स्ट्रॉबेरी में नई विल्ट बीमारी का पता चलास्ट्रॉबेरी के किसानों के लिए यह जरूरी खबर है. दरअसल, स्ट्रॉबेरी (Strawberry farming) में एक नई बीमारी का पता चला है जो उत्पादन को बड़े पैमाने पर कम कर सकती है. यह बीमारी विल्ट है जो स्ट्रॉबेरी के लिए घातक है. विल्ट (Strawberry wilt disease) बीमारी पहले भी होती रही है, लेकिन उस बीमारी को फैलाने वाले एक नए एजेंट-फ्यूजेरियम प्रोलिफेरेटम (Fusarium proliferatum) की पहचान की गई है. यह पहली बार है जब भारत में स्ट्रॉबेरी के विल्ट रोग से संबंधित इस नए रोग फैलने वाले एजेंट की पुष्टि की गई है. इस बीमारी को पहचानने में हरियाणा के हिसार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (HAU) के वैज्ञानिकों ने सफलता पाई है. संस्थान के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने बताया कि इस बीमारी को रोकने के लिए सभी तरह के प्रयास और शोध शुरू कर दिए गए हैं.
इस नई विल्ट बीमारी को रोकने के लिए HAU के वैज्ञानिकों ने फफूंदनाशी और बायोएजेंट्स के बारे में जानकारी जुटा ली है. इसकी मदद से स्ट्रॉबेरी में होने वाली इस घातक बीमारी को रोका जा सकेगा. वैज्ञानिकों ने बताया कि फफूंदनाशी और बायोएजेंट्स का प्रयोग जल्द ही उन इलाकों में शुरू किया जाएगा जहां इस बीमारी का प्रकोप देखा जा रहा है. वैज्ञानिक अभी इसे ट्रायल के तौर पर प्रयोग शुरू करेंगे. बाद में सफलता के आधार पर इसका दायरा बढ़ाया जाएगा. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि वे जल्द ही इस बीमारी पर काबू पाने में कामयाब होंगे.
एचएयू के वैज्ञानिकों को निर्देश दिया गया है कि वे इस बीमारी से होने वाले प्रभाव की कड़ी निगरानी करें और उसे रोकने के लिए फौरी कदम उठाए जाएं. सबसे जरूरी उन लक्षणों को पहचानना है जो विल्ट बीमारी के प्रकोप से स्ट्रॉबेरी के पौधों पर देखी जाती है. बागवानी फसलों में स्ट्रॉबेरी का बहुत महत्व है क्योंकि किसानों के लिए यह कमाई का बड़ा जरिया है. यह एक तरह से कैश क्रॉप की श्रेणी में आती है जिसे किसान कम समय में उगाकर अधिक पैसे में बेचते हैं और कमाई करते हैं. स्ट्रॉबेरी के लिए विल्ट घातक बीमारी है जिसका नया एजेंट Fusarium proliferatum किसानों के लिए बड़ी चिंता बनकर उभरा है.
विल्ट के इस नए एजेंट को पहचानने में HAU के वैज्ञानिकों को सबसे पहले सफलता मिली जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता दी गई है. हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक देश में इस बीमारी की खोज करने वाले सबसे पहले वैज्ञानिक हैं. इन वैज्ञानिकों ने स्ट्रॉबेरी के विल्ट रोग पर रिसर्च रिपोर्ट जारी की है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्था ने मान्यता देते हुए अपने जर्नल में प्रकाशन के लिए मंजूर किया है.
विल्ट रोग के मुख्य रिसर्चर डॉ आदेश कुमार ने बताया कि वैज्ञानिक इस बीमारी के प्रकोप को समझने और इसके प्रभाव को कम करने के लिए जरूरी उपाय विकसित करने में जुटे हुए हैं जिससे स्ट्रॉबेरी उत्पादन की सुरक्षा मजबूत की जा सके. एचएयू के वैज्ञानिकों अनिल कुमार सैनी, रूमी रावल, राकेश कुमार, के.सी. राजेश कुमार, सुशील शर्मा, विकास कुमार शर्मा, योगेश कुमार, आर.पी.एस. दलाल, प्रिंस, इंदु अरोड़ा, राकेश गहलोत और पीएचडी छात्र शुभम सैनी ने भी इस रिसर्च में योगदान दिया.
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