पाकिस्तान को झटका, भारत को फायदाभारत के बासमती चावल निर्यात को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. आने वाले समय में अफगानिस्तान भारत से सीधे बासमती चावल खरीदने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है. इसके लिए भारतीय और अफगान व्यापारी अगले महीने एक बैठक करने वाले हैं, जिसमें व्यापार को आसान और बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा होगी. यह पहल PHD Chamber of Commerce and Industry की मदद से शुरू हुई है.
अफगानिस्तान अभी तक अपने बासमती चावल की जरूरत का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान से पूरा करता रहा है. लेकिन हाल के समय में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के कारण अब अफगानिस्तान दूसरे विकल्प तलाश रहा है. देश में हर साल करीब 5 लाख टन बासमती चावल की खपत होती है, इसलिए यह बाजार काफी बड़ा माना जाता है. अब अफगानिस्तान भारत से सीधे खरीद बढ़ाने की कोशिश कर रहा है ताकि उसे सस्ता और भरोसेमंद सप्लाई मिल सके.
जानकारी के अनुसार, अफगानिस्तान के दूतावास के प्रतिनिधि भी दिल्ली में हुई शुरुआती बैठकों में शामिल हुए थे. उन्होंने भारतीय बासमती चावल की खरीद बढ़ाने में रुचि दिखाई है. अभी तक अफगानिस्तान भारत का बासमती चावल अक्सर दुबई और ईरान के रास्ते मंगाता है, जिससे लागत बढ़ जाती है.
अब सुझाव दिया जा रहा है कि सप्लाई ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट के जरिए सीधे अफगानिस्तान तक पहुंचाई जा सकती है, लेकिन इसके लिए दोनों देशों के बीच सहमति जरूरी होगी.
व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रस्ताव में कुछ बड़ी चुनौतियां भी हैं. सबसे बड़ी समस्या भुगतान प्रणाली और लॉजिस्टिक्स की है. भारत और अफगानिस्तान के बीच औपचारिक कूटनीतिक संबंध पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, खासकर तालिबान प्रशासन के कारण.
इसी वजह से भारतीय निर्यातक अभी सावधानी बरत रहे हैं और बड़े स्तर पर व्यापार शुरू करने से पहले सुरक्षित भुगतान की गारंटी चाहते हैं.
अगर यह समझौता सफल होता है तो भारत को बासमती चावल के लिए एक नया बड़ा बाजार मिल सकता है. अभी तक अफगानिस्तान में पाकिस्तान का दबदबा रहा है, लेकिन अब भारत इस बाजार में मजबूत पकड़ बना सकता है. भारत ने 2025-26 में करीब 65.2 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया है. हालांकि कीमतों में गिरावट के कारण कमाई थोड़ी घटी है, फिर भी भारत दुनिया के सबसे बड़े बासमती निर्यातकों में शामिल है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत और अफगानिस्तान के बीच सीधा व्यापार शुरू होता है, तो आने वाले समय में भारत की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ सकती है. इससे न सिर्फ किसानों को फायदा मिलेगा बल्कि निर्यात कारोबार को भी नई मजबूती मिलेगी.
कुल मिलाकर, पाकिस्तान की पारंपरिक बढ़त को अब भारत चुनौती दे रहा है. अफगानिस्तान अगर भारत से सीधे बासमती चावल खरीदना शुरू करता है, तो यह भारत के लिए एक बड़ा व्यापारिक अवसर साबित हो सकता है.
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