Crop Damage: बेमौसम बारिश से प्याज की फसल तबाह, उपज में 15% तक गिरावट का अनुमान

Crop Damage: बेमौसम बारिश से प्याज की फसल तबाह, उपज में 15% तक गिरावट का अनुमान

नासिक में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से 4,500 हेक्टेयर से अधिक प्याज की फसल को नुकसान हुआ है. उत्पादन में 12-15% गिरावट की आशंका है, जबकि गिरती कीमतों से किसान पहले ही संकट में हैं.

Advertisement
बेमौसम बारिश से प्याज की फसल तबाह, उपज में 15% तक गिरावट का अनुमानमहाराष्ट्र में प्याज किसानों को बड़ा नुकसान

महाराष्ट्र के नासिक जिले की पांच तालुकों में 4,500 हेक्टेयर से ज्यादा खेत में प्याज की फसल को नुकसान पहुंचा है. गुरुवार को जिले के कुछ हिस्सों में हुई बेमौसम भारी बारिश से प्याज की फसल को काफी नुकसान हुआ है. अधिकारियों का अनुमान है कि इस मौसम में कुल उत्पादन में 12%-15% की गिरावट आ सकती है. 'टाइम्स ऑफ इंडिया' की एक रिपोर्ट ने इस बात की जानकारी दी.

महाराष्ट्र के कृषि विभाग के शुरुआती आकलन के अनुसार, सबसे ज्यादा नुकसान मालेगांव में हुआ है, जहां 1,646 हेक्टेयर जमीन प्रभावित हुई है. इसके बाद सटाणा का नंबर आता है, जहां 1,598 हेक्टेयर जमीन पर फसल को नुकसान पहुंचा है. बाकी 950 हेक्टेयर फसल के नुकसान की रिपोर्ट नंदगांव, निफाड़ और सिन्नर तालुकों से मिली है.

रबी प्याज के रकबे में गिरावट

इस साल, नासिक में रबी प्याज की खेती के तहत आने वाले रकबे में पहले ही कमी देखी गई थी. पिछले साल के 1.8 लाख हेक्टेयर के मुकाबले इस साल यह रकबा लगभग 10% घटकर 1.6 लाख हेक्टेयर रह गया था.

अधिकारियों ने 'टाइम्स ऑफ इंडिया' को बताया कि इस मौसम में गर्मियों की प्याज का उत्पादन 12%-15% तक गिर सकता है, क्योंकि अचानक हुई बारिश से लगभग 4,500 हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचा है. उत्पादन पिछले साल के 39 लाख मीट्रिक टन से घटकर इस साल लगभग 34 लाख मीट्रिक टन रहने की संभावना है.

गुरुवार को, भारी बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि से पूरे जिले में लगभग 7,000 हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचा. इसमें सबसे ज्यादा नुकसान गर्मियों की प्याज को हुआ, जबकि अनार के बागों को भी काफी नुकसान पहुंचा. कुल 1,377 हेक्टेयर अनार के बाग प्रभावित हुए, जिनमें से अकेले मालेगांव में 1,264 हेक्टेयर बागों को नुकसान पहुंचा.

मंडियों में प्याज की आवक में तेजी

इस बीच, जिले की APMC मंडियों में गर्मियों की प्याज की आवक में पिछले 10 दिनों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखी गई है. बाजार में अभी भी देर से आने वाली खरीफ प्याज का ही दबदबा बना हुआ है, जो कुल आवक का लगभग 80% है. शुक्रवार को, देश की सबसे बड़ी थोक प्याज मंडी, लासलगांव APMC में लगभग 3,600 क्विंटल गर्मियों की प्याज की नीलामी हुई. इसकी औसत कीमत 1,250 रुपये प्रति क्विंटल रही. कीमतें 555 रुपये से लेकर 1,500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहीं. देर से आने वाली खरीफ प्याज की औसत कीमत 890 रुपये प्रति क्विंटल रही, और उसी दिन इसकी 10,200 क्विंटल की नीलामी हुई.

किसानों का कहना है कि पिछले तीन महीनों में थोक कीमतों में आई भारी गिरावट से वे काफी परेशान हैं. प्याज किसान निवृत्ती न्याहारकर ने कहा, "उत्पादन की लागत लगभग 1,800 रुपये प्रति क्विंटल है. अगर बेचने की कीमत इससे कम हो जाती है, तो हमें भारी नुकसान होता है. पिछले कई महीनों से कीमतें लागत से नीचे बनी हुई हैं. हम चाहते हैं कि राज्य सरकार उन किसानों को 1,500 रुपये प्रति क्विंटल का अनुदान दे, जिन्होंने नुकसान में प्याज बेचा है."

प्याज सप्लाई में आएगी रुकावट

खरीफ और देर से आने वाले खरीफ प्याज सिर्फ 25-30 दिनों तक ही टिकते हैं, जबकि गर्मियों में होने वाले प्याज (रबी प्याज) की शेल्फ लाइफ छह से सात महीने होती है, जिससे ये बाजार की स्थिरता के लिए बहुत जरूरी हो जाते हैं. इनकी कटाई मार्च-अप्रैल में होती है और ये अक्टूबर के मध्य तक खरीफ की फसल आने तक आपूर्ति बनाए रखते हैं. इस चक्र में कोई भी रुकावट अक्सर कमी का कारण बन जाती है.

POST A COMMENT