लीची में नए कीट और रोगों का बढ़ता खतरा: स्टिंक बग, फ्लावर वेबर और झुलसा रोग से बचाव जरूरी

लीची में नए कीट और रोगों का बढ़ता खतरा: स्टिंक बग, फ्लावर वेबर और झुलसा रोग से बचाव जरूरी

लीची में स्टिंक बग, फ्लावर वेबर और मंजर-फल झुलसा जैसे नए कीट और रोग तेजी से नुकसान पहुंचा रहे हैं. इनके लक्षण, प्रभाव और समय पर प्रबंधन से बेहतर उत्पादन और क्वालिटी सुनिश्चित की जा सकती है.

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लीची में नए कीट और रोगों का बढ़ता खतरा: स्टिंक बग, फ्लावर वेबर और झुलसा रोग से बचाव जरूरीलीची पर कीट और रोगों का खतरा

लीची के पड़ों पर अलग-अलग प्रकार के कीटों और रोगों का प्रकोप होता है जिससे उत्पादन और क्वालिटी प्रभावित होती है. अच्छी उपज के लिए समय पर इनका प्रबंधन जरूरी है. लीची में कीटों की समस्या ज्यादा रही है और उनमें 'फल बेधक' कीट एक महत्वपूर्ण नाशीकीट रहे हैं जिसके प्रबंधन पर किसान मुख्य तौर पर अपना ध्यान केंद्रित करते हैं और इसके लिए कई रासायनिक दवाइयों का छिड़काव करते रहे हैं. पर, हाल के वर्षों में लीची में नए कीटों और रोगों की समस्याएं उभरकर सामने आई हैं. इनमें 'स्टिंक बग' और 'फ्लावर वेबर' कीट प्रमुख हैं, साथ ही 'मंजर और फल झुलसा' रोग भी महत्वपूर्ण है. 

ICAR-राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्टिंक बग कीट का आक्रमण बिहार के लीची के बागों में वर्ष 2021 से लगातार बढ़ रहा है. इस कीट के नवजात और वयस्क दोनों ही पौधों के ज्यादातर कोमल हिस्सों जैसे कि बढ़ती कलियां, पत्तियां, पत्तीवृत, पुष्पक्रम, विकसित होते फलों के डंठल और लीची के पेड़ की कोमल शाखाओं पर जीवन निर्वाह करते हैं. कीट के बहुत अधिक रस चूसने से बढ़ती कलियां और कोमल अंकुर सूख जाती हैं और फल काले पड़ जाते हैं. रस चूसने के कारण फूल और विकसित होते फल गिरते हैं. 

'फ्लावर वेबर' कीट लीची के लिए एक नई समस्या

'फ्लावर वेबर' कीट लीची के लिए एक नई समस्या है जो पिछले 2-3 सालों में बिहार में बड़ी आर्थिक क्षति पंहुचाने वाले कीट के रूप में उभरकर सामने आया है. लीची में मंजर (पुष्पक्रम) आते ही इस कीट का प्रकोप शुरू हो जाता है. इस कीट के केटरपिलर (पिल्लू) विकसित होते ही फूल की कलियों को खाना शुरू करते हैं. धीरे-धीरे मंजर के सारे कलियों और विकसित होते फूलों को पिल्लू रेशमी जाले में लपेटकर गैलरी बनाकर अंदर रहते और खाते हैं. वे पुष्पक्रम के डंठल में भी छेद कर देते हैं. 

बाद में विकसित होते फलों को भी खाते हैं. इन फलों को गौर से देखने पर बड़े छेद दिखाई देते हैं. कीट के बहुत अधिक प्रकोप से पूरे वृक्ष के मंजर झुलसे हुए से दिखते हैं जैसे मंजर पर झुलसा रोग लग गया हो. 

'मंजर और फल झुलसा' रोग से सावधान

'मंजर और फल झुलसा' रोग की बात करें तो इससे भी काफी आर्थिक नुकसान होता है. इसके रोग फैलाने वाले कीट मंजरों को झुलसा देते हैं जिससे प्रभावित मंजरों में कोई फल नहीं लग पाते. ऐसे मंजर देखने में सूरज की किरणों से जली हुई जैसे दिखते हैं. अगर मौसम अनुकूल नहीं रहा और मंजर की अवस्था रोग से बच गई तो बाद में अनुकूल मौसम होने पर फल भी झुलस जाते हैं. तुड़ाई के बाद भी इसके रोग फैलाने वाले कीट फल सड़न पैदा करने में प्रमुख कारक होते हैं. 

इस प्रकार, नए कीट और रोगों की समस्याओं से लीची की सुरक्षा करने के लिए किसानों को रासायनिक दवाओं के छिड़काव पर अधिक खर्च करना पड़ रहा है, जिससे लीची की उत्पादन लागत में वृद्धि हो रही है.

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