Wheat Farming: गेहूं की दूसरी सिंचाई में गलती पड़ेगी भारी, जानें सही समय और तरीका

Wheat Farming: गेहूं की दूसरी सिंचाई में गलती पड़ेगी भारी, जानें सही समय और तरीका

गेहूं की फसल की दूसरी सिंचाई बहुत ज़रूरी है और इसे समय पर और सही तरीके से किया जाना चाहिए. बुवाई के 40-45 दिन बाद हल्की और संतुलित सिंचाई करने से पौधे मज़बूत होते हैं, बालियां ठीक से बनती हैं और पैदावार बढ़ती है. इसके अलावा, खरपतवार नियंत्रण और संतुलित खाद का इस्तेमाल भी अच्छी फसल के लिए ज़रूरी है.

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Wheat Farming: गेहूं की दूसरी सिंचाई में गलती पड़ेगी भारी, जानें सही समय और तरीकागेहूं की अच्छी पैदावार के लिए सिंचाई पर विशेष ध्यान देना जरूरी

गेहूं रबी मौसम की सबसे ज़रूरी फसलों में से एक है. हमारे घरों में रोज़ जो रोटी बनती है, वह गेहूं से ही बनती है. किसान जब गेहूं की अच्छी खेती करते हैं, तो घर-परिवार और देश दोनों को फायदा होता है. गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए समय पर सिंचाई बहुत जरूरी होती है. अगर पानी कम या ज्यादा हो जाए, तो फसल को नुकसान हो सकता है.

दूसरी सिंचाई का बहुत बड़ा महत्व

गेहूं की खेती में दूसरी सिंचाई बहुत अहम मानी जाती है. इस समय पौधे बड़े होने लगते हैं और उनमें बालियां बनने की तैयारी शुरू हो जाती है. इन्हीं बालियों में बाद में दाने बनते हैं. अगर इस समय पानी सही मात्रा में न मिले, तो दाने कम बनते हैं और फसल कमजोर हो जाती है. इसलिए किसान को इस समय बहुत सावधानी रखनी चाहिए.

बुवाई के कितने दिन बाद करें दूसरी सिंचाई

कृषि विशेषज्ञ शिव शंकर वर्मा बताते हैं कि गेहूं की दूसरी सिंचाई बुवाई के करीब 40 से 45 दिन बाद करनी चाहिए. इस समय को गांठ बनने या टिलरिंग का समय कहा जाता है. इस दौर में पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और नई शाखाएं निकलती हैं. अगर इस समय खेत सूखा रहे, तो पौधों की बढ़त रुक जाती है और उपज कम हो सकती है.

कम पानी और ज्यादा पानी दोनों नुकसानदेह

दूसरी सिंचाई के समय यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि खेत में न तो ज्यादा पानी भरे और न ही बहुत कम पानी दिया जाए. ज्यादा पानी देने से पौधों की जड़ें सड़ सकती हैं और कम पानी देने से पौधे सूख सकते हैं. हल्की और बराबर सिंचाई करना सबसे अच्छा तरीका माना जाता है. इससे पानी पौधों तक सही तरह पहुंचता है.

मौसम की जानकारी रखना जरूरी

सिंचाई से पहले मौसम की जानकारी लेना भी बहुत जरूरी है. अगर बारिश होने वाली हो, तो सिंचाई कुछ दिनों के लिए रोक देना अच्छा होता है. इससे पानी की बचत होती है और खेत में जरूरत से ज्यादा नमी नहीं होती. समझदारी से लिया गया यह फैसला फसल को नुकसान से बचा सकता है.

खरपतवार हटाना क्यों जरूरी है

दूसरी सिंचाई के समय खेत में खरपतवार यानी बेकार घास भी उग आती है. ये खरपतवार पानी और खाद को अपने पास खींच लेते हैं, जिससे गेहूं के पौधों को पूरा पोषण नहीं मिल पाता. इसलिए दूसरी सिंचाई से पहले या बाद में निराई-गुड़ाई करना बहुत फायदेमंद होता है. इससे खेत साफ रहता है और पौधों को हवा और पोषक तत्व अच्छे से मिलते हैं.

खाद का सही इस्तेमाल करें

दूसरी सिंचाई के साथ संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन खाद डालना भी जरूरी होता है. इससे गेहूं के पौधे अच्छे से बढ़ते हैं और बालियां मजबूत बनती हैं. लेकिन खाद तभी डालनी चाहिए जब खेत में नमी हो. सूखी मिट्टी में खाद डालने से पौधों को नुकसान हो सकता है.

सही देखभाल से मिलेगी अच्छी पैदावार

अगर किसान दूसरी सिंचाई सही समय पर और सही तरीके से करते हैं, तो गेहूं की फसल मजबूत और स्वस्थ रहती है. इससे दाने अच्छे बनते हैं और पैदावार बढ़ती है. थोड़ी सी सावधानी और सही जानकारी से किसान अपनी मेहनत का पूरा फल पा सकते हैं.

किसानों के लिए सीख

गेहूं की दूसरी सिंचाई फसल की नींव जैसी होती है. अगर इस समय सही देखभाल की जाए, तो आगे चलकर फसल बहुत अच्छी होती है. इसलिए कम पानी भी न दें और ज्यादा पानी भी नहीं, बल्कि संतुलन बनाकर सिंचाई करें. यही अच्छी और भरपूर गेहूं की पैदावार का सही रास्ता है.

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