काला गेहूँ की खेती उत्तर प्रदेश का मैनपुरी जिला खेती किसानी के लिए एक उन्नत जिला माना जाता है. मैनपुरी में बासमती चावल की खूब पैदावार होती है.यहां का चावल खाड़ी देशों में खूब निर्यात होता है.वहीं यूरोपीय देशों में भी इसकी मांग है.वही अब जिले के किसान काले गेहूं की खेती की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं. काले गेहूं की खेती सामान्य गेहूं के मुकाबले ज्यादा आय देने वाली है.काले गेहूं की खेती से किसानों को लाभ भी अधिक होगा.इसी वजह से मैनपुरी जिला प्रशासन इस रबी की सीजन में किसानों को काले गेहूं की खेती के लिए जागरूक किया है.कृषि विभाग के कर्मचारी और अधिकारी लगातार किसानों की गोष्ठियों में जाकर उनको समझाया है जिसके चलते कई किसानो ने इस रबी के सीजन में काले गेहूं की खेती करने के लिए आगे आये है.
आजमगढ़ में किसानो के द्वारा काले गेहूँ की खेती से मालामाल हो रहे है वहीं अब मैनपुरी में भी किसानो को कृषि विभाग के द्वारा काले गेहूं की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया गया जिसके चलते इस बार जनपद में खेती का रकबा बढ़ा है. यह सामान्य गेहूं के मुकाबले काले गेहूं की खेती करने से 2 गुना लाभ भी होता है.कृषि विभाग के अनुसार काला गेहूं उगाने पर प्रति हेक्टेयर 35 क्विंटल के करीब उत्पादन होता है.वही है काला गेहूं सामान्य गेहूं से 2 गुना दाम में बिकता है.जबकि सामान्य गेहूं 1 हेक्टेयर में लगभग 40 क्विंटल होता है. हालांकि मैनपुरी में पिछले 3 सालों में काले गेहूं की खेती करने वाले किसानों की संख्या बढ़ी है जिसके कारण काले गेहूं की खेती का रकबा भी 75 हेक्टेयर पहुंच चुका है.जबकि 2020 में केवल 2 हेक्टेयर भूमि पर काले गेहूं की खेती की गई थी.
सामान्य गेहूं के मुकाबले काले गेहूं में एंथोसाइन नामक पोषक पदार्थ की मात्रा अधिक होती है.वहीं कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार काले गेहूं में सफेद गेहूं की तुलना में आयरन की मात्रा 20% अधिक और जिंक की मात्रा 25% अधिक होती है जिसके कारण बाजार में काले गेहूं की मांग दिनोंदिन बढ़ती जा रही है.काला गेहूं की खेती करने वाले किसान पहले के मुकाबले काफी खुशहाल भी हैं.मैनपुरी के जिला कृषि अधिकारी डॉ सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि काला गेहूं उगाने के लिए किसानों को प्रेरित किया गया है.
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