महाराष्ट्र में बारिश का अजीब खेल!महाराष्ट्र के कई हिस्सों में जहां लगातार हो रही भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं, वहीं सतारा जिले के पूर्वी इलाकों में बारिश की कमी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. बरसात का मौसम शुरू होने के बाद भी मान, खटाव और म्हसवड जैसे क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है. इसका सीधा असर खेती और ग्रामीण जीवन पर दिखाई दे रहा है. खेतों में खड़ी फसलें सूखने लगी हैं और गांवों में पानी का संकट गहराता जा रहा है.
सतारा के पूर्वी हिस्से में कुछ समय पहले तक हरे-भरे दिखाई देने वाले खेत अब सूखे और पीले नजर आने लगे हैं. बारिश नहीं होने के कारण अनार, सीताफल, बाजरा, मक्का और गन्ने जैसी फसलें खराब होने लगी हैं. किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर खेती की थी, लेकिन अब उनकी मेहनत और पैसा दोनों बर्बाद होने का खतरा बढ़ गया है.
लगातार गर्मी के कारण खेतों की मिट्टी में नमी खत्म हो रही है. कई किसानों के सामने दोबारा बुवाई करने की समस्या खड़ी हो गई है. किसानों का कहना है कि अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो आने वाले दिनों में खेती को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
खेती के साथ-साथ पीने के पानी का संकट भी बढ़ता जा रहा है. सतारा जिले के करीब 100 गांवों और 350 से ज्यादा बस्तियों में पानी पहुंचाने के लिए 100 से अधिक टैंकर लगाए गए हैं. गांवों में कुएं सूख चुके हैं और कई तालाबों में पानी पूरी तरह खत्म हो गया है.
ग्रामीणों का कहना है कि अब टैंकर ही उनके जीवन का सहारा बन गए हैं. लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी पानी के लिए इंतजार करना पड़ रहा है. पशुओं के लिए भी पानी और चारे की कमी होने लगी है.
किसानों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि जून महीने में अच्छी बारिश होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. बारिश नहीं होने के कारण गन्ने समेत कई फसलें सूख रही हैं. किसानों का आरोप है कि छोटे बांधों और पानी की योजनाओं से खेतों तक पानी पहुंचाने के वादे तो किए गए, लेकिन जमीन पर इसका फायदा नहीं मिला.
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द चारा शिविर शुरू किए जाएं, टैंकरों की संख्या बढ़ाई जाए और सूखी फसलों का सर्वे कराकर उन्हें मुआवजा दिया जाए.
किसानों का कहना है कि उन्होंने लाखों रुपये खर्च करके फसल तैयार की थी. लेकिन बारिश नहीं होने के कारण उनकी फसलें आंखों के सामने बर्बाद हो रही हैं. कई किसानों ने आरोप लगाया कि पिछले कई सालों से पानी की योजनाओं के नाम पर सिर्फ घोषणाएं की जा रही हैं, लेकिन खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को अपनी समस्या बताई, लेकिन अभी तक कोई बड़ा समाधान नहीं निकला है.
सतारा जिले का यह इलाका राज्य के ग्राम विकास और पंचायती राज मंत्री जयकुमार गोरे के विधानसभा क्षेत्र में आता है. ऐसे में अब किसानों की नाराजगी सरकार और स्थानीय नेताओं तक पहुंच गई है.
किसानों का आरोप है कि उनके खेत सूख रहे हैं, कुएं खाली हो चुके हैं और पशुओं के लिए भी पानी की समस्या है, लेकिन उनकी परेशानियों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, तो फिर किसानों के खेतों तक पानी क्यों नहीं पहुंच रहा है.
किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन और अनशन करने को मजबूर होंगे. उनकी मांग है कि प्रभावित गांवों में पानी की व्यवस्था बढ़ाई जाए, पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराया जाए और किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा दिया जाए.
फिलहाल सतारा के पूर्वी हिस्से में किसान आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं. बारिश की कमी ने जहां खेती को संकट में डाल दिया है, वहीं ग्रामीणों का जीवन भी पानी की समस्या से प्रभावित हो रहा है. अब सभी की नजर प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर है. (सकलेन मंसूर मुलानी का इनपुट)
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