बासमती पछेती किस्मेंधान की खेती में बासमती किस्मों का अपना अलग महत्व है. खासकर पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में किसान ऐसी किस्मों को ज्यादा पसंद करते हैं, जिनमें बेहतर पैदावार के साथ-साथ चावल की क्वालिटी भी अच्छी हो. हालांकि, कई किसान अभी तक किसी कारणवश धान की रोपाई नहीं कर पाए हैं और अब ऐसी किस्मों की तलाश कर रहे हैं, जो देर से लगाने के बाद भी कम समय में तैयार हो जाएं और अच्छा उत्पादन दें. बता दें कि धान की खेती में पानी की अधिक जरूरत होती है, ऐसे में पंजाब और हरियाणा के किसान बासमती धान की ये 5 पछेती किस्मों की खेती कर सकते हैं. आइए जानते हैं पंजाब और हरियाणा में बोई जाने वाली इन उन्नत बासमती पछेती धान किस्मों के बारे में.
1. पूसा बासमती 1121: ये बासमती धान की सबसे लोकप्रिय और अधिक मांग वाली किस्मों में शामिल है. इसके लंबे, पतले और आकर्षक दाने इसकी सबसे बड़ी पहचान हैं. पकाने के बाद इसके चावल की लंबाई बढ़ जाती है और दाने अलग-अलग बने रहते हैं. इस किस्म की पकने की अवधि लगभग 135 से 145 दिन होती है. बेहतर खुशबू, स्वाद और उच्च गुणवत्ता के कारण घरेलू बाजार के साथ-साथ विदेशों में भी इसकी काफी मांग रहती है. यही वजह है कि यह किसानों के बीच एक पसंदीदा बासमती किस्म बनी हुई है. इस किस्म से पैदावार औसतन 18 से 20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है.
2. पूसा बासमती 1718: ये बासमती की एक खास किस्म है. यह किस्म रोगों के प्रति अधिक सहनशील होती है, जिससे किसानों को फसल प्रबंधन में आसानी होती है. इसकी पकने की अवधि करीब 135 से 140 दिन होती है. इसमें झुलसा रोग का खतरा कम रहता है और उत्पादन क्षमता भी अच्छी होती है. कम जोखिम वाली खेती के लिए यह किस्म किसानों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकती है. वहीं, इस किस्म से औसतन पैदावार 20 से 28 क्विंटल प्रति एकड़ तक होती है.
3. पंजाब बासमती 7: पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) द्वारा विकसित पंजाब बासमती 7 भी बासमती धान की एक बेहतरीन किस्म है. इसके दाने लंबे, चमकदार और सुगंधित होते हैं. यह किस्म लगभग 101 दिनों में तैयार हो जाती है. पकने के बाद इसका चावल अच्छी तरह खिलता है और खाने में स्वादिष्ट लगता है. इसके अलावा यह कई बीमारियों से लड़ने की क्षमता रखती है, जिससे किसानों को बेहतर उत्पादन मिल सकता है. इस किस्म की औसत पैदावार लगभग 19 क्विंटल प्रति एकड़ तक है.
4. बासमती 386: बासमती 386 उत्तर भारत की पुरानी और पारंपरिक बासमती किस्मों में शामिल है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी बेहतरीन सुगंध और स्वाद है. हालांकि इसकी पैदावार कुछ आधुनिक किस्मों की तुलना में कम हो सकती है, लेकिन इसकी क्वालिटी और पारंपरिक बासमती पहचान इसे खास बनाती है. इसकी फसल तैयार होने में लगभग 150 से 155 दिन का समय लगता है. बासमती 386 से धान की औसत उपज 12 से 15 क्विंटल प्रति एकड़ तक है.
5. पूसा बासमती 1401: पूसा बासमती 1401 पछेती अवधि में पकने वाली एक उन्नत किस्म है. इसके पौधे अर्द्ध-बौने होते हैं, जिससे तेज हवा या बारिश के दौरान फसल गिरने की संभावना कम रहती है. यह किस्म लगभग 135 से 140 दिनों में तैयार हो जाती है. इसकी औसत पैदावार 25 से 28 क्विंटल प्रति एकड़ होती है और चावल की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है. कम जोखिम और अच्छी पैदावार के कारण यह किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प मानी जाती है.
बासमती धान की किस्म का चुनाव करते समय किसान अपने क्षेत्र की मिट्टी, मौसम, सिंचाई सुविधा और बाजार की मांग को ध्यान में रखें. पछेती किस्मों में फसल अवधि ज्यादा होती है, इसलिए समय पर बुवाई और उचित प्रबंधन जरूरी होता है. बढ़ती मांग और निर्यात बाजार को देखते हुए बासमती धान किसानों के लिए अच्छी आमदनी का जरिया बन सकता है. सही किस्म का चुनाव और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर किसान बेहतर उत्पादन के साथ अच्छी कमाई भी कर सकते हैं.
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