प्याज पर सरकार की बैठक बेनतीजाकेंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग (DoCA) की सचिव निधि खरे ने प्याज निर्यातक संघों के सदस्यों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की. इस बैठक का उद्देश्य प्याज के निर्यात और कीमतों को स्थिर रखने के उपायों पर चर्चा करना था. बैठक में प्याज के बेहतर भंडारण तकनीक और बुनियादी ढांचे के विकास पर चर्चा की गई. इस बैठक में DoCA के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया. दिल्ली में यह बैठक ऐसे समय में बुलाई गई जब ईरान युद्ध की वजह से प्याज निर्यात में बड़ी गिरावट है और मंडियों में दाम भी बेहद निचले स्तर पर चल रहे हैं.
सूत्रों ने 'किसान तक' को बताया कि DoCA बैठक में प्याज भंडारण को लेकर चर्चा जरूर हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला. देश में बड़े पैमाने पर प्याज सड़न को रोकने के लिए क्या और किस तरह के कदम उठाए जाने चाहिए, इस पर कोई सार्थक पहल सामने नहीं आई.
प्याज की बर्बादी रोकने के लिए पिछले साल भी इस तरह की एक बैठक बुलाई गई थी जिसमें बड़ी संख्या में निर्यातक संघ के प्रतिनिधि शामिल हुए थे. वह बैठक भी बेनतीजा रही और इस बार भी उपायों पर चर्चा के अलावा कोई बड़ा रिजल्ट नहीं मिला.
एक सूत्र ने बताया, प्याज निर्यातकों ने इस बार उत्पादकता कम होने का अनुमान जताया. प्याज के दाम गिरने की भी आशंका जताई. इसे देखते हुए निर्यातकों ने DoCA से प्याज के दाम को स्थिर रखने के लिए गारंटी की मांग की, लेकिन सरकार ने इस पर कोई हामी नहीं भरी. निर्यातकों ने देश में आलू की तरह प्याज के भंडारण का इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की मांग उठाई. इस मांग पर DoCA ने निर्यातकों से इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के लिए सलाह देने की मांग की.
बैठक में इस साल के प्याज निर्यात का पूरा ब्योरा मांगा गया जिस पर निर्यातकों ने अपनी बात रखी और राय जाहिर की. निर्यातकों ने बताया कि देश में प्याज का बंपर उत्पादन होने और घरेलू मार्केट में सुचारू सप्लाई के बावजूद बड़ी मात्रा में प्याज खराब हो जाता है क्योंकि उसे रखने के लिए बड़े और आधुनिक स्टोरेज की कमी है.
प्याज निर्यात से जुड़े और मीटिंग में शामिल एक निर्यातक ने बताया कि पिछले साल देश में 307 लाख मीट्रिक टन प्याज का उत्पादन हुआ था. मगर निर्यात केवल 15.4 लाख मीट्रिक टन हुआ, यानी कुल प्रोडक्शन का 5 परसेंट से भी कम. उन्होंने बताया कि देश में हर साल 205-210 लाख मीट्रिक टन प्याज की घरेलू खपत होती है. प्रति महीने का यह आंकड़ा 17 लाख मीट्रिक टन के आसपास है. बाकी बचा प्याज या तो सड़ जाता है या फेंक दिया जाता है.
निर्यातकों ने प्याज की इस बर्बादी को रोकने के लिए भंडारण और इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा बढ़ाने की मांग की. इसके जवाब में सरकार ने निर्यातकों को ही स्टोरेज क्षमता बढ़ाने और बुनियादी ढांचा विकसित करने की सलाह दी. इस पर निर्यातकों ने बजट और खर्च देने की बात उठाई जिस पर सरकार ने खाद्य मंत्रालय से बात करने और अपनी राय रखने की सलाह दी.
निर्यातकों ने बताया कि पिछले साल की तरह इस बार की बैठक भी राय और सलाह तक सिमट कर रह गई. अब देखने वाली बात है कि प्याज भंडारण का इंफ्रास्ट्रक्चर कब तक मजबूत होगा और किसानों-व्यापारियों का प्याज सड़ने से बच सकेगा.
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