कपास खरीद में CCI का बड़ा सुधार, किसानों को रजिस्ट्रेशन से भुगतान तक मिलेगी डिजिटल सुविधा

कपास खरीद में CCI का बड़ा सुधार, किसानों को रजिस्ट्रेशन से भुगतान तक मिलेगी डिजिटल सुविधा

कपास किसानों के लिए खरीद व्यवस्था को आसान और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव किया गया है. CCI डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए किसान रजिस्ट्रेशन, स्लॉट बुकिंग, गुणवत्ता जांच और आधार आधारित भुगतान जैसी सुविधाएं दे रहा है. हैदराबाद में सुधार उत्सव 2026 के तहत इन बदलावों को दिखाया जाएगा, जिससे किसानों को कपास बेचने में सुविधा मिलेगी और प्रक्रिया तेज होगी.

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कपास खरीद में CCI का बड़ा सुधार, किसानों को रजिस्ट्रेशन से भुगतान तक मिलेगी डिजिटल सुविधाकपास किसानों को मिलेगी राहत!

तेलंगाना के हैदराबाद में 6 अक्टूबर 2026 को कपास किसानों से जुड़ी खरीद व्यवस्था में किए गए बड़े बदलावों को सामने रखा जाएगा. यह कार्यक्रम ‘सुधार उत्सव 2026’ के तहत आयोजित होगा. इसमें भारतीय कपास निगम (CCI) की ओर से किए गए उन सुधारों को दिखाया जाएगा, जिनसे किसानों के लिए कपास बेचना आसान, पारदर्शी और तेज बनाने की कोशिश की गई है.

कपास खरीद में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा

भारतीय कपास निगम ने पिछले कुछ वर्षों में कपास खरीद की पूरी प्रक्रिया में कई बदलाव किए हैं. किसान पंजीकरण से लेकर कपास बेचने के लिए स्लॉट बुक करने, गुणवत्ता जांच और भुगतान तक की प्रक्रिया में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया गया है. इसका उद्देश्य किसानों को बार-बार दफ्तरों और खरीद केंद्रों के चक्कर लगाने से बचाना है. साथ ही किसानों को यह जानकारी भी आसानी से मिल सके कि उनकी कपास की खरीद कब और कैसे होगी.

किसान डिजिटल प्लेटफॉर्म से कर सकेंगे कई काम

हैदराबाद के कार्यक्रम में ‘कपास किसान डिजिटल प्लेटफॉर्म’ भी प्रमुख रूप से दिखाया जाएगा. इस प्लेटफॉर्म के जरिए किसान पंजीकरण, स्लॉट बुकिंग और खरीद से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकते हैं. भुगतान की प्रक्रिया को भी आधार से जोड़ा गया है. इस व्यवस्था से कपास खरीद में पारदर्शिता बढ़ाने और प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिल रही है. किसान को अपनी कपास की बिक्री से जुड़ी जानकारी भी ज्यादा आसानी से मिल सकती है.

गुणवत्ता पर भी दिया जा रहा जोर

कपास खरीद के साथ उसकी गुणवत्ता सुधारने पर भी सरकार और CCI का जोर है. इसके लिए ‘कस्तूरी कॉटन भारत’ पहल के तहत कपास में गंदगी और दूसरी चीजों की मिलावट रोकने, डिजिटल पहचान देने और अच्छी गुणवत्ता वाली कपास को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं. इसका मकसद भारतीय कपास की अलग पहचान बनाना है. बेहतर गुणवत्ता वाली कपास से किसानों को अच्छे बाजार और भारतीय कपड़ा उद्योग को बेहतर कच्चा माल मिलने की उम्मीद है. इससे घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारतीय कपास की स्थिति मजबूत हो सकती है.

किसानों को बेहतर तकनीक देने की कोशिश

कार्यक्रम में हाई डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम यानी उच्च घनत्व रोपण प्रणाली (HDPS) पर भी चर्चा होगी. इस तकनीक का इस्तेमाल कपास की उत्पादकता बढ़ाने के लिए किया जा रहा है. सरकार और कृषि संस्थानों का लक्ष्य है कि किसानों तक ऐसी तकनीक पहुंचाई जाए, जिससे कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन मिल सके. इससे कपास की खेती की लागत और उत्पादन से जुड़े कई मुद्दों पर भी काम किया जा सकता है.

किसानों और उद्योग से सीधे सुनी जाएंगी बातें

हैदराबाद में होने वाले कार्यक्रम में किसान, कपास उद्योग से जुड़े लोग, सरकारी अधिकारी और दूसरे हितधारक शामिल होंगे. इस दौरान किसान और उद्योग से जुड़े लोग अपने अनुभव साझा करेंगे. इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि डिजिटल खरीद व्यवस्था और दूसरे सुधार जमीन पर किसानों के लिए कितने उपयोगी साबित हो रहे हैं. साथ ही जहां अभी परेशानी है, वहां सुधार की गुंजाइश पर भी चर्चा हो सकेगी.

रेशम क्षेत्र में भी डिजिटल बदलाव

‘सुधार उत्सव 2026’ के तहत सिर्फ कपास ही नहीं, बल्कि रेशम क्षेत्र में किए गए बदलावों को भी सामने रखा जा रहा है. केंद्रीय रेशम बोर्ड ने रेशम से जुड़ी कई सेवाओं को डिजिटल किया है. ‘सिल्क मार्क’ से जुड़ी सेवाओं में रजिस्ट्रेशन, नवीनीकरण, दस्तावेजों की जांच, भुगतान, रिकॉर्ड रखने और शिकायत दर्ज करने जैसी सुविधाओं को ऑनलाइन किया गया है. इससे रेशम कारोबार से जुड़े लोगों, खासकर छोटे कारोबारियों और MSME को फायदा हो रहा है.

‘मेरा रेशम मेरा अभियान’ से किसानों तक पहुंची तकनीक

केंद्रीय रेशम बोर्ड ने किसानों तक नई रेशम उत्पादन तकनीक पहुंचाने के लिए ‘मेरा रेशम मेरा अभियान’ शुरू किया है. इसके तहत किसानों को प्रशिक्षण, प्रदर्शन और खेत स्तर पर तकनीकी जानकारी दी जा रही है. पहले अभियान में 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 129 जिलों में 1,400 से ज्यादा कार्यक्रम किए गए और करीब 75 हजार किसानों तक पहुंच बनाई गई. इसके बाद अभियान के दूसरे चरण में 218 प्रमुख रेशम उत्पादन जिलों को शामिल किया गया है.

‘सेरी टूरिज्म’ से लोगों को समझाया जाएगा रेशम का सफर

केंद्रीय रेशम बोर्ड ‘सेरी टूरिज्म’ की अवधारणा पर भी काम कर रहा है. इसके जरिए लोग रेशम के पूरे सफर को करीब से समझ सकेंगे. इसमें रेशम के कीड़ों के पालन से लेकर कोकून तैयार होने, रेशम निकालने, कपड़ा बनाने और तैयार उत्पाद तक की जानकारी दी जाएगी. जम्मू-कश्मीर के मानसबल और असम के टोपाटोली में ऐसे केंद्र विकसित किए जा रहे हैं. यहां रेशम की अलग-अलग किस्मों, रेशमकीट पालन, कोकून उत्पादन और रेशम बनाने की प्रक्रिया को दिखाया जाएगा.

कपास और रेशम क्षेत्र को आधुनिक बनाने पर जोर

‘सुधार उत्सव 2026’ के जरिए सरकार कपास और रेशम जैसे क्षेत्रों में किए जा रहे बदलावों को लोगों के सामने ला रही है. इन सुधारों में डिजिटल तकनीक, बेहतर खरीद व्यवस्था, पारदर्शिता, किसानों तक तकनीक पहुंचाना और गुणवत्ता सुधार जैसे मुद्दे शामिल हैं. हैदराबाद का कार्यक्रम खास तौर पर कपास किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां CCI की नई खरीद व्यवस्था और डिजिटल सुविधाओं का प्रदर्शन किया जाएगा. सरकार का लक्ष्य खेत से लेकर फाइबर, फैक्टरी और बाजार तक पूरी वस्त्र मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना है. इन बदलावों से कपास किसानों को खरीद प्रक्रिया में ज्यादा सुविधा और जानकारी मिलने की उम्मीद है. साथ ही CCI की कोशिश है कि कपास की खरीद व्यवस्था अधिक पारदर्शी, तेज और किसान-केंद्रित बने और भारतीय कपास को देश और दुनिया के बाजार में मजबूत पहचान मिले.

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