पंजाब के किसानों पर मौसम की बेहद तगड़ी मार पड़ी है. यह मार दोहरी है क्योंकि एक तरफ बारिश ने खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाया तो दूसरी ओर कई फसलें तेज हवा के चलते लेट गईं. अब इन फसलों के खराब होने की आशंका बढ़ गई है. यह नुकसान केवल पंजाब में नहीं है बल्कि ठीक ऐसी ही स्थिति हरियाणा में भी देखी जा रही है. पंजाब और हरियाणा के अधिकांश इलाकों में अभी हाल में तेज बारिश हुई. साथ में तेज हवाएं भी चलीं. इससे खेतों में खड़ी फसलें चौपट हुईं, खासकर जिन धानों की अभी कटाई नहीं है. दूसरी ओर, मंडियों में जो अनाज खुले में पड़ा था, वह भी भीग गिया है जिससे सड़ने का खतरा पैदा हो गया है. कई मंडियों में धान की खरीद शुरू हो चुकी है और खुले में धान की उपज पड़ी हुई है.
पंजाब और हरियाणा के कई हिस्सों से फसल नुकसान की खबरें आ रही हैं. इससे किसानों में घोर मायूसी है. किसान इसलिए भी परेशान हैं क्योंकि मौसम विभाग बार-बार बारिश का अलर्ट दे रहा है. अभी मंगलवार तक पंजाब के 10 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया था. पटियाला के नायडू गांव के किसान दर्शन सिंह ने India Today से कहा कि खराब मौसम ने उनकी 30 फीसद तक फसल बर्बाद कर दी है. इससे वे घोर निराशा में हैं.
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किसानों की चिंता की वजह केवल बारिश और आंधी नहीं है. एक और मामला भी है जिससे वे परेशान हैं. चिंता का एक अन्य कारण चावल मिल मालिकों की हड़ताल भी है जिसे कमीशन एजेंटों द्वारा समर्थन दिया जा रहा था. हालांकि यह दावा किया गया है कि हड़ताल खत्म कर दी गई है लेकिन किसान अभी भी अपनी फसल उठाने का इंतजार कर रहे हैं. दरअसल मंडियों में मजदूर उपज का उठान करते हैं जिससे मंडियों में जगह बनती है और नई उपजों की खरीद होती है. लेकिन मंडियों में मजदूर हड़ताल पर हैं जिसका बुरा असर खरीदारी से लेकर उठान तक पर देखा जा रहा है.
किसान दर्शन सिंह कहते हैं, "नमी के कारण फसल पूरी तरह से खराब हो गई है. हम पिछले सात दिनों से फसल उठान का इंतजार कर रहे हैं और आढ़ती फसल नहीं उठा रहे हैं. बारिश से 40 फीसदी तक फसल खराब हो गई है." उन्होंने आगे कहा कि 'किसान अभी भी राज्य और केंद्र सरकार दोनों से मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं.'
दर्शन सिंह ने फसल को बचाने के लिए अनाज मंडियों में अच्छी व्यवस्था करने में विफल रहने के लिए राज्य सरकार की भी आलोचना की. दर्शन सिंह कहते हैं, "राज्य सरकार ने पहले भी चार बार खेतों का सर्वेक्षण किया, लेकिन क्षतिग्रस्त फसलों का कोई मुआवजा नहीं दिया गया. इस बार उन्होंने सर्वेक्षण भी नहीं किया. हमें असहाय छोड़ दिया गया है."
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फतेहगढ़ के नारायणगढ़ के रहने वाले एक अन्य किसान रणजोत सिंह ने कहा कि उनकी 100 क्विंटल से अधिक धान की फसल बर्बाद हो गई है. रणधीर सिंह उन किसानों में से एक हैं जो पिछले एक हफ्ते से राजपुरा अनाज मंडी में फसल उठान का इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने चार एकड़ में धान बोया था, जिसमें से 1.5 एकड़ क्षेत्र में फसल खराब हो गई है. रणधीर कहते हैं, "पिछले सीज़न में भी हमें घाटा हुआ था लेकिन इस बार यह लगभग दोगुना है. हमें कोई मुआवज़ा नहीं दिया गया है."
दिलचस्प बात यह है कि बेमौसम बारिश के कारण खेतों में आग लगने की कुछ घटनाएं हुई हैं, जिससे नई दिल्ली और एनसीआर के लोगों को राहत मिली है. सोमवार को राज्य में बारिश के कारण पराली जलाने का कोई मामला सामने नहीं आया. हालांकि, जैसे-जैसे धान की कटाई अपने चरम पर पहुंच रही है, खेत में आग लगने के मामले बढ़ रहे हैं. बारिश से धुंध पर कुछ कंट्रोल जरूर हुआ है. पंजाब की विभिन्न अनाज मंडियों में सोमवार तक 37,222 मीट्रिक टन से अधिक धान की आवक हो चुकी है, जिसमें से 27,342 मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है. सोमवार की दोपहर तक मात्र 2993 एमटी धान का उठाव हुआ था.
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