पंजाब में किसानों पर चौतरफा मार: पहले बारिश ने रूलाया, अब फसलों की कटाई में लग रहे हजारों रुपये

पंजाब में किसानों पर चौतरफा मार: पहले बारिश ने रूलाया, अब फसलों की कटाई में लग रहे हजारों रुपये

गेहूं की फसल जमीन पर बिल्कुल गिर चुकी है जिसको कंबाइन के साथ काटना मुश्किल है. इसलिए फसल की कटाई हाथ से की जा रही है जिसका प्रति एकड़ खर्च 8000 रुपये आ रहा है. यह भारी खर्च इसलिए हो रहा है क्योंकि लेबर काफी महंगी मिल रही है. सतनाम सिंह चाहते हैं कि नुकसान हुई फसल का सरकार मुआवजा दे तो थोड़ा बहुत खर्च किसानों का निकल सकता है.

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पंजाब में किसानों पर चौतरफा मार: पहले बारिश ने रूलाया, अब फसलों की कटाई में लग रहे हजारों रुपयेपंजाब मे हाथ से गेहूं की कटाई करने से खेती का खर्च बढ़ गया है

पंजाब में गेहूं की कटाई शुरू हो चुकी है. लेकिन इस बार किसानों की फसलें बेमौसमी बरसात और ओलावृष्टि से बहुत हद तक खराब हो गई हैं. सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं को हुआ है. गेहूं की फसल जमीन पर गिर चुकी है जिसको कंबाइन के साथ काटना मुश्किल है. यही वजह है कि किसान गेहूं की कटाई हाथ से कर रहा है. पहले किसान की फसल का नुकसान बेमौसमी बरसात और ओलावृष्टि से हुआ. अब महंगे दाम की लेबर गेहूं की कटाई करने के लिए लग रही है. कई किसानों की शिकायत है कि इस बार उनकी खेती पर चौतरफा मार पड़ रही है और उनके सामने बेचारगी में इस स्थिति को देखने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है.

इसी में एक किसान पंजाब के संगरूर के सतनाम सिंह हैं जो गांव लड्डी के रहने वाले हैं. सतनाम सिंह अपने चार एकड़ खेत में गेहूं की कटाई हाथ से कर रहे हैं. किसान सतनाम सिंह ने बताया कि इस बार भी मौसमी बरसात का असर उनकी गेहूं की फसल पर देखने को मिली है. इससे उन्हें भारी नुकसान हुआ है. सतनाम सिंह कहते हैं, पहले वे फसल को कंबाइन के साथ काटते थे जो कि बेहद सस्ता और कम समय में हो जाता था. प्रति एकड़ गेहूं की कटाई के लिए 1200 से लेकर 1300 रुपये खर्च होते थे. 

सतनाम सिंह कहते हैं, लेकिन अब गेहूं की फसल जमीन पर बिल्कुल गिर चुकी है जिसको कंबाइन के साथ काटना मुश्किल है. इसलिए फसल की कटाई हाथ से की जा रही है जिसका प्रति एकड़ खर्च 8000 रुपये आ रहा है. यह भारी खर्च इसलिए हो रहा है क्योंकि लेबर काफी महंगी मिल रही है. सतनाम सिंह चाहते हैं कि नुकसान हुई फसल का सरकार मुआवजा दे तो थोड़ा बहुत खर्च किसानों का निकल सकता है. इससे उन्हें बड़ी राहत मिलेगी.

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किसान सतनाम सिंह के पिता बीके सिंह ने बताया कि इस बार हाथ से गेहूं की कटाई करने का कारण है कि मवेशियों को डालने के लिए सूखे चारे की कमी है. हाथ से गेहूं काटने से मवेशियों के लिए चारे का इंतजाम हो जाएगा. किसान बीके सिंह कहते हैं, इस बार सभी किसानों की गेहूं की फसल जमीन पर गिर चुकी है. गेहूं से सूखा चारा मिलता है जिसे तुड़ी बोलते हैं. इस बार तुड़ी बेहद कम होगी और आगे जाकर बहुत ज्यादा महंगी भी होगी. 

wheat harvesting

एक और किसान मीका सिंह ने बताया कि अगर वे अपने खेत में कंबाइन के साथ गेहूं की कटाई करते हैं तो इससे तुड़ी यानी कि सूखा चारा अधिक निकलेगा. कंबाइन से काटने पर ऐसा नहीं होता. इस बार पशुओं के लिए चारे का इंतजाम तो हो जाएगा, लेकिन गेहूं की कटाई बहुत महंगी पड़ेगी. मीका सिंह ने कहा कि प्रति एकड़ हाथ से गेहूं की कटाई करने पर सात से लेकर 8000 रुपये तक खर्च आ रहा है.

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खेत में काम कर रहे मजदूर मिट्ठू सिंह का कहना है कि पहले हम खेत में काम करने के लिए किसान से गेहूं और सूखा चारा भी लेते थे. लेकिन अब गेहूं की भी कमी है और सूखा चारा भी नहीं है. इसलिए हम 500 रुपये प्रति दिन की दिहाड़ी ले रहे हैं. मिट्ठू सिंह कहते हैं, वैसे तो दिहाड़ी ज्यादा चल रही है, लेकिन किसान भी हमारे ही साथी हैं. इनका नुकसान हुआ है, इसीलिए हम आम दिनों के मुकाबले कम पैसा ले रहे हैं.

wheat harvesting

एक तरफ कटनी का खर्च अधिक आ रहा है तो दूसरी ओर फसलों की बड़े स्तर पर बर्बादी हुई है. पंजाब के काफी इलाके ऐसे हैं जहां पर ओलावृष्टि के कारण किसानों की फसल 100 परसेंट तक बर्बाद हो चुकी है. किसान पिछले कई दिनों से सरकार से फसलों का मुआवजा मांग रहे हैं.

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