बिना केमिकल खाद के करें काला नमक चावल की खेती, जैविक तरीके से मिलेगी बंपर पैदावार

बिना केमिकल खाद के करें काला नमक चावल की खेती, जैविक तरीके से मिलेगी बंपर पैदावार

काला नमक चावल अपनी खुशबू और खास स्वाद के लिए देशभर में मशहूर है. अब किसान इसे बिना रासायनिक खाद और कीटनाशकों के जैविक तरीके से उगाकर बेहतर क्वालिटी के साथ अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.

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बिना केमिकल खाद के करें काला नमक चावल की खेती, जैविक तरीके से मिलेगी बंपर पैदावारकाला नमक चावल की खेती

काला नमक चावल भारत की पारंपरिक और सुगंधित धान किस्मों में शामिल है. इस चावल की सबसे बड़ी खासियत इसकी प्राकृतिक सुगंध है. पकने के बाद इसकी खुशबू दूर तक फैल जाती है. स्वाद के मामले में भी यह सामान्य चावल से अलग और अधिक आकर्षक माना जाता है. यही कारण है कि देश-विदेश के बाजारों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. खास बात यह है कि किसान इसकी खेती को गैर रासायनिक यानी जैविक और प्राकृतिक तरीके से करके बेहतर क्वालिटी वाला चावल तैयार कर सकते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं काला नमक चावल की गैर रासायनिक खेती के बारे में पूरी जानकारी.

खेत की तैयारी और मिट्टी का चयन

डॉ राम चेत चौधरी के मुताबिक, काला नमक चावल की खेती के लिए ऐसी जमीन बेहतर मानी जाती है जिसमें पानी की निकासी की अच्छी व्यवस्था हो. खेत की तैयारी के लिए सबसे पहले मिट्टी की अच्छी तरह जुताई करें और खेत को समतल कर लें. प्राकृतिक खेती में खेत की मिट्टी को जीवित रखने पर जोर दिया जाता है. इसके लिए बुवाई से पहले खेत में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद, कंपोस्ट या वर्मी कंपोस्ट डालना फायदेमंद रहता है. वहीं, मिट्टी में जीवांश बढ़ाने के लिए किसान जीवामृत, घनजीवामृत और हरी खाद का भी उपयोग कर सकते हैं. इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं.

पौध तैयार करने और रोपाई का तरीका

काला नमक चावल की अच्छी पैदावार के लिए सबसे पहले स्वस्थ और प्रमाणित बीज का चयन करें. वहीं, पौध तैयार करने से पहले बीज उपचार जरूर करें. केमिकल फ्री खेती में बीज उपचार के लिए रासायनिक दवाओं की जगह गोमूत्र, नीम आधारित घोल या अन्य जैविक उपायों का इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे बीज स्वस्थ रहते हैं और पौधों की शुरुआती बढ़वार बेहतर होती है.

नर्सरी में तैयार पौधों की रोपाई आमतौर पर 20 से 30 दिन बाद की जाती है. रोपाई के समय पौधों के बीच लाइन से लाइन की दूरी 20 सेमी. और पौधे से पौधे की दूरी 15 सेमी. रखें क्योंकि उचित दूरी रखना बेहद जरूरी है, ताकि उन्हें पर्याप्त धूप, हवा और पोषक तत्व मिल सकें. ज्यादा घनी रोपाई करने से पौधों में रोग और कीट लगने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है. इसलिए सही दूरी और बेहतर प्रबंधन अपनाकर किसान काला नमक चावल की स्वस्थ फसल तैयार कर सकते हैं.  

प्राकृतिक और जैविक खाद का इस्तेमाल

गैर रासायनिक खेती में रासायनिक यूरिया और डीएपी की जगह जैविक खादों का इस्तेमाल किया जाता है. किसान गोबर की सड़ी खाद, वर्मी कंपोस्ट, कंपोस्ट खाद, हरी खाद और जीवामृत का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके अलावा नीम की खली का उपयोग भी फायदेमंद होता है. इससे मिट्टी में पोषक तत्व बढ़ते हैं और कुछ हद तक कीटों का नियंत्रण भी होता है. समय-समय पर जैविक घोल का छिड़काव करने से पौधों की बढ़वार अच्छी होती है.

कीट और रोग नियंत्रण के प्राकृतिक उपाय

काला नमक चावल की फसल में तना छेदक, पत्ती लपेटक और अन्य कीटों के लगने का खतरा रहता है. ऐसे में किसान रासायनिक कीटनाशकों की जगह नीम आधारित जैविक कीटनाशक, दशपर्णी अर्क और जीवाणु आधारित जैविक दवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके अलावा खेत में पक्षियों के बैठने के लिए जगह बनाना भी कीट नियंत्रण का एक प्राकृतिक तरीका है. साथ ही खेत की नियमित निगरानी करने से शुरुआती अवस्था में ही समस्या को पहचाना जा सकता है.

सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण

धान की फसल में पानी का सही प्रबंधन बहुत महत्वपूर्ण होता है. खेत में हमेशा पानी भरा रखना जरूरी नहीं होता, बल्कि फसल की जरूरत के अनुसार सिंचाई करनी चाहिए. सही समय पर और संतुलित मात्रा में पानी देने से पानी की बचत होती है, साथ ही पौधों की जड़ें मजबूत बनती हैं और फसल का विकास बेहतर होता है.

खरपतवार नियंत्रण के लिए किसान प्राकृतिक तरीकों को अपना सकते हैं. इसके लिए हाथ से निराई-गुड़ाई, कोनो वीडर का इस्तेमाल या मल्चिंग जैसे उपाय बेस्ट रहते हैं. इससे खेत में अनावश्यक खरपतवार कम होते हैं और फसल को पोषक तत्व, पानी और धूप सही से मिलता है. सही खरपतवार प्रबंधन से पौधों की बढ़वार अच्छी होती है और उत्पादन में भी सुधार आता है.

बढ़ती मांग से किसानों को फायदा

काला नमक चावल की पहचान अब देश के बाहर भी तेजी से बनते जा रहा है. इसकी प्राकृतिक खुशबू और बेहतर क्वालिटी के कारण बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलती है. काला नमक चावल की कीमत इसकी क्वालिटी, पैकिंग और बिक्री स्थान के आधार पर अलग-अलग हो सकती है. स्थानीय बाजारों और उत्पादक क्षेत्रों (जैसे उत्तर प्रदेश) में यह चावल आमतौर पर 75 से 120 रुपये प्रति किलो तक मिल जाता है.

वहीं, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मिलने वाला ऑर्गेनिक और अनपॉलिश्ड काला नमक चावल  लगभग 150 से 350 रुपये प्रति किलो तक मिलती है. ऐसे में अगर किसान सही बीज, जैविक खाद, प्राकृतिक कीट नियंत्रण अपनाएं तो काला नमक चावल की खेती कम लागत में बेहतर मुनाफा देने वाली फसल साबित हो सकती है. वहीं, प्राकृतिक खेती से प्रति एकड़ 20 क्विंटल तक का उत्पादन मिलता है. 

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