Agriculture in February: फरवरी माह में करें ये कृषि कार्य, बढ़ेगा उत्पादन, मिलेगा मुनाफा Agriculture in February: फरवरी माह में करें ये कृषि कार्य, बढ़ेगा उत्पादन, मिलेगा मुनाफा
किसानों की सुविधा के लिए हर माह होने वाले कृषि कार्यों की जानकारी जरूरी है. ताकि आप सही समय पर फसल बोकर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें. इसी क्रम में आज हम फरवरी माह में बोई जाने वाली फसलों की जानकारी दे रहे हैं. इसके साथ ही अधिक उपज देने वाली किस्मों के बारे में भी बताएंगे ताकि उन्नत किस्मों का चयन कर उत्पादन बढ़ा सकें.
फरवरी माह में होने वाले कृषि कार्यप्राची वत्स - Noida,
- Jan 24, 2024,
- Updated Jan 24, 2024, 5:03 PM IST
फरवरी माह में, जिसे आप माघ-फाल्गुन कहते हैं, बसंत पंचमी का त्योहार आता है. इस महीने से ठंड धीरे-धीरे कम होने लगती है. इस महीने तक आपकी दलहनी और तिलहनी फसलें, आलू और कई अन्य सब्जियां भी तैयार होने लगती हैं और इस समय आप कुछ हद तक फसल की पैदावार का अनुमान लगा सकते हैं. ऐसे में कुछ महत्वपूर्ण कृषि कार्य हैं जो किसान इस महीने में करते हैं. आइए जानते हैं कौन से हैं वो कृषि कार्य.
इस महीने के मुख्य कृषि कार्य इस प्रकार हैं
गेहूं की फसल
- यदि गेहूं की फसल 40-45 दिन की हो जाए तो बुआई करें. तीसरी सिंचाई बुआई के 60-65 दिन बाद करें. तीसरी सिंचाई दूरी सिंचाई के 20-25 दिन बाद यानि बाली निकलने के समय करें.
- इस माह में तापमान बढ़ने के साथ ही गेहूं में बीमारियों का प्रकोप होने लगता है, जिनमें टाटुआ टॉग प्रमुख है. इन्हें पत्तियों और तनों पर काले धब्बों के रूप में पहचाना जा सकता है. ऐसे लक्षण दिखते ही जिनेवे (डाइथेन जेड-78) या मैन्कोजेब (डाइथेन एम-45) का 800 ग्राम 250 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें.
- यदि आवश्यक हो तो एक या दो स्प्रे एवं ऊंचाई दें. थ्रश को रोकने के लिए, लक्षण दिखाई देते ही प्रोपिकोनाज़ोल (टिल्ट - 25 ईसी) 10 मिलीग्राम दें. दवा को एक लीटर पानी में घोल बनाकर शाम को छिड़काव करें. दूसरा छिड़काव 10 दिन बाद करें.
- झुलसा रोग के नियंत्रण के लिए 2.5 किलोग्राम डाइथेन एम-45 या जिनेब का 10 दिन के अंतराल पर दो बार पर्णीय छिड़काव करें.
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जौ की फसल
- आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहें.
- यदि खेत में कंडुवा रोग से प्रभावित बाली दिखे तो उसे तोड़कर, काटकर जला दें.
- गेहूँ जैसे अन्य कीटों एवं रोगों पर नियंत्रण रखें.
शरदकालीन मक्का
- रबी मक्का में तीसरी सिंचाई बुआई के 75-80 दिन पर तथा चौथी सिंचाई तीसरी सिंचाई के एक माह बाद करनी चाहिए.
- यदि मक्के में जंग और चारकोल सड़न का खतरा हो तो 400-600 ग्राम डाइथेन एम 45 को 200-250 लीटर पानी में घोलकर एक सप्ताह के अंतराल पर 2-3 पर्णीय छिड़काव करें.
- वसंत मक्के की बुआई पूरे महीने की जा सकती है.
सूरजमुखी की फसल
सूरजमुखी की फसल नकदी फसलों में से एक है. यह सबसे अधिक लाभदायक फसलों में से एक है. सूरजमुखी की फसल 15 फरवरी तक लगाई जा सकती है. इस फसल को बोते समय इसके बीजों को पक्षियों से बचाना बहुत जरूरी है क्योंकि पक्षी बीज निकाल लेते हैं. खुद को उनसे बचाने के लिए शोर मचाएं. सूरजमुखी की बुआई के लिए मार्डन किस्म बहुत लोकप्रिय है. इसके अलावा इसकी संकर किस्में भी बोई जा सकती हैं. इनमें बीएसएस-1, केबीएसएस-1, ज्वालामुखी, एमएसएफएच-19, सूर्या आदि शामिल हैं. इसकी बुआई से पहले यदि खेत में पर्याप्त नमी न हो तो पाटा चलाकर जुताई करनी चाहिए. पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करने के बाद सामान्य हल से 2-3 बार जुताई करके खेत को भुरभुरा बना लेना चाहिए या रोटावेटर का उपयोग करना चाहिए.
इसकी बुआई करते समय पंक्ति से पंक्ति की दूरी 4-5 सेमी तथा पौधे से पौधे की दूरी 25-30 सेमी रखनी चाहिए. बुआई से पहले खेत की तैयारी के समय 7-8 टन प्रति हेक्टेयर की दर से सड़ी हुई गोबर की खाद भूमि में मिला दें तथा अच्छी उपज के लिए सिंचित अवस्था में 130 से 160 किलोग्राम यूरिया, 375 किलोग्राम एसएसपी तथा 66 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर डालें. हेक्टेयर. दर पर उपयोग करें. नाइट्रोजन की 2/3 मात्रा तथा फास्फोरस एवं पोटाश की पूरी मात्रा बुआई के समय प्रयोग करें तथा नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा बुआई के 30-35 दिन बाद पहली सिंचाई के समय खड़ी फसल में देना लाभकारी पाया गया है.