नंजनगुड केले की खेती, सांकेतिक तस्वीर हमारे देश में केलों की कई ऐसी किस्में हैं जिसके बारे में आप अच्छे से नहीं जानते होंगे. उन्हीं किस्मों में से एक नंजनगुड केला भी है. जोकि कर्नाटक के नंजनागुडु, रसाबले और चामाराजानगर में पाया जाता है. इसे जीआई टैग भी मिल चुका है. वहीं, यह अपने अनोखे स्वाद और सुगंध के लिए दुनियाभर में जाना जाता है. यह केला आकार में थोड़ा मोटा और लंबाई में सामान्य किस्मों से छोटा होता है. ऐसा कहा जाता है कि स्थानीय काली मिट्टी की जलोढ़ खारी मिट्टी और जैविक खेती की अनूठी विधि के कारण नंजनगुड केले का स्वाद और सुगंध अनोखा होता है. हालांकि, नंजनगुड केले की खेती अब अपने अंतिम पड़ाव पर है. मुट्ठी भर से भी कम किसान लगभग 10 एकड़ भूमि पर इस किस्म की खेती कर रहे हैं.
गौरतलब है कि नंजनगुड केले समेत राज्य के सभी जीआई टैग उत्पादों का जिक्र सूबे के सीएम सिद्धारमैया ने अपने बजट स्पीच में किया था. वहीं सीएम ने इन कृषि उपज की ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए एक नई पहल का भी जिक्र किया था. ऐसे में आइए जानते हैं नंजनगुड केले की खेती किसान क्यों नहीं करना चाहते हैं-
दरअसल, जलवायु परिवर्तन की वजह से फसलों में नए-नए रोग और कीट लग रहे हैं जिनसे किसान काफी परेशान हैं. वहीं, नंजनगुड केला उत्पादक, फसल में पनामा बिल्ट रोग के कारण खेती नहीं करना चाहते हैं. इस रोग की वजह से उनकी पूरी फसल बर्बाद हो जाती है. यही कारण है कि नंजनगुड केले की खेती की लोकप्रियता में भारी कमी आई है.
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हालांकि, मैसूरु में बागवानी विभाग ने खेती को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय किए हैं, जिनमें एक हेक्टेयर क्षेत्र में जीआई फसल उगाने वाले किसानों के लिए 99,000 रुपये की सब्सिडी शामिल है.
पनामा विल्ट फ्यूजेरियम विल्ट टीरआर-2 नामक फंगस से होती है. जो केले के पौधों की वृद्धि को रोक देता है. इस रोग के लक्षण की बात करें तो केले के पौधें की पत्तियां भूरे रंग की होकर गिर जाती हैं और तना भी सड़ने भी लगता है. यह बेहद घातक रोग माना जाता है जो केले की पूरी फसल को बर्बाद कर देता है.
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कर्नाटक को अभीतक 46 जीआई टैग यानी भौगोलिक संकेत टैग मिल चुका हैं, जिसमें से 22 कृषि प्रोडक्ट हैं. उन्हीं कृषि प्रोडक्ट में से नंजनगुड केला भी एक है. मालूम हो कि जीआई टैग किसी भी विशेष क्षेत्र के उत्पादों को प्रदर्शित करता है. वहीं, किसी भी उत्पाद की गुणवत्ता, विशेषता या प्रतिष्ठा के आधार पर भौगोलिक संकेत टैग दिया जाता है. भारत में कृषि, प्राकृतिक, निर्मित वस्तु, कपड़ा, हस्तशिल्प, खाद्य सामग्री आदि कैटगरी के सैंकड़ों उत्पादों को जीआई टैग हासिल हो चुका है.
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