खरीफ बुवाई में धान का रकबा 15.56 लाख हेक्टेयर घटा, कपास भी पिछड़ी, जानिए सभी फसलों का हाल

खरीफ बुवाई में धान का रकबा 15.56 लाख हेक्टेयर घटा, कपास भी पिछड़ी, जानिए सभी फसलों का हाल

2 अक्टूबर 2026 तक देश में खरीफ फसलों की बुवाई 1,115.31 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले साल से 11.81 लाख हेक्टेयर कम है. धान का रकबा 15.56 लाख हेक्टेयर घटा, जबकि कपास 0.55 लाख हेक्टेयर पीछे रहा. दूसरी ओर दलहन में 2.57 लाख हेक्टेयर, मोटे अनाज में 0.77 लाख हेक्टेयर और तिलहन में 1.11 लाख हेक्टेयर की बढ़त दर्ज हुई.

Advertisement
खरीफ बुवाई में धान का रकबा 15.56 लाख हेक्टेयर घटा, कपास भी पिछड़ी, जानिए सभी फसलों का हालखरीफ फसल का रकबा घटा (AI Image)

अल नीनो के असर से कमजोर मॉनसून और बारिश के असमान वितरण के कारण इस साल खरीफ बुवाई को काफी नुकसान पहुंचा है. इसका सीधा असर फसलों के रकबे में झलक रहा है. केंद्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2 अक्टूबर 2026 तक देशभर में खरीफ फसलों की बुवाई 1,115.31 लाख हेक्टेयर में हुई है. यह पिछले साल की समान अवधि के 1,127.12 लाख हेक्टेयर से 11.81 लाख हेक्टेयर यानी 1.05 प्रतिशत कम है. हालांकि बुवाई अभी सामान्य रकबे 1,104.22 लाख हेक्टेयर से 11.09 लाख हेक्टेयर ज्यादा है. इस गिरावट में सबसे बड़ा हिस्सा धान का है, जिसका रकबा 15.56 लाख हेक्टेयर घटा है. कपास भी पिछले साल से पीछे है और सामान्य रकबे से करीब 15 लाख हेक्टेयर कम है. दूसरी ओर दलहन, मोटे अनाज और तिलहन में हल्की बढ़त दर्ज हुई है. जानिए विभ‍िन्‍न फसलों का क्‍या हाल है…

धान के रकबे का ऐसा है हाल

कृषि मंत्रालय के मुताबिक, धान का क्षेत्रफल 433.62 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल इसी अवधि के 449.18 लाख हेक्टेयर से 3.46 प्रतिशत कम है. राज्यों में सबसे ज्यादा कमी तेलंगाना (4.26 लाख हेक्टेयर) और कर्नाटक (4.23 लाख हेक्टेयर) में रही.

उत्तर प्रदेश में 1.84 लाख हेक्टेयर, मध्य प्रदेश में 1.75 लाख हेक्टेयर और आंध्र प्रदेश में 1.70 लाख हेक्टेयर की गिरावट आई. ओडिशा में 0.66 लाख हेक्टेयर और असम में 0.59 लाख हेक्टेयर की बढ़त रही. इसके बावजूद धान का रकबा 412 लाख हेक्टेयर के सामान्य क्षेत्रफल से 21.62 लाख हेक्टेयर ज्यादा है.

दलहन में बढ़त, उत्तर प्रदेश सबसे आगे

वहीं, कुल दलहन का रकबा 122.39 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 119.82 लाख हेक्टेयर से 2.57 लाख हेक्टेयर ज्यादा है. हालांकि, यह 123.64 लाख हेक्टेयर के सामान्य क्षेत्रफल से 1.25 लाख हेक्टेयर कम है. उत्तर प्रदेश में 3.97 लाख हेक्टेयर की सबसे बड़ी बढ़त दर्ज हुई. 

झारखंड में 0.86 लाख हेक्टेयर, तेलंगाना में 0.85 लाख हेक्टेयर और आंध्र प्रदेश में 0.57 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी रही. महाराष्ट्र (2.36 लाख हेक्टेयर) और कर्नाटक (1.80 लाख हेक्टेयर) में रकबा घटा है.

अरहर का रकबा 47.93 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल से 1.49 लाख हेक्टेयर ज्यादा है. उड़द का क्षेत्रफल 2.96 लाख हेक्टेयर बढ़कर 26.57 लाख हेक्टेयर हो गया. मूंग का रकबा 1.17 लाख हेक्टेयर घटकर 33.73 लाख हेक्टेयर रह गया.

मोटे अनाज में मामूली बढ़त, मक्का का रकबा घटा

श्री अन्न एवं मोटे अनाज का कुल क्षेत्रफल 187.16 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 186.39 लाख हेक्टेयर से 0.77 लाख हेक्टेयर ज्यादा है. यह 182.63 लाख हेक्टेयर के सामान्य रकबे से भी 4.53 लाख हेक्टेयर ऊपर है. राज्यों में राजस्थान (2.90 लाख हेक्टेयर) और ओडिशा (2.37 लाख हेक्टेयर) में सबसे ज्यादा बढ़त रही, जबकि कर्नाटक (5.09 लाख हेक्टेयर) और महाराष्ट्र (2.35 लाख हेक्टेयर) में गिरावट आई. फसलों में ज्वार का रकबा 1.30 लाख हेक्टेयर और बाजरा का 2.09 लाख हेक्टेयर बढ़ा, जबकि मक्का 2.80 लाख हेक्टेयर घटकर 93.54 लाख हेक्टेयर रह गया.

तिलहन में 1.11 लाख हेक्टेयर की बढ़त

तिलहन का कुल क्षेत्रफल 196.66 लाख हेक्टेयर दर्ज हुआ, जो पिछले साल के 195.55 लाख हेक्टेयर से 1.11 लाख हेक्टेयर ज्यादा है. हालांकि, यह 199.84 लाख हेक्टेयर के सामान्य रकबे से 3.18 लाख हेक्टेयर कम है. सोयाबीन का रकबा 123.16 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल से सिर्फ 0.14 लाख हेक्टेयर कम है. तिल का रकबा 1.37 लाख हेक्टेयर बढ़ा है.

इधर, उत्तर प्रदेश में तिलहन का क्षेत्रफल 2.91 लाख हेक्टेयर, मध्य प्रदेश में 1.14 लाख हेक्टेयर और महाराष्ट्र में 0.83 लाख हेक्टेयर बढ़ा है. वहीं गुजरात में 1.67 लाख हेक्टेयर और राजस्थान में 1.46 लाख हेक्टेयर की कमी आई है.

गन्ने का रकबा घटा, पर सामान्य से ऊपर

रिपोर्ट के मुताबिक, गन्ने की बुवाई 58.61 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले साल के 58.87 लाख हेक्टेयर से 0.26 लाख हेक्टेयर कम है. फिर भी यह 54.20 लाख हेक्टेयर के सामान्य क्षेत्रफल से 4.41 लाख हेक्टेयर ज्यादा है. बिहार में 0.30 लाख हेक्टेयर और महाराष्ट्र में 0.14 लाख हेक्टेयर की कमी रही, जबकि उत्तर प्रदेश में 0.36 लाख हेक्टेयर और हरियाणा में 0.21 लाख हेक्टेयर की बढ़त दर्ज हुई.

जूट-मेस्टा में हल्की बढ़त

वहीं, 18 सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार जूट, और मेस्टा का संयुक्त क्षेत्रफल 6.35 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 6.24 लाख हेक्टेयर से 0.11 लाख हेक्टेयर ज्यादा है. बिहार में 0.11 लाख हेक्टेयर की बढ़त रही, जबकि असम में 0.07 लाख हेक्टेयर की कमी आई. यह 6.39 लाख हेक्टेयर के सामान्य क्षेत्रफल से मामूली कम है.

कपास का क्षेत्रफल 110.53 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल यह 111.08 लाख हेक्टेयर था. यानी 0.55 लाख हेक्टेयर (0.49 प्रतिशत) की कमी है. असली अंतर सामान्य रकबे से है. 125.51 लाख हेक्टेयर के सामान्य क्षेत्रफल के मुकाबले कपास 14.98 लाख हेक्टेयर पीछे है.

राजस्थान में कपास का रकबा 1.05 लाख हेक्टेयर, हरियाणा में 0.90 लाख हेक्टेयर, पंजाब में 0.43 लाख हेक्टेयर और आंध्र प्रदेश में 0.23 लाख हेक्टेयर घटा है. तेलंगाना में 0.95 लाख हेक्टेयर, गुजरात में 0.70 लाख हेक्टेयर और महाराष्ट्र में 0.49 लाख हेक्टेयर की बढ़त दर्ज हुई है.

POST A COMMENT