हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी से सेब किसानों को फायदापंजाब के पटियाला में लगातार हो रही बारिश से पूरे इलाके के किसानों को बहुत जरूरी राहत मिली है, जिससे मिट्टी में नमी और फसलों की हालत बेहतर हुई है. हालांकि, कुछ चिंताएं भी सामने आई हैं, खासकर आलू और टमाटर किसानों के बीच, क्योंकि बारिश के साथ तेज हवाएं भी चलीं, जिससे फसलों को नुकसान होने का डर है.
कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि किसी भी नुकसान का अंदाजा लगाना अभी जल्दबाजी होगी, और बताया कि स्थिति पर करीब से नजर रखी जा रही है.
बागवानी के डिप्टी डायरेक्टर संदीप सिंह ग्रेवाल ने 'दि ट्रिब्यून' से कहा कि जहां बारिश फलों की फसलों के लिए काफी फायदेमंद है, वहीं यह आलू किसानों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है. उन्होंने कहा, "मौसम की पहले से चेतावनी मिलने के कारण, आलू की फसल का एक बड़ा हिस्सा पहले ही काट लिया गया था. मौजूदा बारिश से फसल को नुकसान होने की उम्मीद नहीं है, लेकिन इससे कटाई की प्रक्रिया में देरी होगी."
ग्रेवाल ने आगे कहा कि टमाटर की फसलें अभी पौधे लगाने की स्टेज में हैं और उन पर असर पड़ने की संभावना नहीं है. उन्होंने कहा, "अगर टमाटर सुरंग विधि या ऊंची क्यारियों पर उगाए गए हैं, तो बारिश से कोई नुकसान नहीं होगा."
जहां गेहूं उगाने वाले किसानों ने बारिश का काफी हद तक स्वागत किया है, वहीं विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ज्यादा बारिश फसल को नुकसान पहुंचा सकती है.
पटियाला के मुख्य कृषि अधिकारी जसविंदर सिंह ने कहा कि बारिश का लंबे समय से इंतजार था, क्योंकि दिसंबर और जनवरी में ज्यादातर सूखा रहा था.
उन्होंने कहा, "इस स्टेज पर मौजूदा बारिश फसलों के लिए फायदेमंद है. दिन के तापमान में अचानक बढ़ोतरी गेहूं के लिए अच्छी नहीं थी, और बारिश के साथ तापमान में गिरावट से फसल की ग्रोथ के लिए जरूरी नमी और सही माहौल मिलेगा."
हालांकि, एक और कृषि विशेषज्ञ ने नाम न बताने की शर्त पर बारिश और ओलावृष्टि पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि टमाटर की बुवाई अलग-अलग समय पर होने के कारण टमाटर की फसलों में लेट ब्लाइट हो सकता है.
विशेषज्ञ ने कहा, "जिन इलाकों में ओलावृष्टि हुई है, वहां सब्जियों की फसलों को नुकसान हो सकता है. गेहूं के लिए भी, फसल की निगरानी जरूरी है क्योंकि बारिश के बाद पीली रतुआ की घटनाएं बढ़ जाती हैं."
बीती रात से हिमाचल प्रदेश में मौसम का बदला अंदाज किसानों और बागवानों के लिए संजीवनी लेकर आया है. देर से ही सही लेकिन बागवानी सहित रबी और नकदी फसलों के लिए बारिश और बर्फबारी का यह दौर बेहद असरदार माना जा रहा है. विभाग की मानें तो अभी मौसम इसी तरह मेहरबान बना रहेगा.
इस बार समय पर बारिश न होने से जहां प्रदेश के कुछ हिस्सों में रबी फसलों की बिजाई नहीं हो पाई है, वहीं तीन महीने से चले ड्राई स्पेल से बुवाई की गई फसलों पर विपरीत असर पड़ना शुरू हो गया था. लेकिन मौसम की इस करवट से एक बार फिर किसानों और बागबानों के चेहरों पर रौनक लौट आई है.
कृषि विज्ञान केंद्र मंडी के प्रभारी और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पंकज सूद ने बताया कि प्रदेश के मध्यवर्ती और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अभी बारिश और बर्फबारी का दौर आगामी 24 से 36 घंटों तक चलने वाला है. सूखे की मार से हिमाचल में रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं की 25 से 30 प्रतिशत बिजाई नहीं हो पाई है. इस बारिश से जहां अब फसल उत्पादन में इजाफा होने की उम्मीद बढ़ गई है, वहीं बागवानी क्षेत्र में भी यह बारिश और बर्फबारी अनुकूल साबित होगी.
हिमाचल के ऊपरी क्षेत्रों में मुख्य फसल सेब के लिए बर्फबारी, चिलिंग आवर्स को पूरा करने के लिए अहम होने वाली है. साथ ही भिंडी, फ्रांसबीन, मटर, लहसुन सहित अन्य नकदी फसलों की बुवाई के लिए यह बारिश वरदान साबित होगी.
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