भोपाल के भारतीय कृषि अभियंत्रिकी संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी और उनकी टीम ने फलों की ताजगी पहचानने के लिए इंटेलिजेंट पैकेजिंग विकसित की है.चुकंदर के पाउडर से तैयार स्मार्ट स्टिकर और फ्रेशनेस मार्कर के रंग में बदलाव से ग्राहक बिना पैकेट खोले फल की गुणवत्ता का अंदाजा लगा सकेगा.
IIITDM जबलपुर ने एमपी काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के सहयोग से स्वदेशी स्मार्ट हाइब्रिड सोलर ड्रायर विकसित किया है.यह तकनीक सूर्यास्त के बाद भी चार घंटे तक कार्य करती है और टमाटर, प्याज जैसी जल्दी खराब होने वाली फसलों को वैल्यू एडेड उत्पादों में बदलकर छोटे किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगी.
मध्यप्रदेश हरित ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से नई पहचान बना रहा है। राज्य भारतीय रेलवे सहित 8 राज्यों को ग्रीन एनर्जी की आपूर्ति कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सौर, पवन और पंप्ड हाइड्रो परियोजनाओं के जरिए मध्यप्रदेश जल्द ही देश का अग्रणी स्वच्छ ऊर्जा केंद्र बनेगा।
सागर में आलू, प्याज और लहसुन की खेती के लिए आधुनिक प्लांटर-डिगर मशीन किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है.यह मशीन बुवाई से लेकर खुदाई तक का काम कर 40 से 60% तक श्रम बचाती है, लागत घटाती है और उत्पादन बढ़ाने में मदद करती है.
भोपाल स्थित आईसीएआर-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान (CIAE) और भारतीय पैकेजिंग संस्थान (IIP) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय मंथन में कृषि उत्पादों के लिए स्मार्ट एवं इंटेलिजेंट पैकेजिंग तकनीकों पर व्यापक चर्चा हुई.विशेषज्ञों ने AI, IoT, बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग और फ्रेशनेस इंडिकेटर जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने तथा इनके व्यावसायीकरण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर रोडमैप तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया.
मध्य प्रदेश के सागर जिले में अल्ट्रा लो-कॉस्ट शेडनेट हाउस योजना को किसानों का शानदार समर्थन मिल रहा है.60 के लक्ष्य के मुकाबले 62 आवेदन प्राप्त हुए हैं. कम लागत में संरक्षित खेती के इस मॉडल से किसान बेहतर गुणवत्ता का उत्पादन, अधिक पैदावार और बढ़ी हुई आय हासिल कर रहे हैं.
मध्य प्रदेश सरकार ने कृषक कल्याण वर्ष-2026 के तहत बड़ा फैसला लिया है. अब हर विधानसभा में कृषि यंत्र किराये की दुकान खोली जाएगी.वर्तमान में 5,260 केंद्र संचालित हैं और हर साल 1,060 नए केंद्र खुलेंगे, जिससे छोटे किसानों को कम खर्च में आधुनिक कृषि मशीनों का लाभ मिलेगा.
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के प्रगतिशील किसान उपदेश शर्मा ने रेज्ड बेड प्लांटर तकनीक से सोयाबीन की खेती कर बड़ा बदलाव किया है. इस आधुनिक पद्धति से उत्पादन 3 क्विंटल प्रति बीघा से बढ़कर 8 क्विंटल तक पहुंच गया और मात्र 3 बीघा में करीब 1 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ. अब वे 13 बीघा में इसी तकनीक से खेती करेंगे.
मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के किसान नारायण सिंह पटेल ने गन्ने की खेती में पारंपरिक कम दूरी वाली बुवाई की जगह 4.5 फीट की दूरी अपनाकर उत्पादन में बड़ा बदलाव किया है. इस संशोधित स्पेसिंग तकनीक से गन्ने की पैदावार 72% तक बढ़कर 950 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पहुंच गई, जबकि बीज और उत्पादन लागत में 25-30% की कमी आई. उनकी यह तकनीक अब जिले के करीब 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में अपनाई जा रही है.
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर से राज्य स्तरीय बलराम कृषि महोत्सव का शुभारंभ किया. किसान कल्याण वर्ष के तहत 16 विभागों के समन्वय से किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्यव्यापी अभियान शुरू किया गया. इस दौरान डेयरी पर 10 लाख रुपये तक अनुदान, दिन में कृषि बिजली, फूड प्रोसेसिंग और कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार समेत कई बड़ी घोषणाएं की गईं.
यूके से बिजनेस की पढ़ाई करने वाले भोपाल के युवा किसान हर्षित गोधा ने इजरायल की तकनीक अपनाकर 8.5 एकड़ में सफलतापूर्वक एवोकाडो की खेती शुरू की है. उन्होंने 5,000 पौधों की हाईटेक नर्सरी भी तैयार की है और अब देशभर के किसानों को पौधे व डिजिटल प्रशिक्षण उपलब्ध करा रहे हैं.
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के जावर गांव के किसान अश्विन बादल सिंह सावले ने 2 एकड़ से सब्जी की खेती शुरू कर आज 160 किसानों के एफपीओ के साथ 400 एकड़ में उत्पादन का मॉडल तैयार किया है. यहां उगने वाला टमाटर और खीरा दुबई तक निर्यात हो रहा है, जबकि किसानों को प्रति एकड़ 4 से 5 लाख रुपये तक की आय मिल रही है.
मध्यप्रदेश ने हरित ऊर्जा के क्षेत्र में नया इतिहास रचते हुए मुरैना की 440 मेगावॉट सोलर प्लस बैटरी एनर्जी स्टोरेज परियोजना के लिए ₹2.70 प्रति यूनिट की देश की सबसे कम प्रतिस्पर्धी दर पर पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) किया है.
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