भूस्खलन से बंद सड़क ने छीनी किसानों की कमाईहिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के द्रंग विधानसभा क्षेत्र की चौहारघाटी में सड़क बंद होने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. तीन दिनों तक सड़क बहाल नहीं होने के कारण किसानों को अपनी तैयार फसल बाजार तक पहुंचाने का कोई रास्ता नहीं मिला. मजबूरी में किसानों ने करीब 15 क्विंटल मूली की फसल नाले में फेंक दी, जबकि लगभग 12 क्विंटल बंदगोभी को पैदल सब्जी मंडी तक पहुंचाने की कोशिश की गई, लेकिन समय पर बाजार नहीं पहुंचने के कारण गोभी भी खराब हो गई.
यह मामला पधर उपमंडल के तहत आने वाले दुर्गम क्षेत्र चौहारघाटी का है. यहां थलटूखोड़-मढ़ लिंक रोड बीते सोमवार को हुई भारी बारिश और भूस्खलन के बाद बंद हो गई थी. सड़क बंद होने के कारण इलाके के किसान अपनी सब्जियों और अन्य नगदी फसलों को मंडी तक नहीं पहुंचा पा रहे थे. लगातार तीन दिन तक सड़क बंद रहने से किसानों की चिंता बढ़ती गई.
इसी बीच गुरुवार सुबह एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक किसान जीप से मूली की फसल नाले में फेंकता दिखाई दिया. बताया गया कि फसल को बाजार तक पहुंचाने का कोई रास्ता नहीं बचा था और लंबे समय तक रखने पर मूली खराब हो रही थी, इसलिए किसानों को मजबूरी में अपनी मेहनत की फसल नष्ट करनी पड़ी.
वीडियो वायरल होने के बाद लोक निर्माण विभाग हरकत में आया. विभाग ने तुरंत मौके पर दो जेसीबी मशीनें भेजीं और सड़क को खोलने का काम शुरू किया. करीब पांच घंटे की लगातार मशक्कत के बाद शाम तक सड़क को बहाल कर दिया गया. सड़क खुलने के बाद क्षेत्र के किसानों ने राहत की सांस ली और उन्हें उम्मीद जगी कि अब वे अपनी बची हुई फसल बाजार तक पहुंचा सकेंगे.
किसानों का कहना है कि यदि सड़क समय पर खोल दी जाती तो उन्हें अपनी मूली नाले में फेंकने की नौबत नहीं आती. साथ ही बंदगोभी की फसल भी खराब होने से बच जाती. उनका आरोप है कि सड़क बंद रहने के कारण उन्हें हजारों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा. किसानों ने प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि भविष्य में ऐसी स्थिति आने पर सड़क को जल्द से जल्द बहाल किया जाए, ताकि किसानों की मेहनत बर्बाद न हो.
वहीं, लोक निर्माण विभाग के झटिंगरी उपमंडल के सहायक अभियंता भगत राम यादव ने बताया कि जिस स्थान पर भूस्खलन हुआ था, वहां पहाड़ी से लगातार पत्थर और बड़े-बड़े बोल्डर गिर रहे थे. ऐसे हालात में कर्मचारियों और मशीनों की सुरक्षा को देखते हुए तुरंत सड़क खोलना संभव नहीं था. उन्होंने कहा कि गुरुवार को भी खतरा बना हुआ था, लेकिन जोखिम उठाकर विभाग ने तेजी से काम किया और सड़क को बहाल कर दिया.
इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क संपर्क की अहमियत को उजागर किया है. सड़क बंद होने का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ता है, क्योंकि सब्जियों जैसी जल्दी खराब होने वाली फसल समय पर बाजार नहीं पहुंचने पर पूरी तरह बर्बाद हो जाती है. किसानों का कहना है कि सरकार और संबंधित विभागों को ऐसे संवेदनशील इलाकों में आपातकालीन व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए, ताकि प्राकृतिक आपदाओं के बाद जल्द से जल्द सड़कें बहाल हो सकें और किसानों की मेहनत और आय सुरक्षित रह सके. (धर्मवीर की रिपोर्ट)
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