महंगाई बढ़ी तो काम आएगा अनाज का भंडार, भारत के पास 925.85 LMT गेहूं-चावल का स्टॉक

महंगाई बढ़ी तो काम आएगा अनाज का भंडार, भारत के पास 925.85 LMT गेहूं-चावल का स्टॉक

वैश्विक खाद्य बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत के पास गेहूं और चावल का मजबूत भंडार है. 1 जुलाई 2026 तक सेंट्रल पूल में 925.85 लाख मीट्रिक टन अनाज था, जो निर्धारित स्टॉकिंग नॉर्म 411.20 लाख मीट्रिक टन से दो गुना से भी ज्यादा है.

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महंगाई बढ़ी तो काम आएगा अनाज का भंडार, भारत के पास 925.85 LMT गेहूं-चावल का स्टॉकदेश में पर्याप्त गेहूं-चावल का स्टॉक

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत के पास गेहूं और चावल के स्टॉक का एक बड़ा बफर है, जिसमें 1 जुलाई, 2026 तक सेंट्रल पूल में 925.85 लाख मीट्रिक टन (LMT) स्टॉक था, जो 411.20 LMT के निर्धारित स्टॉकिंग मानदंड से दोगुने से भी ज्यादा है.

स्टॉक की यह स्थिति ऐसे समय में है जब ग्लोबल फूड मार्केट को ज्यादा फर्टिलाइजर लागत, अधिक शिपिंग खर्च और जियोपॉलिटिकल रुकावटों (जिसमें होर्मुज़ स्ट्रेट के आसपास की स्थिति भी शामिल है) से दबाव का सामना करना पड़ रहा है.

गेहूं और चावल का स्टॉक 925.85 लाख मीट्रिक टन

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 जुलाई, 2026 तक सेंट्रल पूल में गेहूं और चावल का स्टॉक 925.85 लाख मीट्रिक टन (LMT) था, जबकि निर्धारित स्टॉकि की सीमा 411.20 LMT थी. इसका मतलब है कि स्टॉक बफर की जरूरत से 2.2 गुना से ज्यादा था, जिसमें 514.65 LMT का सरप्लस था.

गेहूं का स्टॉक 522.74 LMT था, जबकि नियम 275.80 LMT का था, वहीं चावल का स्टॉक 403.11 LMT था, जबकि नियम 135.40 LMT का था. 1 जुलाई, 2025 की तुलना में, कुल गेहूं और चावल के स्टॉक में लगभग 26% की वृद्धि हुई, जिसमें अकेले गेहूं के स्टॉक में लगभग 46% की वृद्धि हुई.

मौसमी कमी के बाद भी यह बफर काफी बना हुआ है. FCI के डेटा से पता चलता है कि 1 सितंबर तक, सेंट्रल पूल में 479.92 LMT गेहूं और 390.53 LMT चावल था, जिससे कुल स्टॉक 870.45 LMT हो गया.

गेहूं का उत्पादन बंपर रहने का अनुमान

सितंबर का स्टॉक 1 अक्टूबर के लिए तय 307.70 LMT के स्टॉक नॉर्म से लगभग 2.8 गुना ज्यादा था. FCI के डेटा में यह भी दिखाया गया कि FCI और राज्य एजेंसियों के पास 307.51 LMT बिना कुटा हुआ धान (unmilled paddy) था, जो 67% आउट-टर्न रेश्यो के हिसाब से 206.03 LMT चावल के बराबर है.

स्टॉक की मजबूत स्थिति गेहूं की बेहतर खरीद के मौसम की वजह से बनी है. कमीशन फॉर एग्रीकल्चरल कॉस्ट्स एंड प्राइसेस (CACP) ने रबी फसलों के लिए अपनी मूल्य नीति (मार्केटिंग सीज़न 2027-28) में कहा कि गेहूं की खरीद RMS 2023-24 में 26.2 मिलियन टन से बढ़कर RMS 2025-26 में 26.6 मिलियन टन हो गई. RMS 2026-27 में खरीद 15 जून, 2026 तक लगभग 33.8 मिलियन टन तक पहुंच गई थी, जबकि एक साल पहले यह 30.2 मिलियन टन थी.

गेहूं का उत्पादन भी मजबूत हुआ है. CACP के तीसरे एडवांस अनुमान के अनुसार, 2025-26 में गेहूं का उत्पादन 120.7 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जबकि 2024-25 में यह 110.6 मिलियन टन था.

सरकारी सूत्रों ने कहा, "चावल और गेहूं की खरीद स्थिर है, ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव के कारण कीमतें बदल सकती हैं, लेकिन हम लगातार हालात पर नजर रख रहे हैं. किसानों पर इसका असर नहीं पड़ने देंगे."

ओपन मार्केट सेल स्कीम का विकल्प

सरकार जरूरत पड़ने पर मार्केट में दखल देने की फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) की क्षमता पर भी भरोसा कर रही है. ओपन मार्केट सेल स्कीम के तहत, FCI सप्लाई बढ़ाने, कीमतों को स्थिर करने और महंगाई को काबू में रखने के लिए अतिरिक्त गेहूं और चावल को खुले बाजार में जारी कर सकता है. 

इसलिए, स्टॉक की बड़ी मात्रा सरकार को यह मौका देती है कि अगर ग्लोबल उतार-चढ़ाव का असर घरेलू खाद्य कीमतों पर पड़ने लगे, तो वह कोई कदम उठा सके. दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच यह बफर और भी अहम हो गया है. 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खाद की ऊंची कीमतों और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में रुकावटों को वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए चुनौती बताया है, क्योंकि देशों को खेती के लिए जरूरी सामान खरीदने में मुश्किल हो रही है और शिपिंग की लागत भी अधिक बनी हुई है.

इसी तरह, CACP ने दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में तनाव और सप्लाई-चेन में रुकावटों को ऐसे फैक्टर के तौर पर बताया है जिनसे वैश्विक कृषि जिंस बाजारों में उतार-चढ़ाव आ सकता है.

कई फसलों की एमएसपी में वृद्धि

MSP पर हालिया फैसला यह भी दिखाता है कि सरकार किस तरह खाद्य सुरक्षा और किसानों की कमाई के बीच संतुलन बना रही है. रबी मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए, गेहूं का MSP 25 रुपये बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है. इसकी तुलना में, मसूर का MSP 390 रुपये बढ़कर 7,390, रेपसीड और सरसों का MSP 413 बढ़कर 6,613 रुपये और कुसुम (safflower) का MSP 675 बढ़कर 7,215 रुपये हो गया है.

CACP द्वारा सुझाए गए MSP, उत्पादन की संबंधित लागत पर कम से कम 50% का मार्जिन देते हैं और ये उत्पादन लागत, मांग-आपूर्ति की स्थिति, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतें, फसलों के बीच समानता और व्यापार की शर्तों जैसे फैक्टर पर आधारित होते हैं.

गेहूं के लिए, 2,610 रुपये का MSP, CACP की 1,264 रुपये प्रति क्विंटल की अनुमानित लागत पर 106% का मार्जिन दिखाता है. मसूर के लिए यह मार्जिन 92% और रेपसीड व सरसों के लिए 96% है.

इस बीच, खरीद की योजना बनाने का काम जारी है. सरकार ने 2026-27 खरीफ धान खरीद का अनुमान धान के रूप में 708.64 LMT तय किया है, साथ ही राज्यों और FCI के साथ खरीद, भंडारण और लॉजिस्टिक्स की समीक्षा भी जारी रखी है.

फिलहाल, भारत की अनाज की स्थिति बाहरी खाद्य संकट से निपटने के लिए एक मजबूत सहारा देती है. बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि खाद, ऊर्जा और ढुलाई की लागत में लंबे समय तक होने वाली बढ़ोतरी, अंततः खेती की लागत को न बढ़ा दे और अगली फसल के अर्थशास्त्र को कमजोर न कर दे.(चेतन भूटानी की रिपोर्ट)

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