
मोसंबी का बागमहाराष्ट्र के जालना जिले में सूखे का संकट लगातार गहराता जा रहा है. इसका असर अब सिर्फ खरीफ की फसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि सालों की मेहनत से तैयार किए गए फलों के बाग भी बर्बाद हो रहे हैं. जालना जिले के घनसावंगी तहसील के राहेरा इलाके में किसान गणेश वाघमारे को अपनी 12 साल पुरानी मोसंबी की बाग उजाड़नी पड़ी है. सात एकड़ जमीन पर लगे करीब एक हजार मोसंबी के पेड़ पानी की कमी के कारण पूरी तरह सूख गए. आखिरकार, इन पेड़ों को JCB की मदद से उखाड़ना पड़ा.
जिस बाग को किसान ने 12 साल तक मेहनत और खर्च करके संभाला था, उसी बाग को अपनी आंखों के सामने उजड़ते देखना पड़ा. इससे किसान को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है. दरअसल, राहेरा इलाके के गट नंबर 156 में गणेश वाघमारे ने साल 2014 में सात एकड़ जमीन पर मोसंबी के पेड़ लगाए थे. पिछले 12 सालों से वह इस बाग की देखभाल कर रहे थे. पेड़ों के लिए खाद, दवाइयों, मजदूरी और पानी पर हर साल खर्च किया जाता था. उन्हें उम्मीद थी कि इस बाग से होने वाली कमाई उनके परिवार को आर्थिक सहारा देगी. लेकिन इस साल बारिश कम होने के कारण इलाके में पानी का संकट गंभीर हो गया.
कुओं और बोरवेल का जलस्तर नीचे चला गया, जिससे पेड़ों को जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल पाया. पानी की कमी का असर धीरे-धीरे पेड़ों पर दिखाई देने लगा. पहले पेड़ों की पत्तियां सूखने लगीं, फिर डालियां सूख गईं और देखते ही देखते पूरा बाग सूख कर बर्बाद हो गया. किसान गणेश वाघमारे ने बाग को बचाने की कोशिश की, लेकिन पानी का कोई दूसरा इंतजाम नहीं हो पाया. जब पेड़ों के दोबारा बचने की उम्मीद भी खत्म हो गई, तब मजबूरी में करीब एक हजार पेड़ों को JCB से उखाड़ने का फैसला लेना पड़ा.

जिन पेड़ों को बड़ा करने और उनसे फल प्राप्त करने के लिए किसान ने 12 साल तक मेहनत की, उन्हीं पेड़ों को उखाड़ते समय उनकी वर्षों की मेहनत पर पानी फिर गया. सात एकड़ में फैला पूरा बाग नष्ट होने से न सिर्फ उनकी अब तक की लागत बेकार हो गई, बल्कि आने वाले वर्षों में मिलने वाली आमदनी का सहारा भी छिन गया. अब किसान के सामने दोबारा बाग तैयार करने और परिवार की आर्थिक स्थिति संभालने की चुनौती है.
घनसावंगी तहसील में पानी की कमी के कारण दूसरे किसानों के मोसंबी, अनार और अन्य फलों के बाग भी खतरे में हैं. कुओं और बोरवेल में पानी कम होने से किसानों के सामने अपने बागों को बचाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. ऐसे में अगले आठ महीने तक पेड़ों को पानी कैसे उपलब्ध कराया जाए, यह बड़ा सवाल है. अगर समय पर पानी नहीं मिला, तो दूसरे किसानों के बाग भी सूखने का खतरा है.
सूखे की मार झेल रहे किसानों ने प्रशासन से नुकसानग्रस्त फलों के बागों का तत्काल पंचनामा कराने की मांग की है. साथ ही प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने और बागों को बचाने के लिए पानी की व्यवस्था करने की मांग भी की जा रही है. किसानों का कहना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो पानी की कमी के कारण और भी कई बाग बर्बाद हो सकते हैं, जिससे किसानों का आर्थिक संकट और गहरा जाएगा.
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