धान की नर्सरी में स्टेम बोरर का हमलाधान की खेती में 'स्टेम बोरर' (तना छेदक कीट) सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाले कीटों में से एक है. अगर नर्सरी के स्टेज से ही इसे नियंत्रित न किया जाए, तो यह पैदावार में भारी कमी ला सकता है. इस कीट को मुख्य खेत में फैलने से रोकने के लिए समय रहते इसकी पहचान करना और सही समय पर उपाय करना जरूरी है. किसानों को सलाह दी जाती है कि वे 'इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट' (IPM) यानी एकीकृत कीट प्रबंधन का तरीका अपनाएं, जिसमें कीटों की निगरानी और जरूरत के हिसाब से कीटनाशकों का इस्तेमाल दोनों शामिल हों.
स्टेम बोरर के लार्वा धान के छोटे पौधों में छेद करके घुस जाते हैं और बीच वाले तने (शूट) को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे पौधे की बढ़वार के समय "डेड हार्ट" (सूखा हुआ बीच का तना) जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. चूंकि इनका हमला अक्सर नर्सरी से ही शुरू होता है, इसलिए इस चरण में सही निगरानी करने से खेत में रोपाई के बाद कीटों के हमले को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
जिन नर्सरियों में स्टेम बोरर के हमले की आशंका हो, वहां वयस्क पतंगों (मॉथ) की गतिविधि पर नजर रखने के लिए 'सिर्पोल्योर' (Scirpolure) फेरोमोन ट्रैप लगाने की सलाह दी जाती है. हर 200 वर्ग मीटर की नर्सरी में कम से कम तीन फेरोमोन ट्रैप लगाए जाने चाहिए. ये ट्रैप नर पतंगों को अपनी ओर खींचते हैं, जिससे किसानों को कीटों की संख्या का पता चलता है और वे तय कर पाते हैं कि नियंत्रण के उपाय करने की जरूरत है या नहीं.
ट्रैप की नियमित जांच करना जरूरी है. जब हर ट्रैप में चार से पांच नर पतंगे फंस जाएं, तो इसका मतलब है कि कीटों की संख्या 'इकोनॉमिक थ्रेशोल्ड' (आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाले स्तर) तक पहुंच गई है और तुरंत नियंत्रण के उपाय शुरू कर देने चाहिए.
जब हर ट्रैप में चार से पांच नर पतंगे फंसने का स्तर आ जाए, तो किसान नीचे बताए गए तरीकों में से कोई भी एक तरीका अपना सकते हैं-
फेरोमोन ट्रैप न केवल स्टेम बोरर की आबादी का जल्दी पता लगाने में मदद करते हैं, बल्कि कीटनाशकों के गैर-जरूरी इस्तेमाल को भी कम करते हैं, क्योंकि इनसे यह सुनिश्चित होता है कि दवा का छिड़काव तभी किया जाए जब आर्थिक रूप से इसकी जरूरत हो. नियमित निगरानी और समय पर जरूरी कदम उठाने से धान के पौधों की सुरक्षा होती है, मुख्य फसल में कीटों के फैलने का खतरा कम होता है और धान का टिकाऊ उत्पादन सुनिश्चित होता है.
इन सुझावों को अपनाकर किसान धान की एक स्वस्थ नर्सरी तैयार कर सकते हैं और रोपाई से पहले तना छेदक कीट (stem borer) से होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं, जिससे अच्छी पैदावार वाली फसल की नींव पड़ती है.
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