बेहद धीमी चल रही है गेहूं की बुआईकेंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (DA&FW) ने रबी सीजन 2026-27 के लिए प्रगतिशील फसल बुआई (Progressive Crop Area Sown) की साप्ताहिक रिपोर्ट जारी कर दी है. 30 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, देश भर में रबी फसलों की कुल बुआई 37.56 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दर्ज की गई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक यह आंकड़ा 69.02 लाख हेक्टेयर था.
गेहूं (Wheat)- देश की मुख्य रबी फसल गेहूं की बुआई 30 अक्टूबर तक 0.19 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दर्ज की गई है.
इससे पहले 23 अक्टूबर को जारी रबी बुआई के आंकड़े के अनुसार, 11,000 हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 27,000 हेक्टेयर में बुआई हुई थी. मंत्रालय ने 23 अक्टूबर तक के बुआई के आंकड़े जारी करते हुए कहा, "कुछ राज्यों में गेहूं की बुआई अभी शुरू हुई है."
कुल दलहन (Total Pulses)- दलहन फसलों के तहत कुल बुआई 9.45 लाख हेक्टेयर रही है. इसमें चना (Gram) की बुआई 5.90 लाख हेक्टेयर, मसूर (Lentil) की 1.10 लाख हेक्टेयर, मटर (Peas) की 1.26 लाख हेक्टेयर और उड़द की बुआई 0.29 लाख हेक्टेयर दर्ज की गई है.
श्री अन्न और मोटे अनाज (Shri Anna cum Coarse Cereals): मोटे अनाजों की कुल बुआई 3.78 लाख हेक्टेयर में हुई है. इसमें ज्वार (Jowar) की बुआई 2.71 लाख हेक्टेयर, मक्का (Maize) की 0.78 लाख हेक्टेयर और रागी की 0.27 लाख हेक्टेयर शामिल है.
कुल तिलहन (Total Oilseeds): तिलहन फसलों की कुल बुआई 20.97 लाख हेक्टेयर तक पहुंची है. इसमें रेपसीड और सरसों (Rapeseed & Mustard) का बड़ा हिस्सा शामिल है, जिसकी बुआई 20.50 लाख हेक्टेयर दर्ज की गई है. इसके अलावा मूंगफली की बुआई 0.25 लाख हेक्टेयर रही.
धान (Rice): रबी सीजन के शुरुआती दौर में धान की बुआई 3.16 लाख हेक्टेयर दर्ज की गई है.
कृषि मंत्रालय और फसल मौसम निगरानी समूह (CWWG) द्वारा इन आंकड़ों की नियमित निगरानी की जा रही है ताकि आने वाले हफ्तों में बुआई की रफ्तार और किसानों की जरूरतों का आकलन किया जा सके.
गेहूं एक प्रमुख रबी फसल है, जिसे आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर में बोया जाता है और मार्च-अप्रैल में काटा जाता है. फसल वर्ष 2025-26 (जुलाई-जून) में 336 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुआई की गई थी.
पिछले साल 120.7 मिलियन टन के रिकॉर्ड उत्पादन के बाद, मंत्रालय ने फसल वर्ष 2026-27 के लिए 121 मिलियन टन गेहूं उत्पादन का लक्ष्य रखा है.
मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (जून-सितंबर) में 13 प्रतिशत की कमी रही. मॉनसून कमजोर रहने से रबी सीजन की शुरुआत में मिट्टी में नमी कम रह जाती है और जलाशयों और नहरों में जल स्तर भी कम हो जाता है.
चूंकि गेहूं की बुआई के बाद कई बार सिंचाई की जरूरत होती है, इसलिए कम बारिश के कारण बुआई में देरी हो सकती है, बुआई का कुल रकबा घट सकता है और पैदावार पर भी असर पड़ सकता है.
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