खरीफ बुवाई 2026देश में खरीफ फसलों की बुवाई अब अंतिम दौर में पहुंच रही है, लेकिन इस बार का रकबा पिछले साल की तुलना में पीछे चल रहा है. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 31 जुलाई 2026 तक देश में खरीफ फसलों की बुवाई 894.22 लाख हेक्टेयर में हुई है. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 920.72 लाख हेक्टेयर था. इस तरह कुल क्षेत्रफल में 26.50 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है.
आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक गिरावट धान, दलहन और मोटे अनाज (श्रीअन्न) के रकबे में आई है. धान का कुल क्षेत्र 301.49 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जबकि पिछले साल इसी समय यह 308.39 लाख हेक्टेयर था. यानी धान की बुवाई में 6.89 लाख हेक्टेयर की कमी आई है.
धान के क्षेत्र में सबसे ज्यादा कमी मध्य प्रदेश में 6.25 लाख हेक्टेयर दर्ज की गई है. इसके अलावा महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, ओडिशा, हरियाणा, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में भी धान का रकबा कम रहा. हालांकि असम, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और आंध्र प्रदेश में धान का क्षेत्र बढ़ा है.
दलहन फसलों की बात करें तो 95.18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 101.60 लाख हेक्टेयर थी. यानी 6.41 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है. दलहनों में अरहर का रकबा 3.53 लाख हेक्टेयर घटा है, जबकि मूंग में 3.01 लाख हेक्टेयर की कमी आई है. दूसरी ओर उड़द का क्षेत्र 2.03 लाख हेक्टेयर बढ़ा है.
दलहन की खेती में सबसे अधिक कमी कर्नाटक, महाराष्ट्र और राजस्थान में दर्ज की गई है. इसके विपरीत उत्तर प्रदेश, झारखंड, आंध्र प्रदेश और गुजरात में दलहनों का क्षेत्र बढ़ा है.
मोटे अनाज या श्रीअन्न फसलों का क्षेत्र 157.77 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 170.60 लाख हेक्टेयर की तुलना में 12.83 लाख हेक्टेयर कम है. इस श्रेणी में सबसे बड़ी गिरावट मक्का, बाजरा और रागी में दर्ज की गई. मक्का का रकबा 6.59 लाख हेक्टेयर और बाजरा का 4.20 लाख हेक्टेयर कम हुआ है.
कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र, ओडिशा, हरियाणा और तेलंगाना में मोटे अनाज की बुवाई घटने से कुल क्षेत्रफल पर असर पड़ा है. वहीं मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ और बिहार में कुछ बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
तिलहन फसलों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही है. 31 जुलाई तक तिलहन का कुल रकबा 172.32 लाख हेक्टेयर पहुंच गया, जो पिछले साल के 171.13 लाख हेक्टेयर से 1.19 लाख हेक्टेयर अधिक है. मूंगफली, तिल और सूरजमुखी की बुवाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. हालांकि सोयाबीन के रकबे में 0.84 लाख हेक्टेयर की मामूली कमी आई है.
गन्ने की खेती भी पिछले साल की तुलना में बढ़ी है. गन्ने का क्षेत्र 56.72 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 57.58 लाख हेक्टेयर हो गया है. कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में गन्ने के क्षेत्र में विस्तार दर्ज किया गया है.
जूट और मेस्ता का रकबा भी बढ़कर 6.33 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जबकि पिछले साल यह 6.21 लाख हेक्टेयर था. इस वृद्धि में बिहार का योगदान प्रमुख रहा है.
उधर कपास की बुवाई पिछले साल की तुलना में कमजोर रही है. 31 जुलाई तक कपास का रकबा 103.54 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया, जो पिछले साल के 106.06 लाख हेक्टेयर से 2.52 लाख हेक्टेयर कम है. महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, कर्नाटक और पंजाब में कपास का क्षेत्र घटा है. हालांकि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में कपास की खेती का क्षेत्र बढ़ा है.
कुल मिलाकर खरीफ सीजन में इस बार धान, दलहन, मोटे अनाज और कपास की बुवाई में कमी देखने को मिल रही है, जबकि तिलहन, गन्ना और जूट-मेस्ता फसलों ने कुछ संतुलन बनाया है. अब आने वाले हफ्तों में कृषि विशेषज्ञों की नजर राज्यों से आने वाले अंतिम बुवाई आंकड़ों और फसलों की बढ़वार पर रहेगी.
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