाल किया जाता है.पैकेट पर लगाए गए फ्रेशनेस मार्कर फल की स्थिति के अनुसार संकेत देते हैं. इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि उपभोक्ता बिना पैकेट खोले ही मार्कर के रंग को देखकर फल की ताजगी का अंदाजा लगा सकता है.यानी फल खराब होने की प्रक्रिया शुरू होने पर पैकेजिंग स्वयं उसकी गुणवत्ता में बदलाव का संकेत देगी.

बिना पैकेट खोले पता चलेगी फल की गुणवत्ता

आमतौर पर फल खरीदते समय ग्राहक केवल उसके बाहरी रंग, आकार और बनावट को देखकर उसकी गुणवत्ता का अनुमान लगाता है. लेकिन कई बार बाहर से सामान्य दिखाई देने वाला फल अंदर से खराब होना शुरू हो चुका होता है.

इंटेलिजेंट पैकेजिंग इस समस्या को काफी हद तक दूर कर सकती है. स्मार्ट मार्कर के जरिए फल की गुणवत्ता में होने वाले बदलाव का दृश्य संकेत मिलेगा. इससे ग्राहक को फल की ताजगी के बारे में बेहतर जानकारी मिल सकेगी और खराब उत्पाद खरीदने की संभावना कम होगी.

आम समेत कई फलों के लिए उपयोगी तकनीक

डॉ. त्रिपाठी के मुताबिक भारत में इंटेलिजेंट पैकेजिंग की काफी जरूरत है, क्योंकि देश में फलों का बड़ा बाजार है और कटाई के बाद उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है. विकसित तकनीक का इस्तेमाल आम समेत कई महत्वपूर्ण फलों की गुणवत्ता की निगरानी के लिए किया जा सकता है.इस तकनीक की टेस्टिंग पूरी हो चुकी है और अब इसे व्यावसायिक स्तर पर पहुंचाने के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के प्रयास किए जा रहे हैं.

भारत में क्यों जरूरी है इंटेलिजेंट पैकेजिंग?

भारत में फलों और सब्जियों की कटाई के बाद होने वाली हानि एक बड़ी चुनौती है. उचित पैकेजिंग, परिवहन और भंडारण की कमी के कारण बड़ी मात्रा में कृषि उपज बाजार तक पहुंचने से पहले या उसके बाद खराब हो जाती है.

स्मार्ट और इंटेलिजेंट पैकेजिंग ऐसी स्थिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.यह उत्पाद की ताजगी, गुणवत्ता और सुरक्षा की निगरानी में मदद करती है. इससे उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता वाला उत्पाद मिल सकता है और किसानों तथा कारोबारियों को भी नुकसान कम करने में मदद मिल सकती है.

किसानों से लेकर उपभोक्ताओं तक फायदा

इंटेलिजेंट पैकेजिंग के व्यापक इस्तेमाल से कृषि क्षेत्र को कई फायदे हो सकते हैं—

  •  फलों और कृषि उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने में मदद मिलेगी।
  •  कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।
  • खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा बेहतर होगी।
  • उपभोक्ता खरीदारी के समय उत्पाद की ताजगी को आसानी से समझ सकेगा।
  • किसानों और उत्पादकों को बेहतर बाजार मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी।
  •  खाद्य अपव्यय को कम करने में मदद मिलेगी।
  •  पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा।
  • कृषि उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने से भारत की कृषि निर्यात क्षमता मजबूत हो सकती है।

कृषि क्षेत्र में नई तकनीक की ओर कदम

भोपाल स्थित भारतीय कृषि अभियंत्रिकी संस्थान के वैज्ञानिकों की यह पहल कृषि उपज के पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट में तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. अगर इस तरह की पैकेजिंग बड़े पैमाने पर बाजार में आती है, तो फल खरीदने वाले उपभोक्ताओं के लिए गुणवत्ता की पहचान आसान हो सकती है और खराब होने वाली उपज से होने वाले आर्थिक नुकसान को भी कम किया जा सकता है.

 

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