छत्तीसगढ़ में इस बार मॉनसून की धीमी रफ्तारछत्तीसगढ़ में इस बार मॉनसून की धीमी रफ्तार ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. प्रदेश के कई जिलों की तरह एमसीबी (मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) जिले में भी अब तक सामान्य से कम बारिश हुई है. इसका सीधा असर खरीफ सीजन की खेती पर पड़ रहा है. धान की रोपाई समय पर नहीं हो पाने से किसान चिंतित हैं. जिन किसानों ने खेती के लिए बैंक और सहकारी समितियों से ऋण लिया है, उन्हें आर्थिक नुकसान का डर भी सताने लगा है. किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, जबकि कृषि विभाग का कहना है कि अभी तक जिले में फसलों की जरूरत के अनुसार बारिश नहीं हुई है.
हर साल जून के दूसरे पखवाड़े तक मॉनसून पूरी तरह सक्रिय हो जाता था और किसान धान की रोपाई शुरू कर देते थे. लेकिन इस बार जुलाई का आधा महीना बीतने के बाद भी कई गांवों के खेत खाली पड़े हैं. खेत तैयार हैं, लेकिन उनमें पर्याप्त पानी नहीं है. पानी की कमी के कारण किसान न तो समय पर धान की रोपाई कर पा रहे हैं और न ही खरीफ फसलों की बुवाई पूरी हो सकी है. ऐसे में किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है.
जिले में जिन किसानों के पास बोरवेल, ट्यूबवेल या नदी-नालों से सिंचाई की सुविधा है, वे डीजल पंप और मोटर की मदद से खेतों तक पानी पहुंचाकर किसी तरह रोपाई का काम कर रहे हैं. लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे किसान भी हैं, जिनकी खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर है. उनके खेत अब भी खाली पड़े हैं और वे केवल मॉनसून की अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं.
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि धान की रोपाई में ज्यादा देरी होती है तो फसल की अवधि कम हो जाती है. इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
किसान विजय सिंह का कहना है कि इस बार बारिश पूरे इलाके में एक जैसी नहीं हो रही है. कहीं बारिश हो रही है तो कुछ किलोमीटर दूर बिल्कुल सूखा है. ऐसे हालात में खेतों में पानी नहीं रुक पा रहा है और रोपाई का काम प्रभावित हो रहा है. उन्होंने बताया कि ट्रैक्टर से जुताई, बीज और खाद पर पहले ही काफी पैसा खर्च हो चुका है. अगर जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो नुकसान और बढ़ सकता है.
सिरौली के किसान राम लखन बताते हैं कि हर साल 15 जून के आसपास बारिश शुरू हो जाती थी और धान की रोपाई भी समय पर हो जाती थी. लेकिन इस बार मॉनसून देर से पहुंचा है. कई किसानों ने अभी तक खेतों की तैयारी भी पूरी नहीं की है. उनका कहना है कि अब सब कुछ आने वाली बारिश पर निर्भर है. यदि अच्छी बारिश हुई तो फसल बच जाएगी, नहीं तो किसानों को भारी नुकसान होगा.
नौगई के किसान अताउल्ला खान का कहना है कि इस बार मॉनसून करीब 25 दिन देरी से आया है. उन्होंने खेतों में पानी रोकने के लिए पहले से मेड़बंदी कर रखी थी, इसलिए कुछ हद तक रोपाई शुरू कर पाए. उनका मानना है कि अगर अक्टूबर तक पर्याप्त बारिश होती रही तो फसल बच सकती है, लेकिन यदि बारिश समय से पहले बंद हो गई तो पैदावार पर बड़ा असर पड़ेगा.
एमसीबी जिले के कृषि विभाग के उप संचालक इन्द्रासन सिंह पैकरा ने बताया कि इस साल मॉनसून लगभग 15 से 20 दिन देरी से पहुंचा है. कुछ किसानों ने सूखी बुवाई की है, जबकि जिनके पास सिंचाई की सुविधा है, वे रोपाई की तैयारी कर रहे हैं. जिले के कुछ इलाकों में रोपाई का काम भी शुरू हो चुका है, लेकिन बारिश अभी भी सामान्य से कम है.
उन्होंने किसानों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लेने की अपील की है. इस योजना के तहत किसान केवल 2 प्रतिशत प्रीमियम देकर अपनी खरीफ फसल का बीमा करा सकते हैं. प्राकृतिक आपदा या सूखे की स्थिति में बीमा के जरिए नुकसान की भरपाई की जा सकती है. उन्होंने बताया कि ऋणी किसानों का बीमा स्वतः हो जाता है, जबकि अन्य किसानों को आवेदन करना होता है.
धान छत्तीसगढ़ के किसानों की मुख्य फसल है और एमसीबी जिले के अधिकांश ग्रामीण परिवार इसी पर निर्भर हैं. ऐसे में समय पर बारिश नहीं होने से खेती का पूरा चक्र प्रभावित हो रहा है. यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की रोपाई और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं. फिलहाल किसान और कृषि विभाग दोनों की नजर मॉनसून की अगली बारिश पर टिकी हुई है, क्योंकि यही बारिश इस सीजन की खेती की दिशा तय करेगी. (धीरेन्द्र विश्वकर्मा का इनपुट)
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