बिहार में खरीफ खेती तेज करने के निर्देश, धीमी प्रगति वाले जिलों में चलेगा विशेष अभियान

बिहार में खरीफ खेती तेज करने के निर्देश, धीमी प्रगति वाले जिलों में चलेगा विशेष अभियान

बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने खरीफ मौसम-2026 की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को समय पर खेती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. राज्य में धान रोपनी का 28 प्रतिशत और मक्का बुवाई का 71 प्रतिशत लक्ष्य पूरा हो चुका है. जिन जिलों में खेती की रफ्तार धीमी है, वहां विशेष अभियान चलाया जाएगा. किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक और तकनीकी सलाह उपलब्ध कराने के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में वैकल्पिक फसलों की जानकारी भी दी जाएगी.

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बिहार में खरीफ खेती तेज करने के निर्देश, धीमी प्रगति वाले जिलों में चलेगा विशेष अभियानबिहार में खरीफ फसलों की बुवाई तेज करने के निर्देश

बिहार में खरीफ सीजन की खेती समय पर हो सके, इसको लेकर कृषि विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शारदीय (खरीफ) मौसम-2026 को लेकर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की. जहां उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि समय सीमा के भीतर खरीफ सीजन की फसलों की खेती हो सके. इसके लिए जिला स्तर के कृषि अधिकारी क्षेत्र का लगातार भ्रमण करते रहें और किसानों को खेती में आ रही दिक्कतों की जानकारी हासिल करने के साथ उसका त्वरित निदान भी करें. वहीं, जिन जिलों में खेती की रफ्तार धीमी है, वैसे जिलों में विशेष अभियान चलाया जाए.

बता दें कि खरीफ सीजन में दो मुख्य फसलें, धान और मक्का, की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. राज्य में धान की रोपनी का निर्धारित लक्ष्य इस वर्ष 37 लाख 83 हजार 946 हेक्टेयर रखा गया है, जिसकी तुलना में अभी तक करीब 28 प्रतिशत यानी 10 लाख 54 हजार 426 हेक्टेयर में रोपनी हो चुकी है. जबकि मक्का की खेती का निर्धारित लक्ष्य 2 लाख 70 हजार 158 हेक्टेयर की तुलना में 1 लाख 91 हजार 591 हेक्टेयर यानी 71 प्रतिशत तक पूरी हो चुकी है, जो पिछले साल की तुलना में अच्छी मानी जा रही है.

बिहार के लिए अभी तक मॉनसून की बारिश अनुकूल

कृषि मंत्री ने कहा कि वर्तमान में राज्य में मॉनसून की अनुकूल स्थिति किसानों के लिए बेहतर अवसर लेकर आई है और इसका अधिकतम लाभ उठाते हुए कृषि कार्यों को गति दी जानी चाहिए. राज्य में धान नर्सरी का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है, जबकि धान रोपनी का कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में बाढ़ या जलभराव की आशंका है, वहां किसानों को तुरंत वैकल्पिक फसलों और उपयुक्त फसल प्रणाली अपनाने के संबंध में तकनीकी परामर्श उपलब्ध कराया जाए, ताकि किसान समय रहते खेती कर सकें.

जहां खेती की रफ्तार धीमी, वहां चलेगा विशेष अभियान

मंत्री सिन्हा ने समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि सभी जिलों में कृषि गतिविधियों की नियमित निगरानी की जाए. साथ ही जिला कृषि पदाधिकारी नियमित रूप से क्षेत्रीय भ्रमण कर धान रोपनी और बुआई कार्यों का निरीक्षण करें और किसानों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें. वहीं, जहां धान रोपनी अथवा खरीफ फसलों की बुवाई की प्रगति अपेक्षाकृत धीमी है, उन क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर किसानों को खेती को लेकर जागरूक करें और किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक और अन्य कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित करें. उन्होंने किसानों से भी अपील करते हुए कहा कि अगर खेती में किसी तरह की दिक्कत या परेशानी आ रही है तो आप प्रखंड कृषि पदाधिकारी कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं और कृषि वैज्ञानिकों से जानकारी भी हासिल कर सकते हैं.

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