मणिपुर में ‘अर्का कल्याण’ ने बदली किसानों की तकदीर, कम लागत में मिला 5 लाख रुपये से ज्यादा का मुनाफा

मणिपुर में ‘अर्का कल्याण’ ने बदली किसानों की तकदीर, कम लागत में मिला 5 लाख रुपये से ज्यादा का मुनाफा

आईसीएआर-आईआईएचआर, बेंगलुरु द्वारा विकसित प्याज की उन्नत किस्म ‘अर्का कल्याण’ मणिपुर के किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है. इस किस्म से किसानों को पारंपरिक प्याज की तुलना में अधिक पैदावार और प्रति हेक्टेयर 5.37 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा मिला है. कम लागत, बेहतर उत्पादन और 5:1 के लाभ-लागत अनुपात ने इसे किसानों के बीच लोकप्रिय बना दिया है.

Advertisement
‘अर्का कल्याण’ ने बदली किसानों की तकदीर, कम लागत में मिला 5 लाख रुपये से ज्यादा का मुनाफाअर्का कल्याण प्याज की किस्म

मणिपुर के किसानों के लिए प्याज की उन्नत किस्म ‘अर्का कल्याण’ कमाई का नया जरिया बनकर उभरी है. कभी प्याज की कमी से जूझने वाले राज्य में अब इस किस्म ने पैदावार बढ़ाने के साथ किसानों की आय भी बढ़ा दी है. आईसीएआर-आईआईएचआर, बेंगलुरु की मदद से किसानों ने इसकी खेती की और उन्हें पारंपरिक किस्मों की तुलना में ज्यादा पैदावार और बेहतर मुनाफा मिला. कम लागत में अधिक उत्पादन और 5:1 के लाभ-लागत अनुपात ने ‘अर्का कल्याण’ को किसानों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया है.

मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में, प्याज हमेशा से घरों की जरूरत रही है, लेकिन किसानों के लिए गर्व की बात शायद ही कभी रही हो. राज्य में इस्तेमाल होने वाला ज्यादातर प्याज दूर-दराज के बाजारों से आता था, जिससे स्थानीय किसान आयात पर निर्भर रहते थे और हाईवे जाम होने पर उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता था. सालों तक, सिंचाई की बेहद कम सुविधा और कम जानकारी की वजह से प्याज की खेती सिर्फ घरों के छोटे-छोटे खेतों तक ही सिमटी रही और कभी बड़े पैमाने पर कमर्शियल खेती का रूप नहीं ले पाई.

प्याज ने बदली किसानों की किस्मत

यह स्थिति तब बदलने लगी जब ICAR-कृषि विज्ञान केंद्र, बिष्णुपुर ने डॉ. पी. विजया देवी की देखरेख में स्थानीय किसानों को ज्यादा पैदावार देने वाली प्याज की किस्म 'अर्का कल्याण' के बारे में बताया और समझाया. 'अर्का कल्याण' और दूसरी किस्मों के बीच तीन साल तक सफल ट्रायल के बाद नतीजे साफ़ थे- इससे बेहतर पैदावार, लंबे समय तक सुरक्षित रहने की क्षमता और ज्यादा मुनाफा मिल रहा था. इसी भरोसे के साथ, 2024 के रबी सीजन में एक 'फ्रंट लाइन डेमोंस्ट्रेशन' (सीधा प्रदर्शन) शुरू किया गया.

ICAR-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हॉर्टिकल्चरल रिसर्च, NEH कंपोनेंट्स, बेंगलुरु की मदद से, उत्लोउ, हेइनौबोक, खोइजुमन, थिनुंगेई और कुम्बी जैसे गांवों के दस चुने हुए किसानों को 'अर्का कल्याण' के बीज बांटे गए. तकनीकी सलाह में हर कदम शामिल था—नवंबर में नर्सरी बेड में बुवाई से लेकर जनवरी में पौधे लगाने, सही दूरी रखने, पोषक तत्वों के प्रबंधन और समय पर सिंचाई करने तक. संतुलित खाद का इस्तेमाल, हल्की लेकिन बार-बार सिंचाई और कटाई से पहले सावधानी से पानी रोकना जैसे वैज्ञानिक तरीकों से प्याज के कंद (बल्ब) का मजबूत विकास और बेहतरीन स्टोरेज क्वालिटी सुनिश्चित हुई.

प्रति हेक्टेयर 5.37 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा

हर किसान ने 1,250 वर्ग मीटर के खेत में प्याज की खेती की और अप्रैल 2025 तक नतीजे बहुत अच्छे रहे. जहां पारंपरिक प्याज की पैदावार लगभग 221 क्विंटल प्रति हेक्टेयर थी, वहीं 'अर्का कल्याण' से 267 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की शानदार पैदावार मिली. जिन किसानों ने खेती में लगभग 1.3 लाख रुपये का निवेश किया था, उन्हें 6.6 लाख रुपये से ज्यादा की कुल कमाई हुई, जिससे उन्हें प्रति हेक्टेयर 5.37 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ—जो पारंपरिक तरीकों से होने वाली कमाई से कहीं ज्यादा था. 5:1 का बेनिफिट-कॉस्ट रेश्यो (लाभ-लागत अनुपात) 'अर्का कल्याण' की सफलता का सबूत था.

'अर्का कल्याण' के हरे-भरे खेतों ने जल्द ही आस-पास के किसानों का ध्यान खींचा. जो शुरुआत सिर्फ़ दस किसानों से हुई थी, वह जल्द ही फैल गई और 2024–25 में NEH प्रोग्राम के तहत 1 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर 'अर्का कल्याण' की खेती होने लगी. किसान फील्ड डे, ट्रेनिंग सेशन और लाइव डेमो ने इसे अपनाने के लिए और बढ़ावा दिया. इस किस्म को 'विकसित कृषि संकल्प अभियान' (VKSA) में भी दिखाया गया, जहां इसे इलाके के लिए बेहतर टेक्नोलॉजी के एक मॉडल के तौर पर पेश किया गया.

अर्का कल्याण ने दी बेहतर आमदनी और बाजार

'अर्का कल्याण' की सफलता सिर्फ ज्यादा पैदावार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों के भरोसे में आए बदलाव को भी दिखाती है. आयात पर निर्भर रहने के बजाय, बिष्णुपुर के किसान अब प्याज के उत्पादन में आत्मनिर्भरता, बेहतर आमदनी और बाजार के उतार-चढ़ाव से कम जोखिम की उम्मीद कर रहे हैं. यह बदलाव यह भी दिखाता है कि कैसे टेक्नोलॉजी, ट्रेनिंग और भरोसा किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए मजबूत बना सकते हैं.

आज, 'अर्का कल्याण' के चमकदार बैंगनी प्याज सिर्फ प्याज नहीं हैं. वे उस किसान समुदाय के लिए बदलाव, मजबूती और उम्मीद का प्रतीक हैं, जिसने बेहतर किस्मों और आधुनिक तरीकों की ताकत को पहचाना है.

POST A COMMENT