किसानों के लिए गेहूं की 4 नई किस्में तैयार, MACS महाबल से ताम्हिनी तक जानें खासियत

किसानों के लिए गेहूं की 4 नई किस्में तैयार, MACS महाबल से ताम्हिनी तक जानें खासियत

पुणे स्थिर आघारकर रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने गेहूं की चार नई किस्में MACS महाबल, MACS शिवनेरी, MACS विंध्य और MACS ताम्हिनी विकसित की हैं. इन किस्मों का लक्ष्य देर से बुवाई और बदलते तापमान जैसी परिस्थितियों में भी गेहूं की बेहतर पैदावार बनाए रखना है.

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किसानों के लिए गेहूं की 4 नई किस्में तैयार, MACS महाबल से ताम्हिनी तक जानें खासियतगेहूं की 4 नई किस्में तैयार

पुणे के आघारकर रिसर्च इंस्टीट्यूट (MACS-ARI) के रिसर्चर्स ने गेहूं की चार नई किस्में विकसित की हैं. इनका मकसद अलग-अलग हालात में पैदावार बनाए रखना है, जिसमें महाराष्ट्र के गन्ना बेल्ट में देर से बुवाई भी शामिल है. रिसर्चर्स का कहना है कि कम समय में तैयार होने वाली किस्मों की जरूरत है ताकि देर से बुवाई और तापमान में उतार-चढ़ाव के बावजूद गेहूं की अच्छी पैदावार मिल सके. 'हिंदुस्तान टाइम्स' ने जानकारी दी.

नई किस्में — MACS 4135 (MACS महाबल), MACS 6830 (MACS शिवनेरी), MACS 6837 (MACS विंध्य) और MACS 6854 (MACS ताम्हिनी) — को 'ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट ऑन व्हीट एंड बार्ली इम्प्रूवमेंट' के तहत 'वैरायटी आइडेंटिफिकेशन कमेटी' (VIC) ने चुना है. इस रिसर्च की अगुवाई MACS-ARI के लीड ब्रीडर यशवंतकुमार के.जे. ने की. साथ ही रस्ट पैथोलॉजिस्ट सुधीर नवाथे, एग्रोनॉमिस्ट विजेंद्र बाविस्कर और क्वालिटी साइंटिस्ट मनोज ओक ने इन किस्मों को विकसित करने और उनके मूल्यांकन में बड़ा रोल निभाया. अब इन प्रस्तावों को आधिकारिक नोटिफिकेशन के लिए 'सेंट्रल वैरायटी रिलीज कमेटी' (CVRC) को भेजा गया है, जिसके बाद ये कमर्शियल खेती के लिए उपलब्ध होंगी.

MACS शिवनेरी किस्म की जानें खासियत

इन चार किस्मों में से, MACS शिवनेरी को खास तौर पर पेनिनसुलर जोन (PZ) में देर से बुवाई के हालात के लिए विकसित किया गया है. इस जोन में महाराष्ट्र और प्रायद्वीपीय भारत के दूसरे इलाके आते हैं. यह किस्म लगभग 102 दिनों में तैयार हो जाती है और बहुत देर से बुवाई के हालात में भी प्रति हेक्टेयर 35.58 क्विंटल पैदावार देती है. ट्रायल के दौरान, रोटी बनाने वाले गेहूं की इस किस्म की औसत पैदावार 47 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और अधिकतम पैदावार 65.4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई. इसके अलावा, इसमें 12.9% प्रोटीन, 40.9 पार्ट्स पर मिलियन (ppm) जिंक और 44.5 ppm आयरन पाया गया, साथ ही इसकी चपाती क्वालिटी का स्कोर 7.4 रहा.

MACS ताम्हिनी को PZ और CZ (सेंट्रल जोन) के लिए विकसित किया गया है. यह किस्म 103 से 106 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. PZ में इसकी औसत पैदावार 47.4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और CZ में 48.7 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई, जबकि अधिकतम पैदावार क्रमशः 69.5 और 69.9 क्विंटल रही. रिसर्च करने वालों के अनुसार, देर से और बहुत देर से बुवाई की स्थितियों में पैदावार में कमी 10.6% से 18.4% तक ही सीमित रही. इस किस्म में लीफ रस्ट और स्टेम रस्ट के प्रति प्रतिरोधक क्षमता भी देखी गई और इसमें प्रोटीन का स्तर 12.3% से 13.3% दर्ज किया गया.

MACS महाबल ड्यूरम गेहूं की किस्म

सही समय पर बुवाई के लिए, MACS महाबल ड्यूरम गेहूं की एक किस्म है जिसे PZ और CZ दोनों क्षेत्रों के लिए सुझाया गया है. PZ में इसकी औसत पैदावार 52.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और CZ में 59.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई, जबकि अधिकतम पैदावार क्रमशः 78.2 और 84.2 क्विंटल रही. यह किस्म PZ में 105 दिनों में और CZ में 119 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. इसके सख्त, एम्बर रंग के दाने पास्ता, सूजी और सेंवई जैसे उत्पादों के लिए उपयुक्त हैं. इसमें प्रोटीन की मात्रा 11.3%-11.4%, जिंक 40-41.2 ppm और आयरन 38.7-41.3 ppm दर्ज किया गया.

अच्छी उपज देंगी गेहूं की नई किस्में

MACS विंध्य ब्रेड गेहूं की एक किस्म है जिसे CZ में सिंचाई वाली स्थितियों में सही समय पर बुवाई के लिए विकसित किया गया है. इसकी औसत पैदावार 57.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और अधिकतम पैदावार 72.8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई. वैज्ञानिक परीक्षण में, इसने GW 322 चेक किस्म की तुलना में 3.7% अधिक पैदावार दी. इस किस्म में 12% प्रोटीन, 35.5 ppm जिंक और 35.6 ppm आयरन पाया गया, जबकि इसकी चपाती क्वालिटी का स्कोर 7.7 था.

रिसर्च करने वालों ने 'Hindustan Times' को बताया, स्टेम और लीफ रस्ट के मुख्य पैथोटाइप्स के प्रति प्रतिरोधक क्षमता होने की भी जानकारी दी. नवाथे ने कहा, "MACS-ARI में हमारा गेहूं सुधार कार्यक्रम 1974 से चल रहा है और यह उन कुछ कार्यक्रमों में से एक है जो एक ही जगह पर तीनों तरह के गेहूं — खापली (एमर), ड्यूरम (बंसी/पास्ता) और ब्रेड (सरबती) — की किस्में विकसित करते हैं."

उन्होंने कहा, "चार नई ज्यादा पैदावार देने वाली और रस्ट-रेजिस्टेंट (फफूंद-रोधी) किस्मों — MACS 4135 महाबल, MACS 6830 शिवनेरी, MACS 6837 विंध्य और MACS 6854 ताम्हिनी — के विकास के साथ, हम किसानों को मजबूत बनाने और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के अपने संकल्प को दोहराते हैं. ये किस्में खास तौर पर जलवायु के उतार-चढ़ाव को झेलने, गन्ने के इलाके में समय पर और देर से बुआई करने, और ज्यादा प्रोटीन, जिंक और आयरन के जरिए बेहतर पोषण देने के लिए विकसित की गई हैं."

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