महंगाई के खिलाफ 'बफर फॉर्मूला', दाल-प्याज स्टॉक के लिए 4,100 करोड़ का प्रावधान

महंगाई के खिलाफ 'बफर फॉर्मूला', दाल-प्याज स्टॉक के लिए 4,100 करोड़ का प्रावधान

केंद्र सरकार ने दालों और प्याज के बफर स्टॉक को मजबूत करने के लिए 2026-27 में प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड (PSF) के तहत 4,100 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया है. सरकार का कहना है कि पर्याप्त बफर स्टॉक से कीमतों पर नियंत्रण, उपभोक्ताओं को राहत और जमाखोरी पर अंकुश लगाने में मदद मिल रही है.

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31.38 लाख टन दाल खरीदकर सरकार ने भरा भंडार, कीमतें काबू में रखने की तैयारीबफर स्टॉक से सरकार घटाएगी दालों के दाम

देश में आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित रखने और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए केंद्र सरकार दालों और प्याज के बफर स्टॉक को लगातार मजबूत कर रही है. लोकसभा में एक प्रश्न के जवाब में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने बताया कि सरकार साल 2014-15 से चलाए जा रहे प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड (PSF) के तहत प्रमुख दालों और प्याज का डायनेमिक बफर स्टॉक बनाए हुए है.

सरकार के अनुसार बफर स्टॉक में चना, तूर, उड़द, मूंग और मसूर जैसी प्रमुख दालों के साथ-साथ प्याज को भी शामिल किया गया है. इन वस्तुओं के बफर स्टॉक से समय-समय पर नियंत्रित तरीके से बाजार में आपूर्ति की जाती है, जिससे कीमतों में बहुत अधिक उतार-चढ़ाव को रोकने और उपभोक्ताओं को उचित दरों पर उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलती है.

PM-AASHA के तहत योजनाओं को एक साथ लाना

मंत्री ने बताया कि किसानों के हितों की रक्षा और उपभोक्ताओं के लिए मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने के मकसद से सरकार ने प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड (PSF) और प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) को प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के तहत एकीकृत (यूनिफिकेशन) किया है.

इस व्यवस्था के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर दालों की खरीद PSS के माध्यम से की जाती है, जबकि MSP के अलावा बाजार मूल्य पर बफर स्टॉक के लिए खरीद PSF के तहत की जाती है. इससे दोनों योजनाएं संयुक्त रूप से दालों के बफर स्टॉक निर्माण में योगदान दे रही हैं.

रिकॉर्ड स्तर पर हुई दालों की खरीद

सरकार के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में 31.38 लाख टन दालों की खरीद PSS के तहत की गई, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह मात्रा 18.39 लाख टन थी. खरीद में इस बड़ी वृद्धि से सरकार को पर्याप्त मात्रा में दालों का बफर स्टॉक तैयार करने में सफलता मिली है.

विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक खरीद से एक ओर किसानों को MSP का लाभ मिलता है, वहीं दूसरी ओर सरकार जरूरत पड़ने पर बाजार में दालों की आपूर्ति बढ़ाकर दाम में बेतहाशा बढ़ोतरी को नियंत्रित कर सकती है.

बाजार में दखल से कीमतें रहती हैं नियंत्रित

सरकार का कहना है कि बफर स्टॉक से दालों की नियंत्रित रिलीज बाजार में उपलब्धता बढ़ाती है और कीमतों को संतुलित रखने में मदद करती है. इसके अलावा सरकारी दखल से निजी व्यापारियों और बाजार के अन्य ट्रेडर्स पर भी कीमतें कम रखने का दबाव बनता है.

मंत्रालय के अनुसार सरकारी बफर स्टॉक जमाखोरी, कृत्रिम कमी पैदा करने और सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों पर भी प्रभावी रोक लगाने का काम करता है. इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलने के साथ बाजार में पारदर्शिता भी बढ़ती है.

प्याज की कीमतों पर नियंत्रण में अहम भूमिका

प्याज के मामले में बफर स्टॉक की भूमिका और भी महत्वपूर्ण मानी जाती है. हर साल रबी और खरीफ फसल के बीच का समय ऐसा होता है जब भंडार किए गए रबी प्याज का स्टॉक कम होने लगता है, जिससे कीमतों में तेजी आती है.

ऐसी स्थिति में सरकार अपने बफर स्टॉक से प्याज को समय समय पर और लक्ष्य आधारित तरीके से बाजार में जारी करती है. इससे बाजार में आपूर्ति बढ़ती है और मौसमी मूल्य वृद्धि को नियंत्रित करने में मदद मिलती है.

2026-27 के लिए 4,100 करोड़ रुपये का प्रावधान

सरकार ने मूल्य स्थिरीकरण की इस रणनीति को और मजबूत करने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान (BE) में प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड के लिए 4,100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. माना जा रहा है कि इस राशि से दालों और प्याज के बफर स्टॉक के विस्तार, खरीद और बाजार में दखल की गतिविधियों को तेजी मिलेगी.

सरकार का दावा है कि मजबूत बफर स्टॉक व्यवस्था से न केवल खाद्य महंगाई पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी, बल्कि किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हितों की रक्षा भी तय होगी.

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