चिप्सोना-1 आलू की वैरायटी बेस्ट मानी जाती है यह एक जल्दी पकने वाली आलू की किस्म है आलू को सब्जियों का राजा कहा जाता है बाजारों में आलू की डिमांड वर्ष पर रहती है कम लागत में अधिक मुनाफा आलू की खेती से कमाया जाता है. इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में कई किसान चिप्सोना-1 आलू की खास किस्म की बुवाई करते हैं. इस आलू की खासियत यह है कि ये कम समय में तैयार होने, अच्छे साइज और बेहतर पैदावार के लिए जानी जाती है. किसान रामशरण वर्मा बताते हैं कि इस किस्म में आलू का आकार अच्छा होता है, स्वाद बढ़िया है और बाजार में इसकी अच्छी मांग बनी रहती है. यहां चिप्सोना आलू-1 की सर्वाधिक पैदावार है,
उन्होंने बताया कि बीज -1 चिप्सोना आलू की बुवाई 56 इंच पर की जाती है. वहीं 20 अक्टूबर के महीने तक इसकी बुवाई करना बेहतर होता है. वर्मा ने बताया कि एक एकड़ में 22,000 पौध को लगाया गया है. जबकि एक पौध मैं अनुमानित 700 ग्राम आलू होता है. 30 सालों से आलू की खेती कर रहे रामशरण ने बताया कि चिप्सोना आलू की खास किस्म 100-110 दिन में तैयार हो जाती है. जिससे किसान जल्दी फसल निकालकर बाजार में बेच सकते हैं. आलू की अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी सबसे महत्वपूर्ण है.
रामशरण वर्मा बताते हैं कि वे 56 इंच चौड़ी बेड पर दो लाइन में चिप्सोना आलू की बुवाई करते हैं. यह उनकी नई बुवाई विधि है जिससे प्रति एकड़ लगभग 200-210 क्विंटल आलू की पैदावार होती है. इस साल उन्होंने 80 एकड़ में चिप्सोना आलू की बुवाई की है. वे किसानों से अपील करते हैं कि 3-4 अलग-अलग प्रजातियों की आलू की बुवाई करें. ऐसा करने से न केवल उत्पादन बढ़ता है बल्कि प्राकृतिक आपदाओं से भी नुकसान कम होता है.
बाराबंकी जिले के दौलतपुर गांव निवासी प्रगतिशील किसान पद्मश्री रामशरण ने बताया कि गोबर की सड़ी खाद और जल निकास की सही व्यवस्था ताकि फसल स्वस्थ रहे. क्योंकि हम खेती के दौरान केमिकल युक्त रासायनिक खादों की प्रयोग नहीं करते. चिप्सोना आलू की एक बड़ी खासियत यह है कि नए आलू की बाजार कीमत लगभग 15 रुपए प्रति किलो है, जबकि पुराने आलू की कीमत 10 रुपए प्रति किलो है. जल्दी तैयार होने की वजह से किसान सही समय पर फसल बेच सकते हैं और अच्छी कीमत पा सकते हैं.
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