सरकार ने दिए 4 लाख, किसान ने खरीदी 9 लाख की मशीन! अब 16 एकड़ में सिर्फ 2-3 लोगों से हो रही धान की रोपाई

सरकार ने दिए 4 लाख, किसान ने खरीदी 9 लाख की मशीन! अब 16 एकड़ में सिर्फ 2-3 लोगों से हो रही धान की रोपाई

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के किसान महादेव मौर्य ने राइस ट्रांसप्लांटर मशीन से 16 एकड़ में धान की रोपाई कर खेती में नई मिसाल पेश की है.सरकार से 4 लाख रुपये की सब्सिडी मिलने के बाद उन्होंने 9 लाख की मशीन खरीदी, जिससे रोपाई की लागत प्रति एकड़ 7-8 हजार रुपये से घटकर 2-2.5 हजार रुपये रह गई.

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सरकार ने दिए 4 लाख, किसान ने खरीदी 9 लाख की मशीन! अब 16 एकड़ में सिर्फ 2-3 लोगों से हो रही धान की रोपाई

खेती में बढ़ती मजदूरों की कमी और लगातार बढ़ रही लागत के बीच छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के तेलीमारेंगा गांव के प्रगतिशील किसान महादेव मौर्य ने आधुनिक तकनीक अपनाकर नई मिसाल पेश की है. इस खरीफ सीजन में उन्होंने राइस ट्रांसप्लांटर (धान रोपाई मशीन) की मदद से 16 एकड़ में धान की रोपाई कर न केवल समय और श्रम की बचत की, बल्कि खेती की लागत भी काफी कम कर दी. सरकार की अनुदान योजना के तहत मिली 4 लाख रुपये की सब्सिडी ने इस आधुनिक कृषि यंत्र को खरीदने में उनकी बड़ी मदद की.

16 एकड़ में मशीन से की धान की रोपाई

महादेव मौर्य के पास 8 एकड़ पैतृक कृषि भूमि है.इस वर्ष उन्होंने अतिरिक्त 8 एकड़ जमीन लीज पर लेकर कुल 16 एकड़ में धान की खेती की है. खरीफ सीजन में मजदूरों की कमी अक्सर किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है, लेकिन राइस ट्रांसप्लांटर मशीन ने इस समस्या का प्रभावी समाधान दिया. जहां पहले धान की रोपाई के लिए दर्जनों मजदूरों की जरूरत पड़ती थी और कई दिनों तक काम चलता था, वहीं अब केवल दो से तीन लोगों की मदद से कम समय में पूरे खेत की रोपाई पूरी हो रही है.

प्रति एकड़ हजारों रुपये की बचत

महादेव मौर्य बताते हैं कि पहले पारंपरिक तरीके से हाथों से धान की रोपाई कराने पर प्रति एकड़ 7 से 8 हजार रुपये तक खर्च आता था. लेकिन राइस ट्रांसप्लांटर के उपयोग से यह लागत घटकर 2 से 2.5 हजार रुपये प्रति एकड़ रह गई है.यानी प्रति एकड़ हजारों रुपये की बचत हो रही है। इससे खेती की कुल लागत में बड़ी कमी आई है और किसानों के लिए धान की खेती अधिक लाभकारी बन रही है.

सरकार की सब्सिडी से आसान हुआ आधुनिक खेती का रास्ता

महादेव मौर्य ने बताया कि राइस ट्रांसप्लांटर मशीन की कीमत लगभग 9 लाख रुपये थी. राज्य सरकार की कृषि यंत्रीकरण अनुदान योजना के तहत उन्हें 4 लाख रुपये की सब्सिडी मिली. इसके बाद उन्हें यह मशीन लगभग 5 लाख रुपये में उपलब्ध हो गई. उनका कहना है कि सरकार की इस सहायता ने आधुनिक तकनीक अपनाने का रास्ता आसान बना दिया.

बेहतर उत्पादन की उम्मीद

राइस ट्रांसप्लांटर से रोपाई करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि धान के पौधों के बीच समान दूरी बनी रहती है. इससे पौधों को पर्याप्त पोषण, हवा और धूप मिलती है, जिससे उनका विकास बेहतर होता है.महादेव मौर्य को उम्मीद है कि इस बार उनकी फसल का उत्पादन पहले की तुलना में अधिक होगा और गुणवत्ता भी बेहतर रहेगी.

दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा

महादेव मौर्य की सफलता अब आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है. उनके खेत में मशीन से हो रही धान की रोपाई देखने के लिए कई किसान पहुंच रहे हैं और आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग की जानकारी ले रहे हैं. कई किसानों ने भविष्य में राइस ट्रांसप्लांटर अपनाने की इच्छा भी जताई है.

आधुनिक खेती की ओर बढ़ रहे किसान

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि श्रमिकों की कमी और बढ़ती लागत के दौर में राइस ट्रांसप्लांटर जैसे आधुनिक कृषि यंत्र किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहे हैं. इससे समय की बचत, लागत में कमी और उत्पादन में बढ़ोतरी की संभावना रहती है. सरकार की अनुदान योजनाएं भी किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं.महादेव मौर्य की कहानी इस बात का उदाहरण है कि तकनीक और सरकारी सहायता का सही उपयोग कर खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है.

 

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