अफीम की खेती का भंडाफोड़छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के एक गांव में करीब एक एकड़ ज़मीन पर अफीम की अवैध खेती का मामला सामने आया है. पिछले 15 दिनों में राज्य में यह ऐसा चौथा मामला है. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह अवैध खेती तमनार पुलिस थाना क्षेत्र के अमाघाट गांव में एक नदी के किनारे पाई गई. उन्होंने बताया कि एक गुप्त सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची, अफीम की फसल ज़ब्त की और इस मामले में मार्शल सांगा (40) नाम के एक व्यक्ति को हिरासत में ले लिया.
पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी पड़ोसी राज्य झारखंड के खूंटी जिले का रहने वाला है और उसकी शादी तमनार इलाके की सुषमा खलखो से हुई है. उन्होंने बताया कि पिछले कुछ सालों से वह अपने ससुराल में रह रहा था. तरबूज, खीरा और सब्जियां उगाने के बहाने उसने स्थानीय किसानों से खेती की जमीन पट्टे पर ली थी और गुपचुप तरीके से अफीम उगा रहा था. उन्होंने बताया कि इस मामले में आगे की जांच चल रही है.
6 मार्च को पुलिस ने दुर्ग जिले के समोदा गांव में एक फार्म हाउस में करीब 5.62 एकड़ जमीन पर अफीम की अवैध खेती का पता लगाया था. इस मामले में स्थानीय भाजपा नेता विनायक ताम्रकार को विकास विश्नोई और मनीष ठाकुर के साथ, नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेस (NDPS) एक्ट के संबंधित प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया था.
अधिकारियों ने खेत से 62,424.4 किलोग्राम वजन के अफीम के पौधे जब्त किए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 8 करोड़ रुपये है. मामला सामने आने के बाद, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने बाद में ताम्रकार को पार्टी की किसान मोर्चा इकाई के पदाधिकारी पद से निलंबित कर दिया. एक अन्य मामले में, पुलिस ने 10 मार्च को बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के त्रिपुरी घोसरदांड गांव में करीब 3.67 एकड़ जमीन पर अफीम की अवैध खेती का पता लगाया.
इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया और 4,344.569 किलोग्राम वजन के अफीम के पौधे जब्त किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 4.75 करोड़ रुपये है. उसी बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कोरंधा पुलिस थाना क्षेत्र के तहत आने वाले तुर्रीपानी (खजूरी) गांव में 12 मार्च को एक अलग कार्रवाई में राजस्व, पुलिस और वन विभागों की एक संयुक्त टीम ने लगभग 1.47 एकड़ जमीन पर हो रही अफीम की अवैध खेती का भंडाफोड़ किया. वहीं, लगभग 2 करोड़ रुपये की कीमत वाले अफीम के पौधे (करीब 18 क्विंटल 83 किलोग्राम) जब्त किए गए और NDPS एक्ट के प्रावधानों के तहत दो लोगों को गिरफ्तार किया गया.
इन मामलों के सामने आने के बाद, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा था कि नशीले पदार्थों की अवैध खेती किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. साथ ही सभी विभागों को निर्देश दिया था कि वे इस मामले की गहन जांच करें और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें. मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद छत्तीसगढ़ के भू-अभिलेख आयुक्त ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी किए थे कि वे अपने-अपने जिलों के संवेदनशील और अतिसंवेदनशील क्षेत्रों का एक व्यापक सर्वेक्षण करें, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं ऐसी अवैध खेती तो नहीं हो रही है. विपक्ष कांग्रेस ने शुक्रवार को समाप्त हुए राज्य विधानसभा के बजट सत्र के दौरान इस मुद्दे पर सरकार को निशाने पर लिया और आरोप लगाया कि सत्ताधारी भाजपा, देश के "चावल के कटोरे" के रूप में पहचाने जाने वाले छत्तीसगढ़ को "अफीम का कटोरा" बनाना चाहती है. (PTI)
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