मिर्च के दामों में तेज़ उछालभारत में इस समय मिर्च के दाम तेजी से बढ़ गए हैं. खासकर तेलंगाना के वारंगल और खम्मम की कृषि मंडियों में मिर्च की कीमतें बहुत ज्यादा हो गई हैं. किसानों और व्यापारियों का कहना है कि पिछले तीन सालों में मिर्च के दाम इतने ऊँचे नहीं रहे. मिर्च कम होने और मांग ज्यादा होने की वजह से इसके दाम बढ़ते जा रहे हैं.
पिछले हफ्ते मिर्च की कीमत ₹22,000 प्रति क्विंटल तक पहुंच गई थी, जो बहुत ज्यादा मानी जाती है. अभी मिर्च के दाम थोड़े कम हुए हैं, लेकिन फिर भी यह ₹15,000 से ₹18,500 प्रति क्विंटल के बीच चल रहे हैं. इतने ऊँचे दाम किसानों और खरीदारों दोनों के लिए खास हैं.
मिर्च की खेती कम होने का सबसे बड़ा कारण यह है कि अब पहले की तरह ज्यादा जमीन पर मिर्च नहीं बोई जा रही है. करीब पाँच साल पहले जहाँ 1.25 लाख एकड़ जमीन में मिर्च की खेती होती थी, वहीं अब यह घटकर सिर्फ 30 हजार एकड़ रह गई है. इसके साथ ही मिर्च की फसल पर थ्रिप्स नाम के कीड़े और विल्ट जैसी बीमारी का हमला हुआ, जिससे बहुत सी फसल खराब हो गई.
इस साल मिर्च की नई फसल पर ज्यादा बारिश और नमी का बुरा असर पड़ा. बारिश के कारण मिर्च में नमी आ गई और उसकी गुणवत्ता खराब हो गई. इसी वजह से व्यापारी मिर्च खरीदने में सावधानी बरत रहे हैं और बाजार में खरीद-बिक्री कम रही है. इससे मंडियों में मिर्च की कमी और साफ दिखाई देने लगी.
भारत की मिर्च विदेशों में बहुत पसंद की जाती है. इस साल अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय मिर्च की मांग काफी बढ़ गई है. जब बाहर के देश ज्यादा मिर्च खरीदते हैं, तो देश के अंदर मिर्च कम हो जाती है. यही वजह है कि मिर्च के दाम और ऊपर चले गए हैं.
मिर्च की कमी को देखते हुए व्यापारी अब कोल्ड स्टोरेज यानी ठंडे गोदामों में रखी मिर्च भी बाजार में ला रहे हैं. पहले जो मिर्च बाद के लिए बचाकर रखी गई थी, उसे भी अब बेचा जा रहा है. इससे साफ पता चलता है कि बाजार में मिर्च की कितनी कमी है.
कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में मिर्च के दाम बहुत ज्यादा ऊपर नहीं जाएंगे. जनवरी 2026 में मिर्च की कीमत ₹13,500 से ₹15,500 प्रति क्विंटल के बीच रह सकती है. हालांकि दामों में थोड़ा-बहुत बदलाव होता रहेगा और बाजार धीरे-धीरे ही सामान्य होगा.
हर साल औसतन लगभग 6.50 लाख टन मिर्च का उत्पादन होता है, लेकिन इस साल पैदावार कम रहने की उम्मीद है. किसानों के अनुसार इस बार केवल 4 से 5.39 लाख टन मिर्च ही हो पाएगी. कम पैदावार होने से बाजार में मिर्च की कमी बनी रह सकती है.
हालांकि मिर्च की फसल कम हुई है, लेकिन किसानों के लिए एक अच्छी खबर भी है. किसान नेताओं और सरकार का कहना है कि इस साल मिर्च की मांग काफी अच्छी है. अच्छी मांग के कारण किसानों को उनकी मिर्च का अच्छा दाम मिल सकता है, जिससे उन्हें फायदा होगा.
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