पानी की कमी ने उजाड़ा किसान का सपना, 5 साल की मोसंबी बाग पर खुद चलानी पड़ी कुल्हाड़ी

पानी की कमी ने उजाड़ा किसान का सपना, 5 साल की मोसंबी बाग पर खुद चलानी पड़ी कुल्हाड़ी

महाराष्ट्र के जालना में पानी की भारी कमी के कारण किसान गणेश भीमराव गीते को अपनी पांच साल की मेहनत से तैयार 180 मोसंबी के पेड़ों की बाग काटनी पड़ी. सिंचाई के अभाव, बढ़ती लागत और उचित दाम न मिलने से किसान आर्थिक संकट में है और सरकार से मदद की मांग कर रहा है.

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पानी की कमी ने उजाड़ा किसान का सपना, 5 साल की मोसंबी बाग पर खुद चलानी पड़ी कुल्हाड़ीपानी की कमी ने तोड़ दिया किसान का सपना

महाराष्ट्र के जालना जिले के बदनापूर तहसील के अकोला गांव से एक किसान की बेबसी की दर्दनाक कहानी सामने आई है. यहां किसान गणेश भीमराव गीते को पानी की भारी कमी के कारण अपनी ही मोसंबी की पूरी बाग काटनी पड़ी. जिस बाग को तैयार करने में उन्होंने पांच साल की मेहनत और लाखों रुपये लगाए थे, वही बाग अब उनकी आंखों के सामने उजड़ गई. इस घटना ने एक बार फिर किसानों के सामने खड़े पानी के संकट और बढ़ती खेती की मुश्किलों को उजागर कर दिया है.

पांच साल तक परिवार की तरह संभाले थे 180 पेड़

किसान गणेश गीते ने बताया कि उन्होंने करीब पांच साल पहले अपने खेत में 180 मोसंबी के पौधे लगाए थे. उन्होंने इन पौधों की देखभाल अपने परिवार के सदस्यों की तरह की. समय पर खाद, दवा और सिंचाई की व्यवस्था करने के लिए उन्होंने लाखों रुपये खर्च किए. उन्हें उम्मीद थी कि कुछ ही समय में बाग से अच्छी पैदावार मिलेगी और उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी. लेकिन प्रकृति ने उनका साथ नहीं दिया.

बारिश नहीं होने से सूखने लगी पूरी बाग

इस साल जून का महीना समाप्त होने वाला है, लेकिन क्षेत्र में अब तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई है. बारिश की कमी के कारण खेतों में पानी नहीं पहुंच पाया और सिंचाई के लिए भी पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं था. धीरे-धीरे मोसंबी के पेड़ सूखने लगे. किसान ने पेड़ों को बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन जब कोई रास्ता नहीं बचा तो उन्होंने भारी मन से पूरी बाग काटने का फैसला लिया.

बढ़ती लागत और कम दाम ने बढ़ाई मुश्किलें

किसान गणेश गीते का कहना है कि खेती करना लगातार महंगा होता जा रहा है. खाद, बीज, दवाइयों और मजदूरी का खर्च हर साल बढ़ रहा है. दूसरी ओर किसानों को अपनी फसल का उचित मूल्य भी नहीं मिल रहा. ऐसे में पानी की कमी ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी. उनका कहना है कि यदि समय पर बारिश होती या सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलता, तो उनकी बाग बच सकती थी.

आंखों के सामने बर्बाद हुई वर्षों की मेहनत

जिस बाग को तैयार करने में किसान ने पांच साल लगाए थे, उसे अपनी ही आंखों के सामने काटना उनके लिए बेहद दर्दनाक था. 180 मोसंबी के पेड़ों को नष्ट होते देखकर पूरा परिवार भावुक हो गया. किसान ने कहा कि उन्होंने पूरी मेहनत और ईमानदारी से बाग तैयार की थी, लेकिन पानी की कमी ने उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. अब उनके सामने परिवार का खर्च चलाने और भविष्य की चिंता खड़ी हो गई है.

सरकार से लगाई मदद की गुहार

मोसंबी की पूरी बाग नष्ट होने से किसान को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है. किसान गणेश गीते ने सरकार से आर्थिक सहायता देने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि समय पर मदद नहीं मिली, तो उनके लिए दोबारा खेती शुरू करना बहुत मुश्किल हो जाएगा. यह घटना केवल एक किसान की नहीं, बल्कि उन हजारों किसानों की कहानी है जो हर साल पानी की कमी, मौसम की मार और बढ़ती लागत के कारण आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं. (गौरव विजय साली का इनपुट)

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