कम पानी में भी धान की कुछ किस्में अधिक पैदावार देती हैंअल नीनो को लेकर किसान चिंता में हैं. खासकर धान की खेती करने वाले किसान क्योंकि उन्हें सिंचाई के पानी की समस्या दिखाई दे रही है. धान चूंकि बहुत अधिक पानी सोखने वाली फसल है, इसलिए बोरवेल या पंप सेट की सिंचाई से काम नहीं चलेगा. डीजल भी बहुत महंगा है जिसकी लागत कमाई से भी अधिक चली जाएगी. ऐसे में जो किसान धान की खेती करना चाहते हैं, उन्हें ऐसी किस्में अपनानी होगी जो बहुत कम पानी में और कम समय में तैयार हो जाए. तो आइए ऐसी किस्मों के बारे में जानते हैं जिन्हें पानी की कम जरूरत होती है.
PR 126: यह किस्म सिर्फ 90 से 93 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. कम पानी और कम खाद में भी इसकी पैदावार काफी अच्छी होती है.
पूसा बासमती 1509: यह कम पानी में उगने वाली सबसे लोकप्रिय बासमती किस्म है. यह सामान्य किस्मों की तुलना में लगभग 33% कम पानी लेती है और जल्दी पक जाती है.
पूसा बासमती 1847: यह कम पानी में अच्छा उत्पादन देने के साथ-साथ झुलसा और झोंका (ब्लाइट) रोगों के प्रति सहनशील है.
सहभागी (Sahbhagi): सूखे और कम बारिश वाले क्षेत्रों के लिए यह बहुत ही उपयुक्त किस्म है.
प्रभात और तुरंता: ये किस्में 80 से 110 दिनों में तैयार हो जाती हैं और ऊपरी (अप-लैंड) जमीन के लिए बहुत अच्छी हैं.
पानी की कमी झेल रहे धान किसानों के लिए डीआरआर धान 100 (कमला) एक बेहतर विकल्प है. यह नई किस्म ICAR ने तैयार की है, ताकि कम पानी में भी अच्छी पैदावार मिल सके और फसल जल्दी तैयार हो जाए.
ज्यादा पैदावार: यह किस्म सामान्य धान के मुकाबले करीब 19% ज्यादा उत्पादन देती है, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ सकती है.
जल्दी पकने वाली फसल: यह धान लगभग 130 दिनों में तैयार हो जाती है, यानी पुरानी किस्मों से 15–20 दिन पहले.
कम पानी में भी अच्छी पैदावार: इस किस्म को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती और यह सूखे को भी कुछ हद तक सहन कर सकती है.
अच्छी क्वालिटी का चावल: इसका चावल सांबा मसूरी जैसा स्वाद और क्वालिटी देता है, जो बाजार में काफी पसंद किया जाता है.
मजबूत तना: इसके पौधे गिरते नहीं हैं, इसलिए खराब मौसम में भी फसल का नुकसान कम होता है.
पर्यावरण के लिए फायदेमंद: इससे मीथेन गैस कम निकलती है (करीब 20%) और पानी की भी बड़ी बचत होती है.
नई तकनीक से तैयार: इसे CRISPR तकनीक से बनाया गया है, जिसमें बाहरी DNA नहीं डाला गया है, इसलिए यह सुरक्षित मानी जाती है.
अल नीनो और गर्मी की चिंता के बीच धान को लेकर अच्छी खबर है. किसानों ने इस खरीफ सीजन में पिछले साल की तुलना में धान की रोपाई अधिक की है. देश के कुछ इलाकों में मॉनसून के जल्दी आने की वजह से धान की खेती का रकबा पिछले साल के 3.88 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 4.98 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो 1.09 लाख हेक्टेयर या लगभग 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी है.
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जून के पहले 12 दिनों में खरीफ़ की बुवाई पिछले साल के मुकाबले 3.9 प्रतिशत कम रही. 12 जून तक किसानों ने 84.6 लाख हेक्टेयर में बुवाई की, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 88.04 लाख हेक्टेयर था.
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