यूपी में MSP पर गेहूं खरीद से किसानों को मिली आर्थिक मजबूती, 9 साल के इस रिपोर्ट से जानें सबकुछ

यूपी में MSP पर गेहूं खरीद से किसानों को मिली आर्थिक मजबूती, 9 साल के इस रिपोर्ट से जानें सबकुछ

Wheat Procurement: एमएसपी खरीद व्यवस्था केवल फसल खरीद तक सीमित नहीं रही, बल्कि किसानों की आर्थिक सुरक्षा का मजबूत माध्यम बन गई है. डिजिटल तकनीक के उपयोग से खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है और भुगतान सीधे बैंक खातों में होने से बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हुई है.

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यूपी में MSP पर गेहूं खरीद से किसानों को मिली आर्थिक मजबूती, 9 साल के इस रिपोर्ट से जानें सबकुछ 9 वर्षों में 51.70 लाख किसानों से 244.26 लाख मीट्रिक टन गेहूं की हुई खरीद (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीद की व्यवस्था ने बीते नौ वर्षों में किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. वहीं, प्रदेश सरकार ने खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी, तकनीक आधारित और किसान हितैषी बनाते हुए किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य समय पर उपलब्ध कराया. खाद्य एवं रसद विभाग से मिले आंकड़े के मुताबिक, रबी विपणन वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक प्रदेश में करीब 51,70,117 किसानों से 244.26 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई, जिसके बदले 45,935.46 करोड़ रुपये सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजे गए.

निर्धारित लक्ष्य से अधिक खरीदा गया गेहूं

खाद्य एवं रसद विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश में निर्धारित लक्ष्य से अधिक गेहूं भी खरीदा गया है. वर्ष 2018-19 में 50 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 52.92 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई, जो लक्ष्य का 105.84 प्रतिशत रही. इस दौरान 11.27 लाख से अधिक किसानों को 9,231.99 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. इसी प्रकार वर्ष 2021-22 में 56.41 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदकर 13.01 लाख से अधिक किसानों को 11,141.19 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. वहीं, समय से भुगतान व्यवस्था के कारण किसानों को अपनी उपज का मूल्य किसी देरी के बिना सीधे बैंक खातों में प्राप्त हुआ जिससे उनकी आर्थिक जरूरतें समय पर पूरी हो सकीं और खेती में दोबारा निवेश करना भी आसान हुआ.

प्रदेशभर में 5,847 क्रय केंद्र स्थापित 

बता दें कि उत्तर प्रदेश में 5,847 क्रय केंद्र स्थापित कर खरीद व्यवस्था को गांव और कस्बों के करीब पहुंचाया. इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ी और बिचौलियों पर निर्भरता भी कम हुई. ऑनलाइन पंजीकरण, डिजिटल सत्यापन और समय से भुगतान जैसी व्यवस्थाओं ने पूरी प्रक्रिया को अधिक सरल और भरोसेमंद बनाया है.

पारदर्शी व्यवस्था से बढ़ा किसानों का भरोसा

उधर, एमएसपी खरीद व्यवस्था केवल फसल खरीद तक सीमित नहीं रही, बल्कि किसानों की आर्थिक सुरक्षा का मजबूत माध्यम बन गई है. डिजिटल तकनीक के उपयोग से खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है और भुगतान सीधे बैंक खातों में होने से बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हुई है. सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का प्रत्येक पात्र किसान एमएसपी का लाभ प्राप्त करे. इसके लिए अधिकारियों को खरीद केंद्रों पर निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने, शिकायतों का त्वरित निस्तारण करने और खरीद प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं.

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