मक्का बीज उत्पादन से किसानों को प्रति हेक्टेयर 4 लाख रुपये तक शुद्ध कमाई का मौका, इस तारीख तक करें खेती

मक्का बीज उत्पादन से किसानों को प्रति हेक्टेयर 4 लाख रुपये तक शुद्ध कमाई का मौका, इस तारीख तक करें खेती

मक्का की सामान्य खेती की तुलना में मक्का बीज उत्पादन किसानों के लिए अधिक लाभकारी साबित हो रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार अगस्त के पहले पखवाड़े में देर से खरीफ सीजन के दौरान मक्का बीज उत्पादन करने पर किसान प्रति हेक्टेयर लगभग 2500 किलोग्राम बीज उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. औसतन 200 रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत पर बिक्री से 5 लाख रुपये तक की कुल आय और 3.75 से 4 लाख रुपये तक की शुद्ध कमाई संभव है. ICAR-IIMR और अन्य संस्थानों द्वारा विकसित नई हाइब्रिड किस्में किसानों की उत्पादकता बढ़ाने में मदद कर रही हैं, जबकि देश में मक्का की बढ़ती मांग इसे भविष्य की एक लाभदायक नकदी फसल बना रही है.

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मक्का बीज उत्पादन से प्रति हेक्टेयर 4 लाख रुपये तक शुद्ध कमाई का मौका, इस तारीख तक करें खेतीमक्का बीज उत्पादन से बढ़ेगी किसानों की कमाई

मक्के का बीज उत्पादन कर किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं. खरीफ सीजन में मक्का के बीज की खेती किसानों के लिए बेहतर कमाई का जरिया है. वैज्ञानिकों की सलाह है कि किसान मक्के की सामान्य खेती के बदले मक्का बीज के उत्पादन के लिहाज से अगर खेती करें तो अधिक फायदा होगा. देर से खरीफ सीजन में बीज उत्पादन के लिए बुवाई का सबसे अच्छा समय अगस्त का पहला पखवाड़ा (1 से 15 अगस्त) है. बीज उत्पादन के तहत, किसान प्रति हेक्टेयर औसतन 2500 किलोग्राम बीज की पैदावार पा सकते हैं. इसे 200 रुपये प्रति किलोग्राम की औसत कीमत पर बेचा जा सकता है (अभी पीक सीजन में इसकी कीमत 700 से 1000 रुपये प्रति किलोग्राम तक होती है), जिससे प्रति हेक्टेयर लगभग 5.0 लाख रुपये की कुल कमाई हो सकती है.

मक्का बीज की उत्पादन लागत घटाने के बाद, किसान प्रति हेक्टेयर 3.75-4.0 लाख रुपये की शुद्ध कमाई कर सकते हैं, जो कमर्शियल अनाज मक्के की खेती से होने वाली कमाई से लगभग दोगुनी है.

खरीफ मक्का की खेती के फायदे

देर से खरीफ सीजन में बीज उत्पादन सिस्टम से कई फसलें उगाने के मौके भी मिलते हैं. फसल काटने के बाद, किसान रबी सीजन की कोई भी उपयुक्त सब्जी या दालें उगा सकते हैं. किसान देर से खरीफ बीज उत्पादन का विकल्प चुनने से पहले 40-45 दिन की कम अवधि वाली खरीफ सब्जी की फसल उगा सकते हैं.

इसके अलावा, देर से खरीफ बीज उत्पादन की कटाई के बाद, किसान फरवरी के पहले सप्ताह में बुवाई करके ब्रीडर-टू-फाउंडेशन बीज या हाइब्रिड बीज उत्पादन कर सकते हैं. फिर उसी खेत में जुलाई के अंत तक खरीफ सब्जियां उगा सकते हैं, और फिर से देर से खरीफ बीज उत्पादन के लिए जा सकते हैं.

भारत में मक्के की खेती

भारत मक्का का दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा उत्पादक देश है. यहां 120 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर इसकी खेती होती है और 2024-25 में इसका सालाना उत्पादन लगभग 423लाख टन रहा. फिर भी, औसत पैदावार लगभग 3.5 टन प्रति हेक्टेयर है, जो 5.8 टन के वैश्विक औसत से काफी कम है. 2030 तक मांग के दोगुना होने का अनुमान है, खासकर पोल्ट्री, फ़ीड, स्टार्च और इथेनॉल उद्योगों से. इसे देखते हुए जानकारों ने कहा है कि टेक्नोलॉजी पर आधारित इनोवेशन बहुत जरूरी है.

पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU), लुधियाना के रिसर्च डायरेक्टर डॉ. अजमेर सिंह धट्ट बताते हैं, "मक्का में भारत का अगला ग्रोथ इंजन बनने की क्षमता है - न सिर्फ खाने-पीने के लिए, बल्कि पशुपालन और बायोफ्यूल इकॉनमी को आगे बढ़ाने के लिए भी. ग्लोबल प्रोडक्टिविटी स्टैंडर्ड्स का मुकाबला करने के लिए आधुनिक बायोटेक्नोलॉजी को अपनाना बहुत जरूरी है." उन्होंने पॉलिसी बनाने वालों से बायोटेक मक्का के लिए एक अनुकूल इकोसिस्टम बनाने की अपील की.

मक्का बीज उत्पादन में IIMR का रोल

मक्का के बीज उत्पादन और नई उन्नत किस्मों पर ICAR-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेज़ रिसर्च, लुधियाना (ICAR-IIMR) बड़ा काम कर रहा है. पिछले 7-8 सालों में, ICAR-IIMR ने मक्के की 25 हाइब्रिड किस्में विकसित और जारी की हैं, जिन्हें सेंट्रल वैराइटी रिलीज कमेटी (CVRC) ने मंजीरी दी है. साथ ही, 15 और किस्में अभी पाइपलाइन में हैं. इन हाइब्रिड किस्मों ने किसानों और बीज बिक्री करने वाली कंपनियों, डीलरों के बीच काफी भरोसा जीता है. इसका सबूत यह है कि पिछले चार सालों में भारत सरकार के कृषि और सहयोग विभाग (DAC) से मिलने वाले नेशनल ब्रीडर सीड इंडेंट में इनकी हिस्सेदारी 26 से 64 प्रतिशत रही है.

कई राज्यों में बढ़ा मक्का उत्पादन

बीज की ज्यादा लागत की समस्या से निपटने के लिए — जो मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे दक्षिणी राज्यों में उत्पादन केंद्रित होने की वजह से थी — ICAR-IIMR ने पश्चिम बंगाल सरकार के कृषि विभाग और वेस्ट बंगाल स्टेट सीड कॉरपोरेशन (WBSSC) के साथ साझेदारी की. इस पहल के तहत नादिया, जलपाईगुड़ी, कूच बिहार, मुर्शिदाबाद, पश्चिम मेदिनीपुर और उत्तर 24 परगना जैसे प्रमुख जिलों में हाइब्रिड मक्का बीज उत्पादन पर काम किया गया. नतीजतन, रबी 2024–25 के अनुमानों को मिलाकर कुल 32,465 क्विंटल हाइब्रिड बीजों का स्थानीय स्तर पर उत्पादन किया गया है. अन्य राज्यों में भी ऐसा काम हुआ है जिससे राष्ट्रीय स्तर पर मक्का उत्पादन में बड़ी छलांग देखी जा रही है.

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