सिंदूर की खेती से चमकी किसान की किस्मतउत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से खेती-किसानी की एक बहुत ही अनोखी और दिलचस्प कहानी सामने आई है. यहां के एक किसान ने ऐसी खेती शुरू की है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. यह खेती है प्राकृतिक सिंदूर की. आमतौर पर लोग बाजार से सिंदूर खरीदते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को पता होता है कि सिंदूर पेड़ों से भी तैयार किया जा सकता है. सहारनपुर के बेहट विधानसभा क्षेत्र के खुशहालीपुर गांव के किसान सुधीर कुमार सैनी ने सिंदूर की खेती करके नई मिसाल पेश की है. अब उनकी इस खेती की चर्चा दूर-दूर तक हो रही है और दूसरे किसान भी उनसे प्रेरणा लेने गांव पहुंच रहे हैं.
सुधीर कुमार सैनी ने करीब तीन से चार साल पहले कुछ सिंदूर के पौधे लगाए थे. उस समय उनका मकसद सिर्फ यह देखना था कि क्या सहारनपुर का मौसम इस खेती के लिए सही है या नहीं. धीरे-धीरे पौधे बड़े होने लगे और उन पर फल आने शुरू हो गए. इसके बाद सुधीर कुमार का विश्वास और बढ़ गया. आज उनके खेत में 100 से ज्यादा सिंदूर के पेड़ लगे हुए हैं और आने वाले समय में इनकी संख्या और बढ़ सकती है.
सुधीर कुमार बताते हैं कि दो से तीन साल पुराने पेड़ों पर सिंदूर आना शुरू हो जाता है. कुछ पेड़ों पर अभी फल आने लगे हैं, जबकि कई पेड़ अगले कुछ वर्षों में पूरी तरह तैयार हो जाएंगे. उनका कहना है कि जब पेड़ पांच साल का हो जाता है, तब उससे लगभग एक किलो तक सिंदूर मिल सकता है.
सिंदूर के पेड़ पर एक खास तरह का फल आता है. इस फल के अंदर बीज होते हैं. इन्हीं बीजों को सुखाकर और पीसकर प्राकृतिक सिंदूर तैयार किया जाता है. यह सिंदूर पूरी तरह प्राकृतिक होता है और इसमें किसी तरह का नुकसान पहुंचाने वाला रसायन नहीं होता.
सुधीर कुमार बताते हैं कि आजकल बाजार में मिलने वाला ज्यादातर सिंदूर सिंथेटिक होता है. इसे बनाने में मरकरी और दूसरे केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है, जो त्वचा के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. महिलाएं रोज इसे अपनी मांग में लगाती हैं, लेकिन उन्हें पता नहीं होता कि इससे त्वचा को कितना नुकसान हो सकता है. वहीं प्राकृतिक सिंदूर औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है और यह सुरक्षित भी होता है.
इस खेती की सबसे खास बात यह है कि इसमें ज्यादा खर्च नहीं आता. सिंदूर के पेड़ों में रासायनिक खाद या कीटनाशक डालने की जरूरत नहीं पड़ती. सिर्फ सामान्य सिंचाई करनी होती है. किसान उसी खेत में दूसरी फसलें भी उगा सकते हैं.
सुधीर कुमार कहते हैं कि एक बार पेड़ लगाने के बाद किसान 10 से 20 साल तक उससे लगातार उत्पादन ले सकता है. यानी एक बार मेहनत और फिर कई साल तक कमाई. यही वजह है कि अब किसान इस खेती में दिलचस्पी दिखाने लगे हैं.
आजकल लोगों का झुकाव प्राकृतिक और शुद्ध चीजों की तरफ तेजी से बढ़ रहा है. पूजा-पाठ, धार्मिक कामों और महिलाओं के श्रृंगार में सिंदूर का बहुत महत्व होता है. ऐसे में प्राकृतिक सिंदूर की मांग भी बढ़ रही है.
सुधीर कुमार बताते हैं कि बाजार में प्राकृतिक सिंदूर की कीमत 3000 से 5000 रुपये प्रति किलो तक मिल सकती है. यानी किसान कम लागत में लाखों रुपये तक की कमाई कर सकता है. अब वह अपने सिंदूर को छोटे-छोटे पैकेट में तैयार करके बाजार में बेचने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि लोग शुद्ध और सुरक्षित सिंदूर का इस्तेमाल कर सकें.
सुधीर कुमार की इस अनोखी खेती को देखकर आसपास के किसान भी काफी प्रभावित हैं. रोज कई किसान उनके खेत में पहुंचते हैं और सिंदूर की खेती के बारे में जानकारी लेते हैं. कई किसान उनसे पौधे भी खरीद रहे हैं.
सुधीर कुमार कहते हैं कि किसान कभी भी सीधे बड़ा जोखिम नहीं लेना चाहता. पहले वह दूसरे किसान को देखकर सीखता है, फिर खुद खेती शुरू करता है. अब धीरे-धीरे दूसरे किसान भी इस खेती की तरफ बढ़ रहे हैं.
पिछले कुछ वर्षों में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी प्राकृतिक खेती और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की बात कही है. “वोकल फॉर लोकल” जैसे अभियानों के बाद लोगों में प्राकृतिक चीजों की मांग तेजी से बढ़ी है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सिंदूर जैसी वैल्यू बेस्ड फसलें किसानों की आय बढ़ाने में बहुत मददगार साबित हो सकती हैं.
कम लागत, लंबे समय तक उत्पादन और बाजार में अच्छी कीमत मिलने की वजह से आने वाले समय में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सिंदूर की खेती तेजी से बढ़ सकती है. सहारनपुर के किसान सुधीर कुमार सैनी ने यह साबित कर दिया है कि अगर किसान नई सोच और मेहनत के साथ आगे बढ़े, तो खेती से बड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है.
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