बारिश ने दिया धोखा, खेतों में सूख गई फसलें!कर्नाटक के तुमकुरु जिले में बारिश की कमी का असर किसानों की फसलों पर साफ दिखाई दे रहा है. कोराटागेरे तालुक के बायचरप्यरा गांव में पिछले करीब तीन महीनों से अच्छी बारिश नहीं हुई है. पानी की कमी के कारण टमाटर, रागी, ज्वार और बागवानी फसलों की हालत खराब हो गई है. किसानों को अपनी मेहनत और खेती पर लगाए पैसे डूबने का डर है.
बायचरप्यरा गांव के किसानों का कहना है कि पिछले तीन महीनों में बारिश नहीं होने के कारण खेत सूख गए हैं. जिन खेतों में अच्छी फसल की उम्मीद थी, वहां अब सूखी जमीन दिखाई दे रही है. किसानों ने बीज, खाद और मजदूरी पर पैसा खर्च किया, लेकिन पानी नहीं मिलने से फसलें खराब हो गईं. गांव में खेती के लिए बारिश पर काफी निर्भरता है. ऐसे में मानसून कमजोर रहने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है. गांव का तालाब भी कई महीनों से पूरी तरह सूखा पड़ा है. इससे किसानों के पास फसलों को बचाने के लिए पानी का कोई बड़ा साधन नहीं बचा है.
किसान हरीश ने दूसरे किसान से जमीन लीज पर लेकर टमाटर की खेती की थी. इसके लिए उन्होंने करीब 10 हजार रुपये प्रति एकड़ लीज का भुगतान किया. उन्हें उम्मीद थी कि टमाटर की अच्छी फसल होगी और इससे आमदनी हो सकेगी. हरीश के मुताबिक, उन्होंने खेती में करीब 4 लाख रुपये लगाए हैं. इसमें जमीन का लीज खर्च, खाद और मजदूरी शामिल है. लेकिन पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण टमाटर की फसल लगभग पूरी तरह खराब हो गई. हरीश का अनुमान है कि उन्हें अब तक करीब 3 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है. हरीश का कहना है कि खेत में पानी नहीं है और फसल बर्बाद हो गई है, लेकिन खेती में किया गया खर्च वापस नहीं आएगा. ऐसे में उनके सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है.
इसी गांव के किसान श्रीनिवास की परेशानी भी कुछ ऐसी ही है. उन्होंने अपनी जमीन पर रागी की फसल बोई थी. लेकिन बारिश नहीं होने के कारण रागी की फसल सूख गई और उन्हें लगभग कोई उत्पादन नहीं मिला. अब उनके खेत में फसल की जगह घास और दूसरी जंगली झाड़ियां दिखाई दे रही हैं. किसान ने फसल उगाने के लिए मेहनत और पैसा लगाया, लेकिन पानी की कमी ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया.
बायचरप्यरा गांव का तालाब किसानों के लिए पानी का मुख्य स्रोत है. लेकिन यह तालाब भी कई महीनों से सूखा पड़ा है. किसानों को उम्मीद थी कि बारिश होने पर तालाब में पानी भर जाएगा और खेती के लिए कुछ राहत मिलेगी. लेकिन बारिश नहीं होने से उनकी यह उम्मीद भी टूट गई है. पानी की कमी के कारण गांव में खेती करना मुश्किल होता जा रहा है. किसानों को डर है कि अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो आने वाले समय में खेती का नुकसान और बढ़ सकता है.
बायचरप्यरा गांव की स्थिति कर्नाटक के उन कई इलाकों जैसी है, जहां बारिश की कमी से किसान परेशान हैं. राज्य के सूखा प्रभावित इलाकों में फसलों को नुकसान हुआ है और किसानों की आमदनी पर भी इसका असर पड़ा है. कर्नाटक सरकार ने 177 सूखा प्रभावित तालुकों में सूखे से करीब 46,324.50 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया है. राज्य सरकार ने राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) के नियमों के तहत केंद्र से 7,142.64 करोड़ रुपये की मदद भी मांगी है.
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने केंद्रीय सूखा आकलन दल से मुलाकात के दौरान किसानों की परेशानी का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि किसान मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं और केंद्र से जल्द मदद देने की मांग की. वहीं, बायचरप्यरा जैसे गांवों में किसानों के लिए अब सरकारी मदद ही बड़ी उम्मीद बची है. बारिश नहीं होने से फसलें सूख चुकी हैं और खेती में लगाया पैसा भी डूब रहा है. हरीश और श्रीनिवास जैसे किसानों की नजर अब इस बात पर है कि सरकार उन्हें नुकसान से उबरने के लिए कितनी राहत देती है. (नागार्जुन द्वारकांथ का इनपुट)
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