खेत में बिछी गेहूं की फसलपंजाब के किसानों के लिए इस साल का रबी सीजन संकट में है. पंजाब के सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने 5 अप्रैल 2026 को केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर राज्य में गेहूं की फसल को हुए भारी नुकसान का हवाला दिया है. पत्र में उन्होंने बेमौसमी बारिश, तेज हवाओं और लगातार ओलावृष्टि से हुए फसल नुकसान भी भी जानकारी साझा की और तुरंत केंद्रीय राहत और मूल्यांकन की अपील की है.
इस संकट से प्रभावित जिलों में बठिंडा, मानसा, फाजिल्का, श्री मुक्तसर साहिब, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब, संगरूर, लुधियाना, बर्नाला, अमृतसर, तरनतारन, होशियारपुर और गुरदासपुर शामिल हैं. मौसम विभाग ने 6 और 7 अप्रैल 2026 के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिससे साफ है कि नुकसान अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.
पंजाब में गेहूं लगभग 34 लाख हेक्टेयर में बोया गया है. इस समय फसल कटाई के लिए पूरी तरह तैयार थी और सरकारी खरीद भी 1 अप्रैल से शुरू हो चुकी थी. लेकिन अचानक आए मौसम की मार ने किसानों को परेशान कर दिया. खासकर मालवा क्षेत्र में कई गांवों में खेतों में खड़ी फसल पूरी तरह गिर गई. खेतों से रिपोर्ट मिल रही हैं कि कुछ जगहों पर 30 से 70 प्रतिशत तक फसल नष्ट हो गई है.
लगातार बारिश और गीली मिट्टी की वजह से किसानों को समय पर कटाई करने में दिक्कत हो रही है. फसल में बढ़ी नमी से काले दाने जैसी फंगस की समस्या बढ़ रही है और कुछ किस्मों में पहले ही अंकुरण (pre-harvest sprouting) का खतरा भी है, जिससे अनाज की गुणवत्ता और बाजार मूल्य पर असर पड़ सकता है.
जो गेहूं पहले ही काटा गया और खुले में मंडियों में रखा गया, वह बारिश में भीग गया है. इससे अनाज का नमी स्तर 12-14 प्रतिशत से ज्यादा हो गया है, जो कि फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) के मानक अनुसार स्वीकार्य नहीं है. अगर इसे खरीद केंद्रों पर ठुकरा दिया गया तो किसानों को दोहरी मार लगेगी.
ये वही स्थिति है जिसको देखते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) बनाई गई थी. इस योजना के तहत किसानों को ओलावृष्टि और बेमौसमी बारिश जैसी स्थानीय आपदाओं में नुकसान का भुगतान किया जाता है. लेकिन पंजाब ने 2016-17 से अब तक PMFBY में कभी भाग नहीं लिया. 2022-23 में शामिल होने का बजट प्रस्ताव वापस ले लिया गया. इसका मतलब है कि इस बार पंजाब के किसान बीमा कवरेज से बाहर हैं और उनके पास नुकसान की भरपाई का कोई विकल्प नहीं है.
किसानों की स्थिति को देखते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री को पंजाब के नुकसान का आकलन करने, तत्काल राहत देने और फसल खरीद मानक (FCI moisture norms) में ढील देने की अपील की गई है. किसानों की मांग है कि FCI अनाज की नमी मानक में लचीलापन दें, ताकि जो गेहूं बारिश में भीगा है उसे ठुकराया न जाए.
साथ ही सरकार से अनुरोध किया गया है कि Punjab को PMFBY में शामिल करने का प्रस्ताव समयबद्ध तरीके से पेश किया जाए. इससे भविष्य में ऐसे नुकसान के समय किसान सीधे बीमा का लाभ ले सकेंगे और प्रशासनिक प्रक्रिया में लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा.
पंजाब के किसान भारत की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ हैं. अगर इस समय उन्हें तत्काल राहत और खरीद में सहयोग नहीं मिला, तो यह सिर्फ आर्थिक नुकसान ही नहीं बल्कि पूरे देश की गेहूं आपूर्ति पर असर डाल सकता है. किसान लगातार बारिश और ओलावृष्टि के बीच फंसे हैं-कटाई नहीं कर सकते, बिक्री नहीं कर सकते और बीमा का लाभ भी नहीं उठा सकते.
किसानों की मदद के लिए सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी होगी-फसल नुकसान का आकलन करना, राज्य और राष्ट्रीय राहत कोष से सहायता देना और FCI के मानक में अस्थायी ढील देना. यह कदम पंजाब के किसानों की वर्तमान मुश्किलों को कम कर सकता है और उन्हें आर्थिक संकट से बचा सकता है.
ये भी पढ़ें:
IVRI Ranking: IVRI को मिली ये बड़ी कामयाबी, इसलिए बनी देश की पहली Vet यूनिवर्सिटी
Dholpur में बारिश-ओलावृष्टि का कहर, गेहूं समेत रबी फसलों को 50% तक नुकसान
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today