कमजोर मॉनसून का असर: खरीफ बुवाई 42 लाख हेक्टेयर घटी, दलहन-तिलहन सबसे ज्यादा प्रभावित

कमजोर मॉनसून का असर: खरीफ बुवाई 42 लाख हेक्टेयर घटी, दलहन-तिलहन सबसे ज्यादा प्रभावित

देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर दिखाई देने लगा है. कृषि मंत्रालय के अनुसार 17 जुलाई 2026 तक खरीफ फसलों की बुवाई पिछले साल की तुलना में 42.28 लाख हेक्टेयर कम रही है. दलहन, मोटे अनाज, तिलहन और कपास के रकबे में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 1 जून से 19 जुलाई के बीच देश के 65 प्रतिशत क्षेत्र में बारिश सामान्य से कम रही, जिससे कई राज्यों में बुवाई प्रभावित हुई है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होने पर बुवाई के आंकड़ों में सुधार संभव है, लेकिन मॉनसून की कमी बनी रहने पर खरीफ उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है.

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कमजोर मॉनसून का असर: खरीफ बुवाई 42 लाख हेक्टेयर घटी, दलहन-तिलहन सबसे ज्यादा प्रभावितखरीफ फसलों की बुवाई में गिरावट

देश के कई हिस्सों में मॉनसून की रफ्तार कमजोर पड़ने का असर अब खरीफ फसलों की बुवाई पर साफ नजर आने लगा है. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के 17 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार खरीफ फसलों का कुल रकबा पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 42.28 लाख हेक्टेयर कम रहा है. मौसम विभाग के बारिश के आंकड़े भी संकेत दे रहे हैं कि देश के बड़े हिस्से में सामान्य से कम बारिश होने के कारण बुवाई का काम प्रभावित हुआ है.

कृषि मंत्रालय के मुताबिक 17 जुलाई 2026 तक खरीफ फसलों की बुवाई 658.19 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 700.47 लाख हेक्टेयर था. सबसे अधिक गिरावट दलहन, मोटे अनाज (श्री अन्न), तिलहन और कपास के क्षेत्रफल में दर्ज की गई है.

दलहन, तिलहन की बुवाई पिछड़ी

दलहनों की बुवाई पिछले साल के 81.52 लाख हेक्टेयर के मुकाबले घटकर 69.23 लाख हेक्टेयर रह गई है, यानी 12.29 लाख हेक्टेयर की कमी आई है. इसी तरह श्री अन्न और मोटे अनाजों का क्षेत्रफल 15.06 लाख हेक्टेयर घटकर 119.03 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है. तिलहन फसलों की बुवाई में 8.63 लाख हेक्टेयर और कपास में 5.87 लाख हेक्टेयर की गिरावट दर्ज की गई है.

फसलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो सोयाबीन की बुवाई 111.05 लाख हेक्टेयर से घटकर 106.02 लाख हेक्टेयर, बाजरा 49.05 लाख हेक्टेयर से घटकर 39.98 लाख हेक्टेयर और मक्का 71.50 लाख हेक्टेयर से घटकर 67.89 लाख हेक्टेयर रह गया है. अरहर, मूंग और उड़द जैसी प्रमुख दलहनी फसलों का रकबा भी पिछले साल से कम है. हालांकि गन्ने की बुवाई में 0.86 लाख हेक्टेयर और जूट और मेस्टा में 0.13 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

सोयाबीन, मूंगफली, गन्ना और कपास जैसी फसलों ने चिंता बढ़ाई है क्योंकि इसके रकबे में गिरावट देखी जा रही है, सिवाय गन्ने के. गन्ने की बुवाई में गिरावट भले न हो लेकिन बढ़त भी बहुत अच्छी नहीं है. गन्ने की बुवाई में मात्र 0.86 लाख हेक्टेयर की बढ़त है. दूसरी ओर सोयाबीन में 5.02 लाख हेक्टेयर, मूंगफली में 3.17 लाख हेक्टेयर और कपास में 5.87 लाख हेक्टेयर की गिरावट है. 

सबसे बड़ी चिंता दलहन और तिलहन को लेकर है. कुल दलहन बुवाई में 12.29 लाख हेक्टेयर की गिरावट है जिसमें सबसे अधिक कमी अरहर में है. तिलहन में 8.63 लाख हेक्टेयर की गिरावट है जिसमें सबसे अधिक प्रभावित सोयाबीन है.

देश के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात

इधर, भारतीय मौसम विभाग के उप-विभागीय बारिश आंकड़ों से पता चलता है कि 1 जून से 19 जुलाई 2026 के दौरान देश के 65 प्रतिशत क्षेत्र में बारिश सामान्य से कम (डिफिसिट) रही है, जबकि केवल 35 प्रतिशत क्षेत्र में सामान्य बारिश दर्ज की गई. कई कृषि प्रधान क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण किसान बुवाई टाल रहे हैं या कम रकबे में खेती कर रहे हैं.

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई के दूसरे पखवाड़े में अच्छी बारिश होने पर बुवाई के आंकड़ों में सुधार संभव है. हालांकि यदि मॉनसून की कमी लंबे समय तक बनी रहती है तो खरीफ उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है. विशेष रूप से सोयाबीन, दलहन, बाजरा और अन्य बारिश आधारित फसलें सबसे अधिक प्रभावित हो सकती हैं.

फिलहाल खरीफ सीजन में कम बारिश और धीमी बुवाई ने कृषि क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है. अब किसानों और नीति निर्माताओं की नजर अगले कुछ सप्ताह की मॉनसूनी गतिविधियों पर टिकी है, क्योंकि यही अवधि खरीफ फसलों के भविष्य और उत्पादन का रुख तय करेगी.

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