धान की रोपाई के बाद बढ़ी मुश्किलेंपंजाब में इस समय धान की रोपाई का सीजन चल रहा है और कई जगहों पर किसानों ने बड़ी मेहनत से अपनी फसल लगा दी है. संगरूर जिले में भी बड़े क्षेत्र में धान की रोपाई पूरी हो चुकी है. सरकार ने पहले ही धान की रोपाई के लिए अलग-अलग तारीखें तय की थीं और किसानों ने उसी के अनुसार खेती की शुरुआत की थी. लेकिन अब रोपाई के बाद किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या बिजली की कमी बन गई है.
किसानों का कहना है कि सरकार ने धान के सीजन में रोजाना 8 घंटे बिना रुकावट बिजली देने का वादा किया था. लेकिन पिछले कई दिनों से उन्हें मुश्किल से 4 घंटे ही बिजली मिल रही है. इसमें भी बार-बार कट लगने से खेतों तक पानी ठीक से नहीं पहुंच पा रहा है. इससे खेतों की सिंचाई प्रभावित हो रही है और फसल को नुकसान होने लगा है.
बिजली की कमी के कारण खेतों में पानी की कमी हो गई है. कई जगहों पर धान के पौधे सूखने लगे हैं और जमीन में दरारें भी दिखाई दे रही हैं. किसान डरे हुए हैं कि अगर यही स्थिति रही तो उनकी पूरी फसल खराब हो सकती है. कुछ किसानों का कहना है कि उन्हें फिर से धान की रोपाई करनी पड़ सकती है, जिससे उनका खर्च बहुत बढ़ जाएगा.
बिजली न मिलने के कारण कई किसान मजबूरी में डीजल जनरेटर और ट्रैक्टर की मदद से सिंचाई कर रहे हैं. लेकिन यह तरीका बहुत महंगा साबित हो रहा है. किसान बताते हैं कि डीजल की कीमत लगभग 97 रुपये प्रति लीटर है और एक ट्रैक्टर एक घंटे में लगभग 7 लीटर डीजल खर्च कर देता है. ऐसे में खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और किसानों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है.
किसानों ने राज्य सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि किसानों को दिन के समय लगातार बिजली मिलेगी और रात में खेतों में काम करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. लेकिन अब हालात बिल्कुल अलग हैं और किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
संगरूर समेत कई गांवों में यही समस्या देखने को मिल रही है. खेतों में सूखती फसल और बढ़ती चिंता किसानों की मुश्किलें बढ़ा रही हैं. किसान सरकार से मांग कर रहे हैं कि उन्हें जल्द से जल्द 8 घंटे नियमित बिजली दी जाए, ताकि उनकी फसल बच सके और उनकी मेहनत बर्बाद न हो. (कुलवीर सिंह का इनपुट)
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