तंदूर अरहर की पहली खेप का निर्यातभारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत कार्यरत एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (APEDA) ने तेलंगाना के प्रसिद्ध GI-टैग वाले तंदूर रेडग्राम (अरहर) की पहली निर्यात खेप ऑस्ट्रेलिया भेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. 28 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद से इस ऐतिहासिक खेप को हाइब्रिड मोड में रवाना किया गया.
तेलंगाना सरकार के कृषि उत्पादन आयुक्त एवं कृषि एवं सहकारिता विभाग के सचिव सुरेंद्र मोहन (IAS) और APEDA हैदराबाद के AGM आर. पी. नायडू ने वर्चुअल माध्यम से इस पहली खेप को हरी झंडी दिखाई.
इस खेप में 2.5 मीट्रिक टन GI-टैग वाला तंदूर रेडग्राम शामिल है. इसका निर्यात हैदराबाद स्थित दुर्गा एक्सपोर्ट्स एंड इम्पोर्ट्स द्वारा अपने ‘AMMAAS’ ब्रांड के तहत किया गया है. समुद्री मार्ग से भेजी गई यह खेप ऑस्ट्रेलिया की भरथमा PTY लिमिटेड द्वारा आयात की जाएगी.
निर्यातक APEDA के साथ रजिस्टर्ड है और तेलंगाना से चावल, दालें, मसाले और अन्य किराना उत्पादों का निर्यात करता है. यह निर्यात अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेलंगाना के विशिष्ट कृषि उत्पादों को पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.
कार्यक्रम में विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) हैदराबाद के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. संपथ कुमार (ITS), दुर्गा एक्सपोर्ट्स एंड इम्पोर्ट्स के प्रतिनिधि और निर्यातक सुमंत आर. और APEDA के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे.
तंदूर रेडग्राम तेलंगाना का पहला कृषि उत्पाद है जिसे भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिला हुआ है. इसकी खेती मुख्य रूप से तंदूर, बशीरबाद, पेद्देमुल और येलाल मंडलों के वर्षा आधारित क्षेत्रों में की जाती है.
इसकी विशेष क्वालिटी का कारण यहां की गहरी काली मिट्टी, अट्टापुलगाइट क्ले मिनरल की मौजूदगी और चूना पत्थर के समृद्ध भंडार हैं. तंदूर रेडग्राम में लगभग 22 से 24 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है, जो कई अनाजों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है. बेहतर स्वाद, उत्कृष्ट पकाने की क्वालिटी और लंबे समय तक सुरक्षित रहने की क्षमता इसे खास बनाती है.
APEDA देश के GI-टैग वाले कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है. संस्था निर्यातकों को वैश्विक खरीदारों से जोड़ने, व्यापार मेलों में भागीदारी को बढ़ावा देने और नए निर्यात बाजारों तक पहुंच दिलाने में मदद करती है.
यह पहल न केवल तंदूर रेडग्राम बल्कि तेलंगाना के अन्य विशिष्ट कृषि उत्पादों के लिए भी नए विदेशी बाजारों के रास्ते खोल सकती है. इससे किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), किसान उत्पादक कंपनियों (FPC) और निर्यातकों को लंबे समय तक लाभ मिलने की उम्मीद है.
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